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कारक विश्लेषण

कारक विश्लेषण
दूरस्थ शिक्षा के प्रति महिला शिक्षार्थियों के दृष्टिकोण पर एक अध्ययन | Original Article Jayshree Gautam*, Dr. Binay Kumar, in Journal of Advances and Scholarly Researches in Allied Education | Multidisciplinary Academic Research

कारक विश्लेषण

Year: Jan, 2021
Volume: 18 / Issue: 1
Pages: 451 - 457 (7)
Publisher: Ignited Minds Journals
Source:
E-ISSN: 2230-7540
DOI:
Published URL: http://ignited.in/I/a/305919
Published On: Jan, 2021

Article Details

दूरस्थ शिक्षा के प्रति महिला शिक्षार्थियों के दृष्टिकोण पर एक अध्ययन | Original Article

Jayshree Gautam*, Dr. Binay Kumar, in Journal of Advances and Scholarly Researches in Allied Education | Multidisciplinary Academic Research

बाल विकास Quiz 19

71) व्यक्ति की वह योग्यता या शक्ति, जिसके द्वारा वह नवीन रचना/उत्पादन करता है उसे किस नाम से संबोधित करते है?

(कारक विश्लेषण 4)मानसिक परिपक्वता का

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कोविड: पूर्वोत्तर, केरल को लेकर चिंता, आर-कारक बढ़ने कारक विश्लेषण से उपचाराधीन मामलों में कमी की दर धीमी

नयी दिल्ली, 11 जुलाई (भाषा) देश में संक्रमण किस गति से बढ़ रही है इसका संकेत देने वाले आर-कारक (प्रजनन कारक) में हाल में बढ़ोतरी देखी गई कारक विश्लेषण है, जिससे उपचाराधीन मरीजों के ठीक होने की दर धीमी हुई है तथा केरल व पूर्वोत्तर उन क्षेत्रों के तौर पर उभरे हैं, जो चिंता की वजह बन रहे हैं। यह तब है जब नए मामलों के राष्ट्रव्यापी आंकड़े कम बने हुए हैं। चेन्नई स्थित गणितीय विज्ञान संस्थान के अनुसंधानकर्ताओं के एक विश्लेषण में यह खुलासा हुआ है। इन विश्लेषण के मुताबिक आर-कारक जून के अंत में मामूली रूप से बढ़कर 0.88 हो गया

यह तब है जब नए मामलों के राष्ट्रव्यापी आंकड़े कम बने हुए हैं। चेन्नई स्थित गणितीय विज्ञान संस्थान के अनुसंधानकर्ताओं के एक विश्लेषण में यह खुलासा हुआ है।

इन विश्लेषण के मुताबिक आर-कारक जून के अंत में मामूली रूप से बढ़कर 0.88 हो गया जबकि मई के मध्य से पिछले महीने के आखिर तक यह अपने न्यूनतम 0.78 पर था।

यह ऐसे वक्त हुआ है जब कई राज्यों ने कोविड-19 की जानलेवा दूसरी लहर के बाद सामान्य जीवन की तरफ लौटने के प्रयास के तहत कारक विश्लेषण अनलॉक की प्रक्रिया शुरू की है। दूसरी लहर में अब गिरावट के संकेत हैं लेकिन अप्रैल-मई में अपने चरम के दौरान इसने लाखों लोगों को संक्रमित किया और हजारों लोगों की जान ले ली।

अनुसंधानकर्ताओं के दल का नेतृत्व करने वाले सीताभ्र सिन्हा ने कहा कि भारत के लिये ‘आर’ अब भी एक से नीचे है, इसलिये उपचाराधीन मरीज की संख्या धीमी गति से घट रही है। उपचाराधीन मरीजों की संख्या में गिरावट की दर की धीमी गति का यह रुझान कई राज्यों में देखने को मिल रहा है।

सिन्हा ने इंगित किया, “केरल में संक्रमण के मामलों में थोड़ी बढ़ोतरी देखी गई है और उसका ‘आर’ एक के करीब बना हुआ है। पूर्वोत्तर क्षेत्र को लेकर बड़ी चिंता है। मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश और संभवत: त्रिपुरा संक्रमण के मामलों में बढ़ोतरी दर्शा रहे हैं।”

कोविड-19 संक्रमण की दूसरी लहर जब चरम पर थी, तब देश में कुल आर-वैल्यू के नौ मार्च से 21 मार्च के बीच 1.37 होने का कारक विश्लेषण अनुमान था। विश्लेषण के मुताबिक, यह 24 अप्रैल से एक मई के बीच गिरकर 1.18 था और उसके बाद 29 अप्रैल से सात मई के बीच 1.10 पाया गया था।

इसके मुताबिक, नौ मई से 11 मई के बीच आर-वैल्यू के करीब 0.98 होने का अनुमान था, जो 14 मई से 30 मई के बीच घटकर 0.82 हो गया था। आर-वैल्यू 15 मई से 26 जून के बीच 0.78 था जबकि 20 जून से सात जुलाई के बीच यह बढ़कर 0.88 हो गया।

केरल में आर-वैल्यू के करीब 1.10 होने का अनुमान है । जहां तक पूर्वोत्तर राज्यों की बात करें तो मणिपुर के लिए ‘आर’ 1.07, मेघालय के लिये 0.92, त्रिपुरा के लिये 1.15, मिजोरम के लिये 0.86, अरुणाचल प्रदेश के लिये 1.14, सिक्किम कारक विश्लेषण के लिये 0.88 और असम के लिये 0.86 है।

हाल में सामने आए जीका वायरस के साथ केरल में कोविड-19 के बढ़ते मामले स्वास्थ्य अधिकारियों के लिये चिंता का विषय हैं क्योंकि दक्षिणी राज्य संक्रमण के दैनिक नए मामलों में कमी लाने के लिये जूझ रहा है।

केरल में शनिवार को कोविड-19 के 14087 नए मामले सामने आए जबकि 109 लोगों की इससे जान चली गई। नए आंकड़ों कारक विश्लेषण के बाद प्रदेश में संक्रमितों की कुल संख्या बढ़कर 3039029 हो गई है जबकि महामारी से जान गंवाने वालों का कुल आंकड़ा बढ़कर 14380 पहुंच गया है। प्रदेश में उपचाराधीन मरीजों की संख्या 113115 है।

केरल में एक जून को जहां संक्रमण के 19760 नए मामले सामने आए थे, वहीं एक हफ्ते तक थोड़ी कमी के बाद सात जून को 9313 नए मामले मिले थे। दो दिन बाद ही हालांकि मामले बढ़कर 16204 हो गए। करीब एक महीने से ज्यादा समय से वहां संक्रमण के नए मामलों की दैनिक संख्या 11 हजार से 13 हजार के बीच है।

सिन्हा ने कहा, “भारत में ‘आर’ का मई के मध्य से जून के अंत सबसे कम वैल्यू 0.78 (पिछले साल मार्च में महामारी शुरू होने के बाद से) था, जो जून के अंत से थोड़ा बढ़कर 0.88 हो गया है।”

मुख्य अनुसंधानकर्ता ने कहा कि इसका मतलब है कि हर 100 संक्रमित व्यक्ति 88 अन्य व्यक्तियों में संक्रमण फैला सकते हैं। अगर ‘आर’ एक से कम है तो इसका मतलब है कि नए संक्रमित लोगों की संख्या पूर्ववर्ती अवधि में संक्रमित लोगों की तुलना में कम है और इसका अर्थ है कि रोग के मामले कम हो रहे हैं।

दरभंगा : सामाजिक विज्ञान शोध में एस पी एस एस की उपयोगिता पर राष्ट्रीय कार्यशाला

Workshop-in-lnmu-darbhanga

दरभंगा, आज विश्वविद्यालय मनोविज्ञान विभाग द्वारा आयोजित सामाजिक विज्ञान शोध में एस पी एस एस की उपयोगिता पर राष्ट्रीय कार्यशाला के दूसरे दिन इलाहाबाद विश्वविद्यालय के डॉ संजय कुमार ने प्रथम तकनीकी सत्र में वर्णनात्मक सांख्यिकी ज्ञात करने के तरीके और सहसंबंध की उपयोगिता तथा उसे ज्ञात करने के बारीकियों से छात्र को अवगत करायाI प्रतिभागियों द्वारा स्वयं भी इसे ज्ञात करने के लिए प्रैक्टिस कराया गयाI दूसरे सत्र में टी-अनुपात तथा प्रसरण विश्लेषण ज्ञात करने की अवधारणा को विस्तार से बताया गया तथा वर्कशीट कारक विश्लेषण पर प्रतिभागियों द्वारा इसे ज्ञात करना भी सिखाया गयाI कार्यशाला में इस बात पर बल दिया गया कि प्रतिभागी स्वयं एसपीएसएस सॉफ्टवेयर के माध्यम से इन गणनाओं को स्वयं ज्ञात कर सके ताकि वे अपने शोध में सांख्यिकी विश्लेषण करने में आत्मनिर्भर हो सकेI कल कार्यशाला के तीसरे दिन पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के प्रोफेसर रणविजय नारायण सिन्हा एसपीएसएस द्वारा मल्टीपल प्रतिगमन तथा कारक विश्लेषण ज्ञात करने की बारीकियों से कारक विश्लेषण अवगत कराएंगेI कल कार्यशाला के समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रुप में माननीय प्रतिकुलपति प्रोफेसर डौली सिन्हा तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रोफेसर जितेंद्र नारायण, अध्यक्ष, सामाजिक विज्ञान संकाय की गरिमामयी उपस्थित होगीI इस आशय की जानकारी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर ध्रुव कुमार ने दीI कारक विश्लेषण आज तकनीकी सत्र में प्रोफेसर जीतेन्द्र नारायण, डॉ. बिमल कुमार चौधरी, एआईएच के अध्यक्ष, मिल्लत कॉलेज के प्रधानाचार्य प्रोफेसर इफ्तेखार अहमद भी उपस्थित हुएI

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