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कुल लिक्विडिटी

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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण।

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इंदौर (मध्य प्रदेश) पुलिस ने 12वीं की छात्रा की होटल में आपत्तिजनक वीडियो और तस्वीरें लेकर उससे छेड़छाड़ करने व ब्लैकमेल कर ₹1.2 लाख ऐंठने के आरोप में एक शख्स को गिरफ्तार किया है। बकौल पुलिस, दोनों की दोस्ती सोशल मीडिया पर हुई थी व आरोपी को देने के लिए पीड़िता अपने घर से नकदी और गहने चुरा रही थी।

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RBI ने अम्ब्रेला संगठन में UCB के निवेश को गैर-SLR होल्डिंग लिमिटेड से छूट दी

RBI exempts UCBs’ investment in Umbrella Organisation

3 मार्च 2022 को, भारतीय रिजर्व बैंक(RBI) ने 30 जनवरी 2009 कुल लिक्विडिटी के RBI के परिपत्र प्राथमिक (शहरी) सहकारी बैंकों द्वारा गैर-SLR प्रतिभूतियों में निवेश के पैराग्राफ 2 (i) और 2 (iii) (b) में निर्धारित गैर-सांविधिक तरलता अनुपात(गैर-SLR) होल्डिंग लिमिटेड से प्राथमिक सहकारी बैंक(UCB) द्वारा छाता संगठन (UO) में किए गए निवेश को छूट दी है।

सीमाएं क्या हैं?

i. पैराग्राफ 2(i)- गैर-SLR निवेश पिछले वर्ष के 31 मार्च को बैंक की कुल जमा राशि के 10% तक सीमित होना चाहिए।

ii. पैराग्राफ 2(iii)(b) – असूचीबद्ध प्रतिभूतियों में निवेश किसी भी समय कुल गैर-SLR निवेश के 10% से अधिक नहीं होना चाहिए।

अब RBI द्वारा उपर्युक्त परिपत्र में नवीनतम संशोधन के साथ, प्राथमिक शहरी सहकारी बैंकों द्वारा गैर-SLR प्रतिभूतियों में निवेश पर ये सीमाएं नहीं लगाई जाएंगी।

प्रमुख बिंदु:

i. इस कदम से UCB को UO की पूंजी की सदस्यता लेने और इसकी सदस्यता हासिल करने के लिए प्रोत्साहित करने की उम्मीद है।

  • UO एक गैर-बैंकिंग वित्त कंपनी (NBFC) है जिसके पास मजबूत वित्तीय मानदंड हैं।
  • यह जरूरत पड़ने पर UCB को क्रॉस लिक्विडिटी और कैपिटल सपोर्ट प्रदान करता है।

ii. गैर-SLR प्रतिभूतियों में डिबेंचर/बांड, वरीयता शेयर, इक्विटी शेयर, म्यूचुअल फंड इकाइयां, वाणिज्यिक पत्र और प्रतिभूतिकरण/पुनर्निर्माण कंपनी द्वारा जारी प्रतिभूतियों में निवेश शामिल हैं।

iii. RBI ने UCB क्षेत्र के लिए UO के गठन के लिए जून 2019 में नेशनल फेडरेशन ऑफ अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक्स एंड क्रेडिट सोसाइटीज लिमिटेड (NAFCUB) को नियामक मंजूरी दी थी।

  • अनुमोदन UCB को स्वैच्छिक आधार पर UO की पूंजी की सदस्यता लेने की अनुमति देता है।
  • RBI के अनुसार, मार्च-अंत 2021 तक, देश में 1,534 UCB थे।

हाल के संबंधित समाचार:

3 जनवरी 2022 को, RBI ने ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए कार्ड, वॉलेट, मोबाइल उपकरणों आदि का उपयोग करके ऑफ़लाइन मोड में छोटे मूल्य के डिजिटल भुगतान की सुविधा के लिए एक रूपरेखा जारी की। एक ऑफ़लाइन भुगतान लेनदेन की ऊपरी सीमा 200 रुपये तय की गई थी, किसी भी समय भुगतान साधन पर कुल सीमा 2,000 रुपये थी।

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के बारे में:

स्थापना – 1 अप्रैल, 1935
मुख्यालय – मुंबई, महाराष्ट्र
राज्यपाल – शक्तिकांत दास
डिप्टी गवर्नर – महेश कुमार जैन, माइकल देवव्रत पात्रा, M राजेश्वर राव, T रबी शंकर

SBI: 1 नवंबर से बदल जाएगा ये नियम, करोड़ों ग्राहकों की सेविंग पर होगा सीधा असर

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने अर्थव्यवस्था में लिक्विडिटी को देखते हुए बैंक डिपोजिट और फिक्स्ड डिपोजिट (FD) पर ब्याज कम कर दिया है। अब 1 लाख रुपये तक के बैंक डिपोजिट पर 3.50 फीसदी की जगह 3.25 फीसदी.

SBI: 1 नवंबर से बदल जाएगा ये नियम, करोड़ों ग्राहकों की सेविंग पर होगा सीधा असर

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने अर्थव्यवस्था में लिक्विडिटी को देखते हुए बैंक डिपोजिट और फिक्स्ड डिपोजिट (FD) पर ब्याज कम कर दिया है। अब 1 लाख रुपये तक के बैंक डिपोजिट पर 3.50 फीसदी की जगह 3.25 फीसदी का ब्याज मिलेगा। ये नई ब्याज दरें 1 नवंबर 2019 से लागू होंगी।

एसबीआई बैंक ने बैंक डिपोजिट के अलावा टर्म डिपोजिट और बल्क डिपोजिट पर भी ब्याज दरें क्रमश: 10 बेसिस प्वाइंट और 30 बेसिस प्वाइंट घटा दी हैं। ये नई दर एक से दो साल तक के टर्म डिपोजिट पर लागू होंगी। ये नई दरें 10 अक्टूबर से लागू होंगी।

एफडी पर ब्याज दरें घटाने के अलावा एसबीआई ने छठी बार वित्त वर्ष 2019-20 के लिए एमसीएलआर (MCLR) घटा दिया है। यानी, अब एसबीआई बैंक का होम लोन, कार लोन, पर्सनल लोन आदि लोन लेना और सस्ता हो जाएगा। कुल लिक्विडिटी अब नई दरों के मुताबिक एमसीएलआर दर 10 अक्टूबर से 8.05 फीसदी होगी। एसबीआई ने ब्याज दरों में 10 बेसिस प्वाइंट की कटौती की है। दिवाली से पहले ब्याज दरों में कटौती कर एसबीआई बैंक ने लाखों ग्राहकों को तोहफा दिया है।

एसबीआई बैंक की लोन पर नई ब्याज दरें 8.15 फीसदी से घटकर 8.05 फीसदी हो गई है। ये नई दरें 10 अक्टूबर से लागू हो चुकी है। एसबीआई बैंक ने ब्याज दरें आरबीआई (RBI) के रेपो रेट घटाने के बाद किया है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने लोगों को दिवाली पर एक और तोहफा दिया था। आबीआई ने रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की कटौती की जिसके बाद रेपो रेट 5.40 फीसदी से घटकर 5.15 फीसदी हो गई है।

रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकान्त दास की अगुवाई वाली मौद्रिक नीति समिति (RBI Monetary Policy Meeting) तीन दिन की बैठक की में 4 अक्टूबर रेपो रेट में कटौती की थी।

लिक्विडिटी बढ़ाने को निर्मला सीतारमण ने बैंकों को दिया ‘शामियाना मंत्र’, अगले 10 दिनों तक 200 जिलों में नए कर्ज देने की सलाह, NPA में भी दी छूट

बकौल सीतारमण, “अगले 200 जिलों में कुछ ऐसी ही सभाएं 10 से 15 अक्टूबर के बीच होंगी। बाजार में लिक्विडिटी को लेकर हमने समीक्षा भी की है। यह कहते हुए खुशी भी है कि बैंक कम से कम आगे बढ़ रहे हैं।”

लिक्विडिटी बढ़ाने को निर्मला सीतारमण ने बैंकों को दिया ‘शामियाना मंत्र’, अगले 10 दिनों तक 200 जिलों में नए कर्ज देने की सलाह, NPA में भी दी छूट

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण।

देश की पस्त अर्थव्यवस्था और Economic Slowdown के माहौल के बीच वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बाजार में कैश की दिक्कत से निपटने के लिए बैंकों को शामियाना मंत्र दिया है। उन्होंने कहा है कि कर्ज देने के लिए नॉन बैंकिंग फाइनैंशियल कंपनियों के साथ देश भर के कुल 400 जिलों में बैंक खुली बैठकें/सभाएं करें।

गुरुवार (19 सितंबर, 2019) शाम प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने कहा- बैंक एनबीएफसी और खुदरा कर्ज लेने वालों के साथ 400 जिलों में बैठकें करेंगे। ये बैठकें अगले सप्ताह से शुरू होंगी। इसका मकसद मकान खरीदारों और किसानों समेत कर्ज चाहने वालों को ऋण सुलभ कराना है।

वित्त मंत्री के मुताबिक, “खुले रूप से ये बैठकें दो चरणों में होगी। पहली बैठक मंगलवार 24 सितंबर से 29 सितंबर को 200 जिलों में होगी। उसके बाद 10 अक्टूबर से 15 अक्टूबर के बीच 200 अन्य जिलों में इसी प्रकार की बैठकें होंगी। इसके पीछे सोच यह है कि त्योहारों के दौरान ज्यादा-से-ज्यादा कर्ज देना सुनिश्चित किया जा सके। दिवाली अक्टूबर में है और इसे देश में खरीदारी का सबसे अच्छा समय माना जाता है।”

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इन खुली बैठकों में खुदरा, कृषि और एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों) और आवास एवं अन्य क्षेत्रों के लिए कर्ज उपलब्ध कराए जाएंगे। मंत्री ने बताया कि बैंकों से दबाव वाले किसी भी एमएसएमई कर्ज को 31 मार्च 2020 तक फंसा कर्ज (एनपीए) घोषित नहीं करने को कहा गया है।

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के प्रमुखों के साथ बैठक के बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संवाददाता सम्मेलन मे कहा कि रिजर्व बैंक की ओर से पहले ही परिपत्र जारी किया जा चुका है, जिसमें कहा गया है कि एमएसएमई के दबाव वाले कर्ज को एनपीए घोषित नहीं किया जाए। बैंकों को इस परिपत्र का अनुपालन करने को कहा गया है। बैंकों से कहा गया है कि वे एमएसएमई के दबाव वाले कर्ज को मार्च, 2020 तक एनपीए घोषित नहीं करें और उनके कर्ज के पुनर्गठन के लिए काम करें।

उन्होंने कहा कि इससे एमएसएमई क्षेत्र की मदद हो सकेगी। बैंकों ने कुछ ऐसी एनबीएफसी की पहचान की हैं, जिन्हें कर्ज उपलब्ध कराया जा सकता है। ऐसे में कर्ज लेने के इच्छुक लोगों को नकदी और ऋण उपलब्ध कराया जा सकेगा। (पीटीआई-भाषा इनपुट्स के साथ)

Cash Withdraw: दिवाली पर खर्च के लिए लोगों ने बैंकों से निकाले 69000 करोड़, जमा घटकर 172.03 लाख करोड़ रहा

आंकड़ों के अनुसार, लोगों ने 29,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की उधारी भी ली, जिससे बैंकों का कुल कर्ज 128.60 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 128.89 लाख करोड़ पर पहुंच गया। त्योहारी सीजन बीतने के बाद बैंकों के पास नवंबर के पहले तीन दिनों में 71,090 करोड़ की तरलता बढ़ी है।

पैसा निकासी के लिए लगी लोगों की भीड़ (सांकेतिक तस्वीर)।

त्योहारी सीजन में लोगों की खरीदी का सीधा असर बैंकों के जमा पर दिखा है। 21 अक्तूबर के हफ्ते में बैंकों का जमा 69,000 करोड़ रुपये घटकर 172.03 लाख करोड़ रह गया, जो सात अक्तूबर को 172.72 लाख करोड़ रुपये था।

आंकड़ों के अनुसार, लोगों ने 29,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की उधारी भी ली, जिससे बैंकों का कुल कर्ज 128.60 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 128.89 लाख करोड़ पर पहुंच गया। त्योहारी सीजन बीतने के बाद बैंकों के पास नवंबर के पहले तीन दिनों में 71,090 करोड़ की तरलता बढ़ी है। बैंकों का कुल कर्ज सालाना आधार पर 17.9% बढ़ा है। जबकि जमा में केवल 9.5 फीसदी की बढ़त आई है। वैसे इस साल जनवरी से देखें तो जमा की तुलना में बैंकों का कर्ज ज्यादा बढ़ा है।

बैंक खुदरा कर्ज बढ़त
एसबीआई 10.74 18.84%
केनरा बैंक 1.34 12.52%
बैंक ऑफ बड़ौदा 1.58 28.40%
पीएनबी 1.55 16.95%
एचडीएफसी 5.80 20.20%
आईसीआईसीआई 4.78 25.00%
(आंकड़े लाख करोड़ रु. में, वृद्धि पिछले साल की तुलना में)

13 लाख करोड़ बढ़ा जमा
जनवरी में बैंकों का कुल जमा 159.82 लाख करोड़ रुपये था जबकि कर्ज 112.76 लाख करोड़ था। अप्रैल में जमा बढ़कर 167.42 लाख करोड़ और कर्ज 119.88 लाख करोड़ हो गया। जून तक जमा में गिरावट आई और यह 165.69 लाख करोड़ रुपये रहा। कर्ज में लगातार बढ़ोतरी जारी रही और यह 121.49 लाख करोड़ रुपये रहा। जुलाई के बाद जमा और कर्ज दोनों में जमकर तेजी आई। सितंबर में जमा जहां 170.56 लाख करोड़ हो गया वहीं कर्ज बढ़कर 125.51 लाख करोड़ रुपये हो गया।

जोखिम से बचने को उपाय नहीं कर रहे बैंक : एसबीआई
आरबीआई द्वारा रेपो रेट में वृद्धि के कारण कम होती तरलता के बीच एसबीआई ने एक रिपोर्ट में कहा कि बैंक संपत्ति और देनदारी में जोखिम का सही निर्धारण नहीं कर रहे हैं। ये ऐसे समय पर किया जा रहा है जब उधारी की मांग एक दशक के उच्च स्तर 18% पर पहुंच गई है। जमा की वृद्धि दर काफी पीछे है। तरलता कम होने का प्रमुख कारण आरबीआई की ओर से ब्याज दर बढ़ाना है। महंगाई को कम करने के लिए आरबीआई ने मई से अब तक ब्याज दरों में 1.90 फीसदी की वृद्धि की है।

सरकार ने दिवाली में नकदी का बड़ा हिस्सा खर्च किया
रिपोर्ट में कहा गया है कि ब्याज दर बढ़ने से पहले बैंकिंग प्रणाली में अप्रैल, 2022 में एवरेज नेट ड्यूरेबल लिक्विडिटी 8.3 लाख करोड़ रुपये था, जो अब घटकर 3 लाख करोड़ रुपये के करीब रह गया है। सरकार ने दिवाली के हफ्ते में कैश बैलेंस का एक बड़ा हिस्सा खर्च कर दिया है, जिससे कुछ सुधार हुआ है।

विस्तार

त्योहारी सीजन में लोगों की खरीदी का सीधा असर बैंकों के जमा पर दिखा है। 21 अक्तूबर के हफ्ते में बैंकों का जमा 69,000 करोड़ रुपये घटकर 172.03 लाख करोड़ रह गया, जो सात अक्तूबर को 172.72 लाख करोड़ रुपये था।

आंकड़ों के अनुसार, लोगों ने 29,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की उधारी भी ली, जिससे बैंकों का कुल कर्ज 128.60 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 128.89 लाख करोड़ पर पहुंच गया। त्योहारी सीजन कुल लिक्विडिटी बीतने के बाद बैंकों के पास नवंबर के पहले तीन दिनों में 71,090 करोड़ की तरलता बढ़ी है। बैंकों का कुल कर्ज सालाना आधार पर 17.9% बढ़ा है। जबकि जमा में केवल 9.5 फीसदी की बढ़त आई है। वैसे इस साल जनवरी से देखें तो जमा की तुलना में बैंकों का कर्ज ज्यादा बढ़ा है।

बैंक खुदरा कर्ज बढ़त
एसबीआई 10.74 18.84%
केनरा बैंक 1.34 12.52%
बैंक ऑफ बड़ौदा 1.58 28.40%
पीएनबी 1.55 16.95%
एचडीएफसी 5.80 20.20%
आईसीआईसीआई 4.78 25.00%
(आंकड़े लाख करोड़ रु. में, वृद्धि पिछले साल की तुलना में)

13 लाख करोड़ बढ़ा जमा
जनवरी में बैंकों का कुल जमा 159.82 लाख करोड़ रुपये था जबकि कर्ज 112.76 लाख करोड़ था। अप्रैल में जमा बढ़कर 167.42 लाख करोड़ और कर्ज 119.88 लाख करोड़ हो गया। जून तक कुल लिक्विडिटी जमा में गिरावट आई और यह 165.69 लाख करोड़ रुपये रहा। कर्ज में लगातार बढ़ोतरी जारी रही और यह 121.49 लाख करोड़ रुपये रहा। जुलाई के बाद जमा और कर्ज दोनों में जमकर तेजी आई। सितंबर में जमा जहां 170.56 लाख करोड़ हो गया वहीं कर्ज बढ़कर 125.51 लाख करोड़ रुपये हो गया।

जोखिम से बचने को उपाय नहीं कर रहे बैंक : एसबीआई
आरबीआई द्वारा रेपो रेट में वृद्धि के कारण कम होती तरलता के बीच एसबीआई ने एक रिपोर्ट में कहा कि बैंक संपत्ति और देनदारी में जोखिम का सही निर्धारण नहीं कर रहे हैं। ये ऐसे समय पर किया जा रहा है जब उधारी की मांग एक दशक के उच्च स्तर 18% पर पहुंच गई है। जमा की वृद्धि दर काफी पीछे है। तरलता कम होने का प्रमुख कारण आरबीआई की ओर से ब्याज दर बढ़ाना है। महंगाई को कम करने के लिए आरबीआई ने मई से अब तक ब्याज दरों में 1.90 फीसदी की वृद्धि की है।


सरकार ने दिवाली में नकदी का बड़ा हिस्सा खर्च किया
रिपोर्ट में कहा गया है कि ब्याज दर बढ़ने से पहले बैंकिंग प्रणाली में अप्रैल, 2022 में एवरेज नेट ड्यूरेबल लिक्विडिटी 8.3 लाख करोड़ रुपये था, जो अब घटकर 3 लाख करोड़ रुपये के करीब रह गया है। सरकार ने दिवाली के हफ्ते में कैश बैलेंस का एक बड़ा हिस्सा खर्च कर दिया है, जिससे कुछ सुधार हुआ है।

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