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सकल आय गठन

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GDP क्या होती है GDP कैलकुलेट कैसे किया जाता है ?

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भारत में जीडीपी की गणना हर तीसरे महीने यानी तिमाही के आधार पर होती है, तथा भारत के जीडीपी में योगदान देने वाले तीन मुख्य क्षेत्रक हैं:

  1. कृषिक्षेत्रक: इसके अंदर वे प्रक्रियाएं शामिल होती हैं, जिसमें किसान व कंपनियां किसी उत्पाद के निर्माण हेतु कच्चे माल का उत्पादन करतीं हैं। यह कुछ दशकों पहले भारत की जीडीपी में योगदान देने वाला सबसे बड़ा क्षेत्रक था।
  2. उद्योगक्षेत्रक: इसके अंतर्गत वे प्रक्रियाएं शामिल होती हैं जिसके तहत प्राथमिकक्षेत्रक यानी कृषि, खनन आदि द्वारा उत्पादित कच्चे माल को संसोधित करके ग्राहकों के लिए उपयोग के योग्य वस्तुएं बनाई जाती हैं।
  3. सेवाक्षेत्रक: सेवा क्षेत्रक में वे सभी क्रियाकलाप आते हैं, जिसके तहत कृषि और उद्योगों द्वारा उत्पादित माल को ग्राहकों तक पहुंचाया जाता है, इनके अलावा इसमें परिवहन, बैंकिंग, सरकारी सुविधाएं आदि भी सम्मिलित सकल आय गठन होती हैं। वर्तमान में Service Sector भारत के जीडीपी में योगदान देने वाला सबसे बड़ा क्षेत्रक है।

इन क्षेत्रको में उत्पादन कम होने या अधिक होने के औसत के आधार पर ही जीडीपी दर तय की जाती है।

वर्तमान में जीडीपी के लिए आमतौर पर आठ औद्योगिक क्षेत्रों के आंकड़े जुटाए जाते हैं, जो हैं- कृषि, खनन, मैन्युफैक्चरिंग, बिजली, कंस्ट्रक्शन, व्यापार, रक्षा, वित्तिय और अन्य सेवाएं।

GDP Full Form / GDP Full Form in Hindi

जीडीपी का इतिहास : History of GDP

सबसे पहले सन् 1652 और 1674 के बीच डच और अंग्रेजों के बीच अनुचित कर वसूली (Taxation) से जमींदारों का बचाव करने के लिए विलियम पेटी ने जीडीपी का Basic Concept दिया था। बाद में, इस पद्धति को चार्ल्स डेवनेंट ने और अधिक विकसित किया।

इसका Modern Concept सबसे पहले 1934 में साइमन कुजनेट्स द्वारा विकसित किया गया था। सन् 1944 में ब्रेटन वुड्स में IMF के गठन और पहले सम्मेलन के बाद, यह किसी भी देश की अर्थव्यवस्था को मापने का मुख्य साधन बन गया।

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INDIA GDP 2020

वर्तमान समय में इंडिया जीडीपी ग्रोथ रेट पिछले छः साल के सबसे निचले स्तर पर है और देश मंदी का सामना कर रहा है। जीडीपी ग्रोथ रेट के अनुसार पिछले वित्तीय वर्ष के अंत तक जीडीपी रेट 5.8 % थी परन्तु अब भारत की जीडीपी 2020 में केवल 5% रह गयी है।

निचे आप सभी देशो की GDP देख सकते है

जीडीपी की गणना कैसे की जाती है : How GDP Is Calculated

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जीडीपी की गणना के लिए कई तरीके अपनाएं जाते हैं। यदि सकल आय गठन सकल आय गठन हम एक सरल Method के बारे में बात करें; तो यह कुल खपत, कुल निवेश और सरकारी खर्चों के अलावा निर्यात-आयात के मूल्य के बराबर होता है। सामान्यतः जीडीपी कैलकुलेट करने की समयावधि एक तिमाही या एक वर्ष होती है

Formulas :

जीडीपी की गणना करने के लिए विभिन्न तरीके निम्नलिखित हैं:

  • Production Approach : इसके तहत देश की सभी इंडस्ट्रीज द्वारा उत्पादन को देखा जाता है, क्योंकि उद्योगों द्वारा चीजों का उत्पादन जितना अधिक होगा वह देश दूसरों देशों में उनका निर्यात उतना ही अधिक कर पाएगा।
  • Income Approach : इसके अन्तर्गत एक देश के नागरिकों का प्रति-व्यक्ति दैनिक व वार्षिक आय, कम से कम वेतनमान कितना है? अमीर व गरीबों के बीच पैसों का वितरण कैसा है? आदि पहलुओं को देखा जाता है।
  • Expenditure Approach : इसके तहत सरकार द्वारा लोगों के लिए सार्वजनिक सुविधाओं पर खर्च शामिल होता है। सरकार द्वारा सार्वजनिक सुविधाओं पर अधिक धन का खर्च एक बेहतरीन जीडीपी को दर्शाता है।

चूंकि उत्पादन की कीमतें महंगाई के साथ-साथ घटती बढ़ती रहती हैं, इसलिए जीडीपी को दो तरीकों से प्रस्तुत किया जाता है।

इसका पहला पैमाना है “Constant Prise“, इसके अन्तर्गत उत्पादन मूल्य और जीडीपी दर एक निर्धारित आधार वर्ष के उत्पादन की कीमत से तय किया जाता है।

जबकि सकल आय गठन इसका दूसरा पैमाना है “Current Prise”, इसमें उत्पादन वर्ष की वर्तमान महंगाई दर को शामिल किया जाता है।

  • Constant Prise GDP: इसके अन्तर्गत भारत का Central Statistics Office (CSO), उत्‍पादन व सेवाओं के मूल्‍यांकन के लिए कोई एक आधार वर्ष (Base Year) निर्धारित करता है जैसे 2015, तथा इस वर्ष के दौरान कीमतों को आधार बनाकर किसी अन्य वर्ष में उत्‍पादन की कीमत और तुलनात्‍मक वृद्धि दर तय की जाती है और इसे ही कॉस्‍टैंट प्राइस जीडीपी कहा जाता है। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि जीडीपी की दर को महंगाई से अलग सकल आय गठन रखकर सही तरीके से मापा जा सके।
  • Current Prise GDP : इसके तहत, यदि जीडीपी के उत्‍पादन मूल्‍य में महंगाई की दर को जोड़ दिया जाए तो हमें आर्थिक उत्‍पादन की मौजूदा कीमत हासिल होती है, यानी कि आपको कॉस्‍टैंट प्राइस जीडीपी में तात्‍कालिक महंगाई दर को Add‌ करना होता है।

दोस्तों चलिए अब हम इनको एक उदाहरण द्वारा समझ लेते हैं। उदाहरण के तौर पर यदि 2015 में देश में 100 रुपए की 6 वस्तुएं बनी तब कुल जीडीपी 600 रुपए होगी, और 2019 तक आते-आते वस्तुओं सकल आय गठन का उत्पादन 4 रह जाता है

लेकिन उसकी कीमत 150 रुपए हो जाती है, तब भी जीडीपी 600 रुपए ही रहती है, लेकिन यहां हुआ क्या? क्या देश पहले की तुलना में बेहतर हुआ?

इसी का पता लगाने के लिए Base Year का Concept काम में आता है। 2015 की Constant Prise 100 रुपए के आधार पर 2019 की सकल आय गठन वास्तविक जीडीपी 400 रुपए होगी, इसके बाद अब हम यह साफ-साफ कह सकते हैं कि पहले की तुलना में जीडीपी में गिरावट हुई है।

How GDP Is Calculated

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