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ऋण और निवेश

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नवभारत टाइम्स 1 दिन पहले

सीतारमण ने एनआईआईएफ से एनआईपी, पीएम गतिशक्ति में निवेश के अवसर तलाशने को कहा

नयी दिल्ली, 17 नवंबर (भाषा) वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राष्ट्रीय निवेश एवं अवसंरचना ऋण और निवेश कोष (एनआईआईएफ) से राष्ट्रीय बुनियादी ढांचा पाइपलाइन (एनआईपी), पीएम गतिशक्ति और राष्ट्रीय अवसंरचना गलियारे में निवेश के अवसरों का पता लगाने को कहा है।

वित्त मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को बयान में कहा कि एनआईआईएफ को इन निवेश अवसरों में वाणिज्यिक पूंजी को लाने की कोशिश करनी चाहिए।

बयान के मुताबिक, सीतारमण ने प्रशासनिक परिषद (जीसी) की 5वीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि एनआईआईएफ की बहुलांश हिस्सेदारी वाली दो बुनियादी ढांचा गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) ने अपनी कुल ऋण बही को तीन वर्षों में 4,200 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 26,000 करोड़ रुपये कर लिया है। उन्होंने यह भी कहा कि इनमें कोई भी गैर-निष्पादित ऋण (एनपीएल) नहीं है।

बैठक में आर्थिक मामलों के सचिव अजय सेठ, वित्तीय सेवा सचिव विवेक जोशी, भारतीय स्टेट बैंक के चेयरमैन दिनेश खारा, डीएसपी समूह के चेयरमैन हेमेंद्र कोठारी और मणिपाल ग्लोबल के चेयरमैन टी वी मोहनदास पई शामिल थे।

अखिल भारतीय ऋण-निवेश सर्वे 2019 की रिपोर्ट में खुलासा: बचत खातों में राजस्थान और छत्तीसगढ़ के ग्रामीण आगे; यूपी गुजरात से बेहतर, गुजरात के 26% ग्रामीणों के खाते ही नहीं

व्यापार, किसान क्रेडिट कार्ड, सब्सिडी या सरकारी योजना से लेकर छोटे किसानों को दी जाने वाली सालाना 6 हजार रुपए के लिए भी बैंक में बचत खाते की जरूरत होती है। लेकिन देश में 15% लोगों के खाते ही नहीं हैं। खास बात यह है कि बचत खाते खुलवाने में राजस्थान और छत्तीसगढ़ के ग्रामीण आगे हैं। गुजरात सबसे पीछे है। यहां ग्रामीण क्षेत्र के 26% लोगों के पास बैंक खाते ही ऋण और निवेश नहीं हैं।

जबकि उत्तर प्रदेश की स्थिति गुजरात से बेहतर हैं। यहां 86.7% ग्रामीणों का बचत खाता है। हाल ही जारी हुई केंद्रीय सांख्यिकी मंत्रालय की अखिल भारतीय ऋण एवं निवेश सर्वे 2019 में यह जानकारी सामने आई है। इस रिपोर्ट में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लोगों के बचत खातों और उनके बीच प्रतिशत की तुलना है। इसके अनुसार, गुजरात में जहां शहरी आबादी में 83.5% लोगों के बचत खाते हैं। वहीं ग्रामीण आबादी के केवल 73.8% लोगों के ही बैंक में खाते खुले हैं।

गांवों में रहने वाली पिछड़ी जातियां बेहतर
रिपोर्ट में एससी, एसटी, ओबीसी और सामान्य लोगों की तुलना भी है। गांवों में रहने वाले एससी कैटेगरी के लोग शहरों से बेहतर हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के बचत खाते 84.9% और शहरी क्षेत्र में 83.6% हैं। यही हाल ओबीसी का है। इस समाज के ग्रामीण क्षेत्र में 85% लोगों के खाते हैं।

सीतारमण ने एनआईआईएफ से एनआईपी, पीएम गतिशक्ति में निवेश के अवसर तलाशने को कहा

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नवभारत टाइम्स 1 दिन पहले

नयी दिल्ली, 17 नवंबर (भाषा) वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राष्ट्रीय निवेश एवं अवसंरचना कोष (एनआईआईएफ) से राष्ट्रीय बुनियादी ढांचा पाइपलाइन (एनआईपी), पीएम गतिशक्ति और राष्ट्रीय अवसंरचना गलियारे में निवेश के अवसरों का पता लगाने को कहा है।

वित्त मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को बयान में कहा कि ऋण और निवेश एनआईआईएफ को इन निवेश अवसरों में वाणिज्यिक पूंजी को लाने की कोशिश करनी चाहिए।

बयान के मुताबिक, सीतारमण ने प्रशासनिक परिषद (जीसी) की 5वीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि एनआईआईएफ की बहुलांश हिस्सेदारी वाली दो बुनियादी ढांचा गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) ने अपनी कुल ऋण बही को तीन वर्षों में 4,200 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 26,000 करोड़ रुपये कर लिया है। उन्होंने यह भी कहा कि इनमें कोई भी गैर-निष्पादित ऋण (एनपीएल) नहीं है।

बैठक में आर्थिक मामलों के सचिव अजय सेठ, वित्तीय सेवा सचिव विवेक जोशी, भारतीय स्टेट बैंक के चेयरमैन दिनेश खारा, डीएसपी समूह के चेयरमैन हेमेंद्र कोठारी और मणिपाल ग्लोबल के चेयरमैन टी वी मोहनदास पई शामिल थे।

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सीतारमण ने एनआईआईएफ से एनआईपी, पीएम गतिशक्ति में निवेश के अवसर तलाशने को कहा

वित्त मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को बयान में कहा कि एनआईआईएफ को इन निवेश अवसरों में वाणिज्यिक पूंजी को लाने की कोशिश करनी चाहिए।

Image: @nsitharamanoffc (Twitter)

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राष्ट्रीय निवेश एवं अवसंरचना कोष (एनआईआईएफ) से राष्ट्रीय बुनियादी ढांचा पाइपलाइन (एनआईपी), पीएम गतिशक्ति और राष्ट्रीय अवसंरचना गलियारे में निवेश के अवसरों का पता लगाने को कहा है।

वित्त मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को बयान में कहा कि एनआईआईएफ को इन निवेश अवसरों में वाणिज्यिक पूंजी को लाने की कोशिश करनी चाहिए।

बयान के मुताबिक, सीतारमण ने प्रशासनिक परिषद (जीसी) की 5वीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि एनआईआईएफ की बहुलांश हिस्सेदारी वाली दो बुनियादी ढांचा गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) ने अपनी कुल ऋण बही को तीन वर्षों में 4,200 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 26,000 करोड़ रुपये कर लिया है। उन्होंने यह भी कहा कि इनमें कोई भी गैर-निष्पादित ऋण (एनपीएल) नहीं है।

बैठक में आर्थिक मामलों के सचिव अजय सेठ, वित्तीय सेवा सचिव विवेक जोशी, भारतीय स्टेट बैंक के चेयरमैन दिनेश खारा, डीएसपी समूह के चेयरमैन ऋण और निवेश हेमेंद्र कोठारी और मणिपाल ग्लोबल के चेयरमैन टी वी मोहनदास पई शामिल थे।

एनआईपी, पीएम गतिशक्ति में निवेश के अवसर तलाश करे NIIF : सीतारमण

नई दिल्ली। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Finance Minister ऋण और निवेश Nirmala Sitharaman) ने राष्ट्रीय निवेश एवं अवसंरचना कोष (एनआईआईएफ) (National Investment and Infrastructure Fund – NIIF) से राष्ट्रीय बुनियादी ढांचा पाइपलाइन (एनआईपी), पीएम गतिशक्ति और राष्ट्रीय अवसंरचना गलियारे में निवेश के अवसरों का पता लगाने को कहा है।

यह भी पढ़ें | एनपीए कम करने के प्रयासों से सरकारी बैंकों का मुनाफा बढ़ा : सीतारमण

निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को एनआईआईएफ की प्रशासनिक परिषद (जीसी) की 5वीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए टीम को उन देशों के निवेशकों के साथ चर्चा जारी रखने के लिए प्रोत्साहित किया जो भारत में निवेश करने के इच्छुक हैं। वित्त मंत्रालय के मुताबिक वित्त मंत्री ने कहा कि एनआईआईएफ को इन निवेश अवसरों में वाणिज्यिक पूंजी को लाने की कोशिश करनी चाहिए।

सीतारमण ने जीसी की 5वीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि एनआईआईएफ की बहुलांश हिस्सेदारी वाली दो बुनियादी ढांचा गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) ने अपनी कुल ऋण बही को तीन वर्षों में 4,200 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 26,000 करोड़ रुपये कर लिया है। उन्होंने यह भी कहा कि इनमें कोई भी गैर-निष्पादित ऋण (एनपीएल) नहीं है। बैठक में आर्थिक मामलों के सचिव अजय सेठ, वित्तीय सेवा सचिव विवेक जोशी, भारतीय स्टेट बैंक के चेयरमैन दिनेश खारा, डीएसपी समूह के चेयरमैन हेमेंद्र कोठारी और मणिपाल ग्लोबल के चेयरमैन टी वी मोहनदास पई आदि शामिल थे। (एजेंसी, हि.स.)

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