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मुक्त व्यापार क्षेत्र

मुक्त व्यापार क्षेत्र

जानिए साप्टा और साफ्टा के बारे में

दक्षिण एशियाई वरीयता व्यापार समझौता – South Asian Preference Trade Agreement (साप्टा) को 1995 में लागू किया गया। इस समझौते का लक्ष्य दक्षिण एशिया में व्यापार संबंधी मुक्त व्यापार क्षेत्र बाधाओं (Trade barriers in South Asia) को दूर करना है और सार्क देशों के बीच अधिक उदार व्यापार व्यवस्था कायम किए जाने का प्रावधान है। इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए मुक्त व्यापार क्षेत्र दक्षिण एशिया मुक्त व्यापार क्षेत्र संधि साफ्टा को 2004 में लागू किया गया। इसके लिए दक्षिण एशिया क्षेत्र के देशों ने अपनी व्यापारी सीमाओं को खोलकर इतिहास रचा।

जानिए साफ्टा के बारे में

दक्षिण एशियाई मुक्त व्यापार क्षेत्र (SAFTA) दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (SAARC) की मुक्त व्यापार व्यवस्था है। यह समझौता 2006 में लागू हुआ, जिसमें 1993 SAARC अधिमान्य व्यापार व्यवस्था मुक्त व्यापार क्षेत्र मुक्त व्यापार क्षेत्र सफल रही। SAFTA हस्ताक्षरकर्ता देश अफगानिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, भारत, मालदीव, नेपाल, पाकिस्तान और श्रीलंका हैं।

साफ्टा का उद्देश्य

दक्षिण एशिया स्वतंत्र व्यापार समझौते (साफ्टा) का उद्देश्य भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल, भूटान एवं मालदीव के बीच वस्तुओं की मुफ्त आवाजाही में आने वाली बाधाओं को दूर करना और दक्षिण एशियाई देशों की अर्थव्यवस्था को एकीकृत करना है। इस समझौते को लागू करने की समय सीमा 1 जुलाई 2006 तय की गई।

वर्ष 2004 तक सार्क सदस्य देशों के बीच व्यापार 5.2 अरब डॉलर के बराबर था। साफ्टा के तहत तय हुआ कि भारत, पाकिस्तान, और श्रीलंका वर्ष 2012 तक अपने यहां आयात शुल्क शून्य से 5 प्रतिशत तक रखेंगे तथा अन्य चार सदस्य देशों के लिए यह आयात शुल्क सीमा 2016 तक तय की गई।

इस समझौते के तहत तय हुआ कि सार्क का प्रत्येक सदस्य देश अपने यहां संवेदनशील उत्पादों की एक सूची बनाएगा, जिन पर कोई शुल्क कटौती नहीं की जाएगी, भारत ने ऐसी 884 वस्तुओं की संवेदनशीलन सूची बनाई, जिन पर व्यापार कर कम नहीं किया जाएगा, दक्षेस देशों को मुक्त व्यापार क्षेत्र परस्पर प्रशुल्क छूटों की शुरुआत 226 वस्तुओं पर 10 से 100 प्रतिशत के प्रशुल्क छूट के साथ हुई।

Difference between sapta and मुक्त व्यापार क्षेत्र safta | साप्टा और साफ्टा के बीच अंतर

SAPTA ने टैरिफ रियायतों के आदान-प्रदान के माध्यम से सार्क क्षेत्र के भीतर आपसी व्यापार और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देने और बनाए रखने के लिए सदस्य राज्यों की इच्छा को प्रतिबिंबित किया।

दिसंबर मुक्त व्यापार क्षेत्र 1991 में कोलंबो में आयोजित साउथ एशियन एसोसिएशन फॉर रीजनल को-ऑपरेशन (सार्क) के छठे शिखर सम्मेलन में सार्क देशों के बीच व्यापार के उदारीकरण का विचार पहली बार श्रीलंका ने दिया था।

Free Trade Agreement: ऑस्ट्रेलियाई संसद ने भारत के साथ मुक्त व्यापार समझौते को मंजूरी दी

भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच रिश्तों को और मजबूत करने के लिए मंगलवार को बड़ा कदम उठाया मुक्त व्यापार क्षेत्र गया। इसके मद्देनजर ऑस्ट्रेलिया की संसद में भारत-ऑस्ट्रेलिया मुक्त व्यापार समझौता पारित कर दिया गया. भारत-ऑस्ट्रेलिया FTA से किसको फायदा? जानिए पूरी डिटेल्स नूपुर से.

मुंबई में मुक्त व्यापार क्षेत्र परियोजना का निर्माण-कार्य शुरू किया डीपी वर्ल्ड ने

यह एक संयुक्त परियोजना हिंदुस्तान इन्फ्रालाग का हिस्सा है। इसमें डीपी वर्ल्ड 65 प्रतिशत और राष्ट्रीय निवेश एवं अवसंरचना कोष (एनआईआईएफ) की 35 प्रतिशत हिस्सेदारी है। कंपनी का कहना है कि इसके बन जाने से इलेक्ट्रानिक्स, सूचना प्रौद्योगिकी , दूरसंचार , औषधि, रसायन, पेट्रोरसायन और कृषि कारोबार को बढावा मिलेगा।

यह संयुक्त उद्यम देश में विभिन्न जगहों पर बंदरगाह, लॉजिस्टिक्स सुविधाओं और इससे जुड़े क्षेत्रों में तीन अरब डालर का निवेश करेगा।

भारत-यूएई मुक्त व्यापार समझौते से परिधान क्षेत्र का निर्यात बढ़ेगा: एईपीसी

नई दिल्ली, 29 नवंबर (भाषा) भारत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के बीच मुक्त व्यापार समझौता परिधान क्षेत्र को शुल्क मुक्त पहुंच प्रदान कर रहा है और इससे उस देश में घरेलू निर्यात की हिस्सेदारी बढ़ाने में मदद मिलेगी। एईपीसी ने मंगलवार मुक्त व्यापार क्षेत्र को यह जानकारी दी।

परिधान निर्यात संवर्धन परिषद (एईपीसी) ने कहा कि 20 से अधिक घरेलू निर्यातक अपने उत्पादों का प्रदर्शन करने के लिए दुबई में अंतरराष्ट्रीय परिधान और वस्त्र मेले (आईएटीएफ) में भाग ले रहे हैं।

एईपीसी के मेला और प्रदर्शनी चेयरमैन अशोक रजनी ने कहा कि भारत, चीन के बाद संयुक्त अरब अमीरात को तैयार कपड़ों का दूसरा सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है।

उन्होंने कहा, ‘‘यूएई परंपरागत रूप से भारतीय परिधान निर्यात के लिए सबसे शीर्ष व्यापारिक भागीदार रहा है। भारतीय परिधान निर्यात के लिए शुल्क मुक्त पहुंच प्रदान करने वाले यूएई-भारत सीईपीए समझौते पर हस्ताक्षर करने के साथ यह हिस्सा और बढ़ने की उम्मीद है।’’

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