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Stock Market में ट्रेडिंग कितने प्रकार से होती है?

Stock Market में ट्रेडिंग कितने प्रकार से होती है?

Buying US Stocks: क्या आप खरीदना चाहते हैं अमेरिकी शेयर, यहां जानें यूएस स्टॉक मार्केट में कैसे शुरू करें ट्रेडिंग

US Stocks Market Trading: विदेशी स्टॉक उतना मुश्किल नहीं है जितना लगता है. निवेश की प्रक्रिया एक इंटरनेशल ब्रोकरेज फर्म के माध्यम से एक विदेशी ट्रेडिंग अकाउंट खोलने के साथ शुरू होती है.

By: एबीपी न्यूज़ | Updated at : 27 Sep 2021 10:17 PM (IST)

US Stocks Market: विदेशों में निवेश करने की चाहत रखने वाले भारतीय निवेशकों की खासी चर्चा हो रही है. मौजूदा विदेशी फंडों के अलावा, हाल ही में कई इंटरनेशनल म्यूचुअल फंड स्कीम्स शुरू की गई हैं, इस प्रकार उनके घरेलू पोर्टफोलियो में विविधता लाने का विकल्प दिया गया है.

इनमें से कुछ अंतरराष्ट्रीय फंड, ‘फंड ऑफ फंड्स’ हैं जबकि कुछ फीडर फंड हो सकते हैं, विशेष रूप से कई निष्क्रिय इंडेक्स फंड हैं जो अधिकांश प्रमुख वैश्विक सूचकांकों पर नज़र रखते हैं.

विदेशी स्टॉक खरीदना जटिल मामला नहीं
वैकल्पिक रूप से, विदेशी स्टॉक खरीदना कोई जटिल मामला नहीं है जैसा कि यह लगता है. सेल्सफोर्स, वीज़ा, अमेरिकन एक्सप्रेस कंपनी, कॉस्टको होलसेल कॉर्प, एक्सपीडिया ग्रुप, ज़िवो बायोसाइंस, पल्टॉक जैसे हालिया टॉप मूवर्स सहित फेसबुक, ऐप्पल या अमेज़ॅन जैसे कुछ टॉप अमेरिकी शेयर्स का मालिक होना, भारतीय निवेशकों के लिए संभव है. यह ठीक वैसे ही जैसे आप भारतीय शेयर बाजार में जौमेटो, रिलायंस, टाटा मोटर्स आदि के शेयर्स के मालिक बन सकते हैं.

यूएस शेयरों में निवेश की प्रक्रिया एक इंटरनेशल ब्रोकरेज फर्म के माध्यम से एक विदेशी ट्रेडिंग अकाउंट खोलने के साथ शुरू होती है. केवाईसी और आरबीआई के एलआरएस नियमों सहित अन्य औपचारिकताओं को पूरा करने पर, जिसे पूरा करने में ब्रोकरेज फर्म मदद करती है, आप यूएस शेयरों में ट्रेडिंग शुरू कर सकते हैं.

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कीमत नहीं है बाधा
अब, अगर आप सोच रहे हैं कि क्या डॉलर में अमेरिकी शेयर्स को खरीदना एक किफायती सौदा होगा, तो यहां आपके लिए एक अच्छी खबर है. अमेरिकी शेयर्स में आंशिक स्वामित्व की अनुमति है और कोई भी अमेरिकी शेयरों को 100 रुपये से कम राशि के साथ जमा करना शुरू कर सकता है. भारतीय स्टॉक एक्सचेंजों के विपरीत, कीमत अमेरिकी शेयर बाजार में बाधा नहीं है. बस तय करें कि आपको कितना निवेश करना है और शेयरों की संख्या की गणना स्वचालित रूप से आपके लिए की जाएगी.

बेहतर तरीका यह हो सकता है कि कुछ टॉप अमेरिकी शेयरों को नियमित अंतराल पर 5000 रुपये या 1 लाख रुपये की निश्चित राशि के साथ खरीदा जाए. अमेरिकी शेयर बाजार निवेशकों के लिए कुछ प्रमुख ग्लोबल ब्लू-चिप्स के मालिक होने और लंबी अवधि में लाभ प्राप्त करने के अवसर प्रस्तुत करता है.

फिलहाल ग्लोबल इक्विटी लगभग सर्वकालिक उच्च स्तर पर कारोबार कर रहे हैं. लेकिन, इससे निवेशकों को सभी क्षेत्रों में लंबी अवधि के अवसरों की तलाश करने से नहीं रुकना चाहिए. शुरुआत करने के लिए, प्रमुख शेयरों पर नज़र रखें और किसी भी सुधार या गिरावट का उपयोग लंबी अवधि के लिए उन्हें जमा करने के अवसर के रूप में करें.

डिस्क्लेमर: (यहां मुहैया जानकारी सिर्फ़ सूचना हेतु दी जा रही है. यहां बताना ज़रूरी है की मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है. निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें. ABPLive.com की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है.)

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ट्रेडिंग अकाउंट क्या होता है ? ट्रेडिंग अकाउंट कैसे खोला जाता है?

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trading account

ट्रेडिंग का मतलब होता है किसी भी वास्तु या सेवा को कम दाम में खरीदना और फिर उस वस्तु या सेवा का दाम बढ़ जाने पर उसे बेच देना। ट्रेडिंग का मुख्य मकसद किसी भी वास्तु या सेवा को खरीद कर कम समय में लाभ कमाना होता है। यही कारण है कि ट्रेडिंग शेयर मार्किट में सबसे ज्यादा की जाती है। और लोग हर रोज शेयर पर ट्रेडिंग करके हजारों और लाखों रूपये कमा लेते है।

तो अगर आप शेयर पर ट्रेडिंग करके पैसे कमाना चाहते है। तो सबसे पहले आपको शेयर मार्किट ट्रेडिंग को समझना होगा। चलिए जानते है शेयर मार्किट ट्रेडिंग क्या है ?

Share Market Trading Kya Hai?

शेयर मार्किट ट्रेडिंग, शेयर पर होने वाली ट्रेडिंग को कहते है। जब सुबह 9:15 AM पर शेयर मार्किट खुलती है। तब ट्रेडर कम दाम में शेयर को खरीद लेते है। और दोपहर के 3:30 PM के पहले शेयर को बेच देते है। क्योंकि शेयर मार्किट सुबह 9:15 AM पर खुलती है और 3:30 PM पर बंद हो जाती है। इस बीच ट्रेडर अपने ख़रीदे हुए शेयर पर अनुमानित मुनाफे को देख कर शेयर को बेच कर मुनाफा कमा लेते है। लेकिन शेयर मार्किट में ट्रेडिंग अलग-अलग प्रकार कि होती है। और ट्रेडर अपनी सुविधा और जोखिम के अनुसार ट्रेडिंग करते है।

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ट्रेडिंग कितने प्रकार कि होती है ?

शेयर मार्किट में मुख्य रूप से 3 प्रकार कि ट्रेडिंग होती है। और ट्रेडर मुनाफा कमाने के लिए अपनी सुविधा अनुसार ट्रेडिंग करते है।

Types of Share Trading?

Intraday Trading Kya Hai ?

शेयर मार्किट के खुलने से लेकर उसके बंद होने के पहले शेयर को खरीद कर बेचने को Intraday Trading कहते है।

इसमें ट्रेडर 9:15 AM से 3:30 PM के बीच शेयर को खरीदता और बेचता है।

Scalping Trading Kya Hai ?

सकैलपिंग ट्रेडिंग भी शेयर मार्किट के खुलने से उसके बंद होने के बीच में की जाती है। लेकिन Scalping Trading में पुरे दिन ट्रेडिंग नहीं की जाती।

यह ट्रेडिंग ज्यादा से ज्यादा पैसों के साथ कुछ ही मिनट या घंटे के लिए कि जाती है। जैसे 9:15 AM पर शेयर को खरीद कर 10:05 AM पर ही शेयर बेच कर मुनाफा कमा लेना।

Swing Trading Kya Hai ?

Swing Trading बाकि दोनों सकैलपिंग ट्रेडिंग और इंट्राडे ट्रेडिंग से अलग है। यह कुछ दिन और हफ़्तों के लिए की जाती है। लेकिन इसमें भी शेयर को खरीदना और बेचना शेयर मार्किट के खुलने Stock Market में ट्रेडिंग कितने प्रकार से होती है? और बंद होने के बीच ही किया जाता है। स्विंग ट्रेडर पहले शेयर मार्किट में कम दाम पर शेयर खरीद लेते है। और फिर उन्हें hold करके रख लेते है। उसके बाद जब कुछ दिन या हफ्ते में उनके शेयर की price ज्यादा हो जाती है, तो उन्हें बेच कर मुनाफा कमा लेते है।

trading account क्या है ? → what is trading account?

Trading Account एक ऐसा खाता है, जिसमे निवेशक या ट्रेडर के पैसा जमा होते है। यह Trading Account , निवेशक या ट्रेडर के डीमैट अकाउंट से लिंक कर दिया जाता है। जिसकी वजह से शेयर खरीदने के बाद शेयर Demat अकाउंट में जमा हो जाते है। और शेयर बेचने पर Demat Account में से शेयर निकल जाते है।

ट्रेडिंग और डीमैट अकाउंट के बिच का फर्क (Difference Between Demat and Trading Account):

  • ज्यादातर लोग Trading और Demat Account एक साथ खुलवाने की वजह से इन दोनों के बिच का फर्क नहीं जानते। लेकिन इन दोनों के बिच बहुत बड़ा फर्क होता है।
  • Demat Account एक ऐसी जगह है जिसमे आपके द्वारा ख़रीदे गए शेयर को रखा जाता है। इसलिए यह एक स्टोरेज की तरह होता है। जिसमे कोई शेयर खरीदने पर शेयर जमा होता है। और बेचने पर शेयर निकल जाता है। जबकि Trading Account का उपयोग है, शेयर ख़रीदने और बेचने के लिए ऑर्डर रखने की सुविधा देना।
  • ट्रेडिंग अकाउंट में पैसा जमा रखा जा सकता है। जबकि डीमैट अकाउंट में पैसा जमा नहीं होता।

trading account के लाभ (Benefits of a Trading Account) :

  • बदलती टेक्नोलॉजी के कारण Online Trading की सुविधा से शेयर की खरीद बिक्री बहुत ही आसान हो गई है।
  • शेयर खरीदने पर पैसा कटना और बेचने पर पैसा जमा होना यह सभी ऑटोमैटिक हो जाता है।
  • ऑनलाइन ट्रेडिंग की सुविधा की वजह से लिखित या कॉल कर के ऑर्डर देने की जरुरत नहीं रहती। और भेजा गया ऑर्डर बहुत जल्दी कम्पलीट हो जाता है।
  • सिर्फ एक मोबाइल के द्वारा किसी भी जगह से शेयर खरीद और बेच सकते है।

तो दोस्तों यह था trading account क्या है? कैसे बनाए trading account? उम्मीद करता हु आपको trading account के बारे में पूरी जानकारी समझ आ गया होगा,

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ऑप्शन ट्रेडिंग क्या है? Option trading kya hai

नमस्कार स्वागत है, आपका “स्टॉक पत्रिका” परिवार में, आज के इस लेख में हम सीखने वाले हैं कि ऑप्शन ट्रेडिंग क्या है? (Option trading kya hai) डियर पाठक, जब कोई नया-नया ट्रेडर स्टॉक मार्केट में आता है तो वह कंपनियों के शेयर खरीदता है, जैसे- रिलायंस, टाटा मोटर्स, इंफोसिस, अडा़नी पावर, और कई कंपनियां है जिनके नए लोग शेयर खरीदते हैं।

लेकिन जब वह फाइनेंशली कंफर्टेबल हो जाते हैं, और साथ ही मार्केट को बहुत ही बारीकी से समझ जाते हैं, तब वह इस ऑप्शन ट्रेडिंग को करते हैं, अब आगे हम आपको बताने वाले हैं, कि आखिर ऑप्शन ट्रेडिंग क्या होती है? और नए लोगों को ऑप्शन ट्रेडिंग क्यों नहीं करनी चाहिए? ऑप्शन ट्रेडिंग किस प्रकार से होती है? इन सारे सवालों के जवाब आपको मिलने वाले है-

ऑप्शन ट्रेडिंग क्या है? What is Option Trading?

डियर पाठक, अगर आपको हम ऑप्शन ट्रेडिंग सरल भाषा में बताए तो ऑप्शन ट्रेडिंग इंडेक्स के अंदर ट्रेड होती है जैसे कि निफ़्टी इसके अंदर आपको मार्केट के सेंटीमेंट को गहराई से रिसर्च करके यह पता लगाना होता है की मार्केट आने वाले सप्ताह यह महीने के अंदर कहां तक जाने वाला है कहने का मतलब कितना बढ़ने वाला है या कितना घटने वाला है।

ऑप्शन ट्रेडिंग के ऑप्शन की एक ऐज होती है, जिसमें वह शून्य हो जाता है और जब यह जीरो होता है तो उसको हम एक्सपायरी कहते हैं।

एक्सपायरी डेट किस कहते हैं? एक्सपायरी डेट पर ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट बिल्कुल शून्य हो जाता है कहने का मतलब समाप्त हो जाता है उसे हम एक्सपायरी डेट कहते हैं।

एक्सपायरी डेट दो प्रकार की होती है

  1. वीकली एक्सपायरी (Weekly Expiry)
  2. मंथली एक्सपायरी (Monthly Expiry)

ऑप्शन ट्रेडिंग के कितने प्रकार होते हैं? types of options trading?

ऑप्शन ट्रेडिंग में आप किसी भी सिक्योरिटी, इंडेक्स या स्टॉक में ट्रेड कर सकते है। यहाँ पर आप स्टॉक को लेकर बुलिश है या बेयरिश उसके आधार पर आप ऑप्शन में ट्रेड कर सिक्योरिटी को स्ट्राइक प्राइस पर खरीदने या बेचने का अधिकार रखते है।

अब यहाँ पर यह आपके ऊपर निर्भर करता है की ऑप्शन को किस मानसिकता या ट्रेंड के आधार पर ट्रेड कर रहे है उसके अनुसार दो प्रकाश के ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट होते है जिसके आधार पर ऑप्शन में ट्रेडिंग कर सकते हैं।

कॉल ऑप्शन (CE)

अगर कॉल ऑप्शन को हम आपको सरल शब्दों में समझाने का प्रयास करें तो, अगर आपका मार्केट व्यु या आपको लगता है किसी स्टॉक या इंडेक्स की प्राइस ऊपर जाने को है तब आप उसका कॉल ऑप्शन खरीदते हैं, जिसमें की आप कम कैपिटल के साथ अच्छा प्रॉफिट कमा सकते है।

पुट ऑप्शन (PE)

अगर पुट ऑप्शन को हम आपको सरल शब्दों में समझाने का प्रयास करें तो, अगर आपको लगता है किसी स्टॉक या इंडेक्स की प्राइस नीचे जाने वाली है तब आप उसका पुट ऑप्शन खरीदते हैं, जिसमें की आप कम कैपिटल के साथ अच्छा प्रॉफिट कमा सकते है।

कॉल और पुट दोनों को एक साथ समझाने का प्रयास करे तो अगर आप मार्केट में किसी भी शेर इंडेक्स जैसे की निफ़्टी आज की तारीख में शेयर की कीमत 17000 रुपए हैं लेकिन आप इसे ऑप्शन ट्रेडिंग में ₹5 से लेकर ₹1000 तक खरीद सकते हैं इसलिए कम पैसों में ऑप्शन ट्रेडिंग में ज्यादा शेयर खरीदे जा सकते हैं।

NOTE – ऑप्शन ट्रेडिंग बहुत ही तेज होती है यहां पर आपको काफी फुर्ती रखनी होती है क्योंकि ऑप्शन पलक झपकते ही जीरो से हीरो बना देता है और पलक झपकते ही हीरो से जीरो बना देता है

अगर आपको इसका हम एक लाइन में उत्तर दें तो यह बिगनर लोगों के लिए नहीं है स्टॉक पत्रिका का सुझाव है कि नए लोग ऑप्शन ट्रेडिंग नहीं करें हां जब आप सीख गए तब अवश्य ऑप्शन ट्रेडिंग से मोटा पैसा कमाए यह हमारी शुभकामनाएं हैं आपको

ऑप्शन ट्रेडिंग कैसे करते हैं? How to do Option Trading in hindi?

आप्शन ट्रेडिंग आप एक ऑनलाइन डीमैट अकाउंट (ब्रोकरेज खाते) के माध्यम से कर सकते हैं जो स्व – निर्देशित ट्रेडिंग करने की अनुमति देता है।

ऑप्शन ट्रेडिंग करने के लिए सबसे पहले आपको एक डीमैट अकाउंट खोलना होगा। डीमेट अकाउंट खोलने के पश्चात आप स्टॉकब्रोकर द्वारा प्रोवाइड किए गए ट्रेडिंग एप का इस्तेमाल कर आसानी से ऑप्शन में ट्रेड कर सकते है।

ऑप्शन ट्रेडिंग करने से पहले आपको कुछ बातें जरूर जानी चाहिए जिससे कि आपको ऑप्शन ट्रेडिंग करने में आसानी हो।

  1. सिंबल – स्टॉक सिंबल का मतलब है कि एक ऑप्शन कॉन्ट्रेक्ट से जुड़ी किसी स्टॉक या इंडेक्स की पहचान करने के लिए उपयोग किया जाता है। जैसे – Nifty 17500 CE, Bank Nifty 38000 CE
  2. स्ट्राइक प्राइस – स्ट्राइक प्राइस जिस पर आप ऑप्शन का प्रयोग करने में सक्षम होते हैं,
  3. प्रीमियम – ऑप्शन को खरीदने की लागत को प्रीमियम कहते है।
  4. एक्सपायरी डेट – एक्सपायरी डेट पर ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट बिल्कुल शून्य हो जाता है कहने का मतलब समाप्त हो जाता है उसे हम एक्सपायरी डेट कहते हैं

ऑप्शन ट्रेडिंग में ध्यान रखने वाले टिप्स

  1. सही स्ट्राइक प्राइस का चयन करें
  2. रिस्क को मैनेज करके चले
  3. समय मूल्य व्यवहार का ध्यान रखें
  4. ऑप्शन ग्रीक को समझने का प्रयास करें और इसे हंड्रेड परसेंट सीखें
  5. ऑप्शन ट्रेडिंग में अपने फाइनैंशल गोल बनाएं

ऑप्शन ट्रेडिंग के फायदे! Benefits of options trading

  1. यह ट्रेडिंग फ्लैक्सिबिलिटी के साथ – साथ लिक्विडिटी भी प्रदान करता है।
  2. अन्य प्रकार की ट्रेडिंग विकल्पों की तुलना में, आप यहां पर कम कैपिटल के साथ ट्रेड करने में सक्षम होते हैं।
  3. डिअर पाठक यह तो आपको पता ही है ऑप्शंस का उपयोग हेंजिग के लिए भी क्या जाता है हेंजिग से क्या होता है कि आप अपने पोर्टफोलिओं को मार्केट में आने वाले उतार – चढ़ाव की वजह से होने वाले नुकसान से बच सकते है।
  4. आपको बता दें कि ऑप्शंस में आप कोई भी मार्केट कंडीशन को अप्लाई कर सकते हैं जबकि अन्य ट्रेडिंग विकल्प में यह पॉसिबल नहीं है।

ऑप्शन ट्रेडिंग के नुकसान!

  1. ऑप्शन ट्रेडिंग बहुत ही रिस्की होता है यहां पर व्यक्तिगत स्टॉक, ईटीएफ या बांड खरीदने की तुलना में ऑप्शन ट्रेडिंग में बहुत ही ज्यादा जोखिम उठाना पड़ सकता है इसलिए ऑप्शन ट्रेडिंग का यह एक नेगेटिव पॉइंट्स है।
  2. डिअर पाठक स्टॉक प्राइस के मूवमेंट की भविष्यवाणी करना मुश्किल हो सकता है इसलिए यहां पर मार्केट के सेंटीमेंट को समझना थोड़ा सा अधिक कठिन है क्योंकि यदि आपका अनुमान गलत हो जाता है, तो ऑप्शन ट्रेडिंग आपको बहुत बड़ा नुकसान पहुंचा सकती है।
  3. ऑप्शन ट्रेडिंग के लिए स्टॉक या इंडेक्स का विश्लेषण करना इक्विटी स्टॉक से अलग होता है इसलिए ज़रूरी है की आप ऑप्शन ट्रेडिंग को अच्छे से समझने के बाद ही इसमें ट्रेड करें।

ऑप्शन ट्रेडिंग कैसे सीखें? How to learn options trading?

देखिए ऑप्शन ट्रेडिंग करना नए लोगों के लिए बहुत ही मुश्किल हैं पर वह कहते हैं ना नामुमकिन जैसी कोई चीज नहीं इसलिए पहले आप ट्रेडिंग को अच्छे से सीख जाइए फिर ऑप्शन के अंदर आइए ऑप्शन ट्रेडिंग के लिए वैसे तो कई ट्रेनर दावे करते हैं कि हम आपको ऑप्शन ट्रेडिंग सिखा देंगे लेकिन उनको सिर्फ अपना कोर्स सेल करना है और आप अंदर के राज कभी नहीं जान पाएंगे इसलिए अगर आपको फ्री में ऑप्शन ट्रेडिंग सीखनी है तो स्टॉक पत्रिका जल्द ही आपके लिए एक यूट्यूब चैनल शुरू कर रहा है जिसमें आपको बिल्कुल मुफ्त में ऑप्शन ट्रेडिंग सिखाई जाएगी तो आप हमारे Stock Market में ट्रेडिंग कितने प्रकार से होती है? चैनल को सब्सक्राइब कर सकते हैं

Conclusion

आपने आज सीखा की ऑप्शन ट्रेडिंग क्या है? Option trading kya hai, ऑप्शन ट्रेडिंग कैसे करनी चाहिए और ऑप्शन ट्रेडिंग कैसे सीखें ऑप्शन ट्रेडिंग के कितने प्रकार होते हैं और फिर भी अगर आपका कोई ऑप्शन ट्रेडिंग से लेकर सवाल है तो आप बेझिझक हमें कमेंट बॉक्स में बता सकते हैं हमारी टीम आपके सवालों के उत्तर देने के लिए सदैव तत्पर है स्टॉक पत्रिका पर अपना कीमती समय देने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद

शेयर बाजार क्या है | Share Market Basics In Hindi, Types Of Share Market

इस पोस्ट में हम Share Market याने शेयर बाजार की जानकारी जानेंगे, जैसे की, What is share market, Share market basics in hindi, शेयर बाजार क्या है, शेयर बाजार कितने प्रकार के होते है, Types of share market और शेयर मार्केट में पैसा कब और कैसे invest करना चाहिए, Stock market in hindi, इत्यादि।

उद्योग या व्यवसाय चलाने के लिए जो कैपिटल होना जरूरी है, वह उन्हें शेयर बाजार से मिलता है। यह शेयर बाजार किसी भी विकसित देश की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। तो दोस्तों निचे हम Share Market, शेयर बाजार के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी जानेंगे।

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शेयर बाजार क्या है – What Is Share Market In Hindi?

Share Market में शेयर को ख़रीदा और बेचा जाता है। Share का मतलब “हिस्सा” या “भाग” होता है, परन्तु शेयर बाजार की भाषा में बात करे तो Share का अर्थ होता है कंपनियों का हिस्सा लेना, किसी कंपनी का शेयर खरीदना याने उस कंपनी का हिस्सेदार या भागीदार बन जाना।

शेयर मार्केट को स्टॉक मार्केट भी कहा जाता है, इसके माध्यम से आम आदमी भी छोटे-बड़े उद्योग या व्यवसाय मे अपनी भागीदारी कर सकता है। लेकिन किसी को Share Market बहुत फायदा हो जाता है या फिर किसी को उसकी बहुत बड़ी कीमत भी चुकानी पडती है यानि नुकसान भी हो जाता है।

Share Market में किसी को शेयर की कीमत में मांग और आपूर्ति के सिद्धांत की वजह से उतार-चढ़ाव आ जाता है। शेयर को खरीदने के लिए अगर ज्यादा व्यक्ति रहे तो शेयर की कीमत बढ़ जाती है और जब शेयर को बेचने वाले की संख्या ज्यादा हो तो कीमत घटती जाती है।

Stock Market, Share Market For Beginners In Hindi

शेयर मार्केट याने Stock market यह एक ऐसी जगह है जहा पर शेयर को ख़रीदा जा सकता है और बेचा जा सकता है, यहा पर बहुत से लोग पैसे कमाकर अपना फायदा भी कर लेते है और कुछ लोगो को पैसे गवाना भी पड़ता है, इसलिए यहाँ पर सोच-समझ कर ही फैसला लेना चाहिए।

BSE (Bombay Stock Exchange) और NSE (National Stock Exchange) यह भारत में मुख्य रूप से दो Stock Exchange है, जहा पर लोग शेयर खरीदते है और बेचते है।

Stock/Share की खरीदी- बिक्री करने के लिए शेयर ब्रोकर्स यानी शेयर दलाल की जरूरत पडती है, शेयर ब्रोकर्स किसी व्यक्ति या कंपनी को शेयर खरीदी और बिक्री करने का काम करता है और वह उसका कमीशन लेता है।

स्टॉक एक्सचेंज, ब्रोकर और निवेशक यह शेयर बाजार की तीन कडियाँ है। शेयर बाजार में ब्रोकर स्टॉक एक्सचेंज के सदस्य होते है और सिर्फ वो ही स्टॉक एक्सचेंज में ट्रेडिंग कर सकते हैं। शेयर ब्रोकर्स याने शेयर दलाल की मदद से शेयर को ख़रीदा या बेचा जाता है। ग्राहक हो या कंपनी वह खुद शेयर खरीद या बेच नही सकते, इसलिए शेयर बाजार में हिस्सा लेना है तो शेयर दलाल की बहुत जरूरत होती है।

शेयर मार्केट के प्रकार – Types Of Share Market In Hindi

शेयर मार्केट के मुख्यतः Primary Share Market और Secondary Share Market यह दो प्रकार होते है, इसका सविस्तर विश्लेषण नीचे दिया गया है:

Primary Share Market – प्राथमिक शेयर मार्केट

Primary Share Market यह शेयर मार्केट का पहला प्रकार है। सबसे पहले कंपनी अपने शेयर्स की स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टिंग करवाकर अपने शेयर को बेचती है, पर इसके लिए उन्हें पहले IPO (Initial Public Offering) लाना पड़ता है।

इसमे IPO लाने के बाद तय किये गये मूल्य पर अपने शेयर पब्लिक को ख़रीदने के लिए उपलब्ध किये जाते है। कंपनियां प्राथमिक बाजार के माध्यम से निवेशकों तक पहुँचने के लिए स्टॉक एक्सचेंज जैसे BSE, NSE और ब्रोकर की मदद लेते हैं।

किसी कंपनी को IPO (Initial Public Offering) के लिए जाना है, तो उस समय उसको पूरी जानकारी देनी होती है जैसे की, Promoters, Financials, Businesses, अपने शेयर या स्टॉक और उनकी कीमत आदि।

Secondary Share Market – द्वितीयक शेयर मार्केट

जब शेयर मार्केट में पैसा इन्वेस्ट करने की बात आती है, तो हम Secondary Share Market की ही बात करते है, क्योकि इन द्वितीयक शेयर मार्केट में ही हम पैसा लगाते है। इस प्रकार के मार्केट में पहले से ही लिस्टेड कंपनी के शेयर की खरेदी बिक्री होती है।

द्वितीयक शेयर बाजार में एक स्टॉक या शेयर की कीमत देख कर उसे ख़रीदा या बेचा जाता है, लेकिन उसके फायदे या नुकसान के साथ उस शेयर की ख़रीदा या बिक्री होती है। इसमे भी ब्रोकर या दलाल की मदद से ही खरेदी-बिक्री होती है। अगर किसी निवेशक गुंतवणूकदार को शेयर बाजार से बाहर निकलना है. तो वह अपना शेयर किसी ओर को बेचकर शेयर मार्केट से बाहर निकल सकता है ऐसा भी इस प्रकार के मार्केट में होता है।

शेयर बाजार में इन्वेस्टमेंट कैसे करें – How To Invest In Share Market

How to Money Invest in Share Market: शेयर मार्केट में हम पैसा इन्वेस्ट तो करना चाहते है, पर इन्वेस्ट करने से पहले ही हमारे सामने बहुत से सवाल खड़े हो जाते हैं जैसा कि, हमे कहां निवेश याने Invest करना चाहिए और कैसे करना है या Invest करने पर हमारे साथ कोई धोखा तो नहीं होगा। इन सब बातो का ख्याल रखकर ही शेयर बाजार में हम आसानी से निवेश कर सकते हैं।

1. Share Market में आने के लिए आपको स्टॉक ब्रोकर, शेयर्स को होल्ड करने के लिए Demat Account और शेयर्स को रोज खरीदने और बेचने के लिए ट्रेडिंग अकाउंट की जरूरत होती है। तो सबसे पहले इन जरूरतों को पूरा करने के लिए आपको स्टॉक ब्रोकर ऐसा चुनना चाहिए, जो कम से कम कमीशन ले और आपको अच्छी सेवा भी प्रदान करे।

2. शेयर बाजार को एक बिज़नेस की तरह समझना चाहिए और आपको उसी कंपनी का शेयर ख़रीदना है, जिसका बिज़नेस अच्छा हो और आपको समझ में आये।

3. शेयर बाजार में इन्वेस्ट करने से पहले आपको अपनी आर्थिक स्तिथि को भी समझ लेना चाहिए, जैसे की अपनी financial situation क्या है, कमाई और रिक्स लेने की क्षमता, इत्यादी। सिर्फ पैसे लगाना ही सबकुछ नही होता है बल्कि आपको पहले अपनी financial plan के बारे में भी सोचना पड़ता है।

4. Share Market याने Stock market की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है की, आपको शेयर बाजार के बारे में पूरी और सही जानकारी होना बहुत जरूरी है। आपको कोई भी फैसला जल्दबाजी में नही लेना चाहिए वरना आपको इसकी बहुत बडी कीमत चुकानी पड़ सकती है।

5. शेयर मार्केट में किसी को भी कोई शेयर खरीदना और बेचना है तो उसके लिए हमेशा एक स्टॉक ब्रोकर या शेयर दलाल की जरूरत होती है। जब आप शेयर बाजार में निवेश या Invest करने के लिए स्टॉक ब्रोकर की मदद लेते है, तो सबसे पहले आपको उनके पास से दो अकाउंट खोलने पड़ते है Demat Account और Trading Account, यह अकाउंट खोलने के बाद आप आसानी से कोई भी शेयर की खरेदी-बिक्री कर सकते है।

6. जब कभी भी आपको शेयर बाजार में Invest या निवेश करना है, तो सबसे पहले उस कंपनियों की हालातों के बारे में सब बाते जानना बहुत जरूरी है।

7. शेयर बाजार में शेयर विकास का दर कम हो या महँगाई दर ज्यादा हो, तो उस वक्त बड़ी कंपनियों पर नजर रखें, क्योंकि ऐसी स्थिति में छोटी कंपनियों के मुकाबले में बड़ी कंपनियों के शेयर अच्छी स्थिति में होते हैं।

तो दोस्तों आशा करते है की आपको What is share market, Share market basics in hindi, शेयर बाजार क्या है, शेयर बाजार कितने प्रकार के होते है, Types of share market और शेयर मार्केट में पैसा कब और कैसे invest करना चाहिए, Stock market in hindi, इत्यादि की सही जानकारी मिली होंगी। यदि आपको हमारी यह पोस्ट अच्छी लगी तो हमें comments करके बताये और अपने दोस्तों में जरुर शेअर करे।

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