फोरेक्स टुटोरिअल

कुशल बाजार

कुशल बाजार

उत्तराखण्ड बहुउद्देशीय वित्त एवं विकास निगम

उत्तराखण्ड में निवास करने वाले अनुसूचित जाति ,जनजाति समुदाय का मुख्य साधन परम्परागत हस्त शिल्प रहा है। उत्तराखण्ड की जनसंख्या में अनुसूचित जाति की जनसंख्या 17.50 प्रतिशत तथा जनजाति की जनसंख्या 3 प्रतिशत है। इन समुदायों में हस्त शिल्प पारम्परिक रूप से विकसित होता रहा और पीढ़ी दर पीढ़ी हस्त शिल्प कौशल हस्तान्तरित होता रहा है। आधुनिक बाजार ,आर्थिकी तथा शिक्षा के प्रचार-प्रसार के साथ राजकीय सेवाओं में भागीदारी तथा आवश्यक अवस्थापना सुविधाओं के अभाव में हस्त शिल्प में संलग्न परिवार तथा उत्पाादित सामग्री की गुणवत्ता में हा्रस की स्थिति उत्पन्न हुई है। नवोदित राज्य उत्तराखण्ड में लुप्त हो रहे पारम्परिक शिल्पों को पुर्नजीवित करने तथा प्रोत्साहित करने हेतु उत्तराखण्ड शासन द्वारा शिल्पी ग्राम की एक महत्वाकांक्षी योजना आरम्भ की गई है। इससे एक तरफ पारम्परिक कौशल समाप्त होने से बचेगा वहीं उन शिल्पों में कार्यरत शिल्पी अपने कौशल के आधार पर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर सकेंगे। उल्लेखनीय है कि हस्त शिल्प में मुख्यतः अनुसूचित जाति एवं जनजाति के परिवार ही संलग्न हैं।

शिल्पी ग्राम योजना अन्तर्गत शिल्प ग्रामों का सर्वेक्षण शिल्पियों का चिन्हांकन ,कुशल शिल्पी से अर्द्धकुशल तथा अकुशल शिल्पियों का प्रशिक्षण एवं शिल्पी ग्रामों में अवस्थापना विकास ,विपणन की व्यवस्था आदि समाहित की गई है।

  • योजना का उद्देश्य
  • परम्परागत शिल्पों को रोजगारपकर ,आयजनित गति विधि के रूप में विकसित करना।

सर्वप्रथम परम्परागत शिल्पों की पहचान जिनमें संलग्न शिल्पियों का चिन्हांकन करना तथा उनकी दक्षता के अनुसार कुशल एवं अकुशल की श्रेणी में वर्गीकरण करना एवं पंजीकरण करना।

  • इन शिल्पों में संलग्न परिवारों को समुचित प्रशिक्षण देना ताकि उनकी कार्यकुशलता एवं दक्षता में अभिवृद्धि की जा सके।
  • नई तकनीकों एवं डिजायनों का प्रचार एवं अनुसन्धान करना।
  • शिल्पी परिवारों को शिल्प अभिमुखीकरण प्रशिक्षण देना तथा शिल्पों के बारे में उनकी सम्पूर्ण जागरूकता स्तर की अभिवृद्धि करना।
  • कौशल प्राप्त शिल्पी की पाहचान करना तथा उसे पंजीकृत करना।
  • शिल्पियों कुशल बाजार के संबंध में आधारभूत सूचनाएं तैयार करना जिसके आधार पर वित्तपोषण ,कच्चे माल की आपूर्ति ,उत्पादित सामग्री का संकलन एवं विपणन आदि की व्यवस्था करवाना।
  • विपणन प्रोत्साहन हेतु हाट ,मेले ,प्रदर्शनी आदि में उत्पादों को विक्रय करने के लिये सुविधा प्रदान करना।
  • शिल्प एवं शिल्पकारों से संबंधित विषयों पर परिचर्चाएं ,संगोष्ठी एवं कार्य शालाएं आयोजित करना।
  • कच्चे माल के डिपो यथाः ऊन बैंक, लकड़ी बैंक की स्थापना करना। इसी प्रकार कच्चे माल के लिये गोदाम हाट इम्पोरियम बनाना।
  • शिल्पी परिवारों हेतु कल्याण निधि की स्थापना करना।
  • राज्य में गठित विभिन्न बोर्ड यथाः उत्तराखण्ड बम्बू एण्ड फाइवर डेवलपमेन्ट बोर्डशीप एण्ड वूल डेवलपमेन्ट बोर्ड के साथ योजना के क्रियान्वयन हेतु समन्वय स्थापित करना।

इस योजना के अन्तर्गत राज्य के सभी चयनित विकासखण्ड आच्छादित होंगे। इसके लिये एक सुनियोजित एवं त्रुटिरहित सर्वेक्षण कराया जायेगा जिसे समय-समय पर अद्यावधिक किया जायेगा। इसके अतिरिक्त योजना क्रियान्वयन के अध्ययन मूल्यांकन एवं अनुश्रवण की कार्यवाही भी किया जाना आवश्यक है। कुशल बाजार क्याsकि इससे योजना की सफलता प्रगति एवं क्रियान्वयन में आने वाली कठिनाईयों की जानकारी प्राप्त की जा सकेगी। सर्वेक्षण अध्ययन एवं सत्त अनुश्रवण हेतु परामर्शदाताओं की नियुक्ति विशेषज्ञ सेवाओं को प्राप्त करने शिल्प ग्रामों ,शिल्पियों एवं शिल्प परिवारों के विषय में आधारभूत डाटा एवं सूचनाएं तैयार करने तथा शिल्पियों के पहचान पत्र बनाने की भी कार्यवाही की जायेगी। योजना के अन्तर्गत प्रशिक्षण तीन स्तर पर दिया जायेगा। पहले जागरूकता सृजन एवं अभिमुखीकरण तत्पश्चात प्रारम्भिक प्रशिक्षण एवं व्यवसायिक प्रशिक्षण व्यवसायिक प्रशिक्षण पूर्ण होने के उपरान्त शिल्पियों द्वारा उत्पाादित वस्तुओं की गुणवत्ता की समीक्षा कुशल बाजार की जायेगी कि क्या प्रशिक्षार्थियों द्वारा उत्पाादित वस्तु बाजार में प्रतिस्पर्धा में टिकेगी अथवा नहीं। यदि गुणवत्ता में कमी होगी तो विशेष प्राविधान के तहत प्रशिक्षण को अधिकतम तीन माह तक और बढ़ाया जायेगा।

उत्पादित वस्तुओं के विपणन हेतु वस्तु की कीमत बाजार की स्थितियों एवं लागत के अनुसार तय की जायेगी। उत्पादित वस्तुओं का प्रचार-प्रसार किया जायेगा। वस्तुओं के विपणन हेतु सम्भावित बाजार तथा वस्तुओं की मांग का सर्वेक्षण कराया जायेगा । शिल्पियों से विभिन्न प्रकार के नमूने प्राप्त कर उन्हें यात्रा मार्ग में पर्यटन विभाग द्वारा निर्मित केन्द्रों में प्रदर्शित किया जायेगा एवं प्रतिष्ठित आगन्तुकों को उपहार स्वरूप दिया जायेगा ताकि पर्यटकों में विक्री को बढ़ावा मिल सके एवं शिल्पी ग्राम योजना पर्यटन के साथ जुड़ सके। केन्द्रीय स्थलों पर स्थाई हाट निर्माण किया जायेगा तथा अस्थाई टैन्ट के रूप में सार्वजनिक स्थान पर भी सुविधा दी जायेगी और ऐसे स्थाई भवनों के लिए शिल्पियों से आवेदन पत्र प्राप्त किये जायेंगे अथवा शिल्पियों से ही निविदाएं आमंत्रित की जायेंगी। शिल्प उत्पादों के उत्तराखण्ड ब्राण्ड का मानकीकरण किया जायेगा। जैसेः उत्तराखण्ड ऊनी कार्पेट आदि।

तकनीकी एवं सहायक सुविधाएंः- इसके अन्तर्गत शिल्पियों को परामर्श एवं भ्रमण कराया जायेगा जिसके तहत अन्य पर्वतीय राज्यों यथाः हिमांचल प्रदेश ,जम्मू कश्मीर ,मणिपुर अथवा ऐसे राज्यों में भ्रमण कराया जायेगा जहां हस्त शिल्प के क्षेत्र में अच्छा विकास हुआ हो और अनुसूचित जाति के शिल्पी बहुलता में हो। शिल्पियों में प्रतिस्पद्र्धा की भावना जगाने के लिये उत्कृष्ठ शिल्पियों को पुरूष्कार आदि की व्यवस्था भी की जायेगी। इसके अतिरिक्त शिल्प विकास गतिविधि आदि के संचालन राष्ट्रीय ,अन्तर्राष्ट्रीय मेलों , गोष्ठियों में इन उत्पादकों की भागीदारी सुनिष्चिितश्चत कराने हेतु आने-जाने व ठहरने की व्यवस्था निःशुल्क कराई जायेगी। इस प्रकार यातायात ,परामर्श ,भ्रमण,उत्कृष्ठता पुरूष्कार की व्यवस्था भी प्रस्तावित की जायेगी।

व्यवसाय विकास हेतु अवस्थापना विकास एक आवश्यक शर्त है जिसमें मुख्यतः संचार सुविधा ,बिजली ,पानी ,सड़क ,कच्चे माल एवं बाजार की सुविधा ,सामूहिक सुविधाएं, विपणन की गतिविधियों का संगठन एवं उत्पाकता वृद्धि सम्मिलित है। प्रथम चरण में दो केन्द्रीयकृत शिल्प ग्राम इम्पोरियम उपयुक्त स्थान पर खोला जाना भी प्रस्तावित है जिसके लिये रू 50 लाख प्रति केन्द्र की व्यवस्था की जायेगी।

योजना के सफल एवं प्रभावी क्रियान्वयन के निमित्त सत्त अनुश्रवण एवं समीक्षा हेतु एक राज्य स्तरीय समीक्षा समिति का गठन प्रमुख सचिव/ सचिव , समाज कल्याण ,उत्तराखण्ड शासन की अध्यक्षता में गठित किया गया है जिसके सदस्य मुख्य अधिशासी अधिकारी , बम्बू बोर्ड , मुख्य अधिशासी अधिकारी , लाइव स्टाक डेवलपमेन्ट बोर्ड ,मुख्य अधिशासी अधिकारी ,शीप एण्ड वूल बोर्ड ,समन्वयक ,उत्तराखण्ड आॅर्गनिक बोर्ड ,प्रबन्ध निदेशक,उत्तराखण्ड बन निगम ,निदेशक, उद्योग ,महा प्रबन्धक, उत्तराखण्ड बहुउद्देशीय वित्त एवं विकास निगम हैं।

भारत में हरित इमारतों: बाजार कहां है?

इमारतों का पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन पर भारी प्रभाव पड़ता है कुल यूएस ऊर्जा खपत का 41% हिस्सा, इमारतों से औद्योगिक (30 प्रतिशत) और परिवहन (29 प्रतिशत) क्षेत्रों का उपयोग किया जाता है। इमारतें लगभग 14 प्रतिशत पीने योग्य पानी (प्रति वर्ष 15 ट्रिलियन गैलन) का उपयोग करती हैं। अकेले संयुक्त राज्य अमेरिका में, इमारतों का लगभग 40% राष्ट्रीय सीओ 2 उत्सर्जन का हिस्सा है। मानक निर्माण प्रथा हर साल लाखों टन सामग्री का उपयोग करते हैं और बर्बाद करते हैं।
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इसके मुकाबले, हरित इमारतों प्राकृतिक संसाधनों को कुशलता से इस्तेमाल करते हैं, कचरे को कम करते हैं और नतीजतन उपयोगिता बिल और पर्यावरण पर प्रभाव पड़ता है। LEED प्रमाणित इमारतों में 34 प्रतिशत कम CO2 उत्सर्जन होता है और 25 प्रतिशत कम ऊर्जा का उपभोग होता है हरित इमारतों में जल दक्षता के प्रयासों से 15 प्रतिशत तक पानी के उपयोग को कम करने और परिचालन लागतों में 10 प्रतिशत से अधिक की बचत होने की उम्मीद है। जल-कुशल जुड़नारों के साथ हर 100 अमेरिकी घरों में से एक को वापस लेने से, लगभग 80,000 टन ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन, जो एक वर्ष के लिए सड़क से 15,000 कारों को निकालने के बराबर है। एलईईडी परियोजनाएं भूमि के मुकाबले 80 मिलियन टन से अधिक अपशिष्ट को हटाने के लिए भी जिम्मेदार हैं, और 2030 तक 540 मिलियन टन से बढ़ने की उम्मीद है।

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युवाओं को कुशल बनाना उच्च प्राथमिकता होनी चाहिए

भारत से 250 अरब डॉलर के सेवा क्षेत्र के निर्यात के सर्वकालिक उच्च स्तर ने आशावाद को प्रेरित किया है। इस वर्तमान परिदृश्य में कौशल पहल भी एक बार फिर सुॢखयों में है। स्किल इंडिया मिशन और नई पीढ़ी का कौशल विकास एक राष्ट्रीय आवश्यकता कुशल बाजार है, जो ‘आत्मनिर्भर भारत’ की मजबूत नींव के निर्माण के लिए महत्वपूर्ण है। ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ के तत्वावधान में हर युवा को एक सफल करियर बनाने के लिए स्कूल के समय से ही कौशल विंग के साथ सशक्त होने की आवश्यकता है।

भारत के युवाओं को कुशल बनाना नि:संदेह एक उच्च प्राथमिकता होनी चाहिए, लेकिन भारत के स्किलिंग ट्रैक रिकॉर्ड में सुधार के लिए सरकार की पहल अभी तक बहुत संतोषजनक नहीं रही। ‘स्किल इंडिया रिफॉॅम्र्स 2016’ पर शारदा प्रसाद कमेटी के एक विश्लेषण में पाया गया कि कौशल विकास पाठ्यक्रम अक्सर उनके रोजगार के अवसरों के लिए सीमित मूल्य प्रदान करते हैं।

हालांकि कुछ कौशल योजनाओं का पुनर्गठन किया गया है, लेकिन समस्या का पूरी तरह कुशल बाजार से समाधान नहीं किया गया। उदाहरण के लिए, जब सरकार ने 2020 में गरीब कल्याण रोजगार योजना (जी.के.आर.वाई.) की शुरूआत की, जो रिवर्स माइग्रेशन के बाद उभरे कौशल और बेरोजगारी के मुद्दों को संबोधित करने के लिए थी, इसने वांछित परिणाम नहीं दिए। यह एक प्रणालीगत समस्या की ओर इशारा करता है जो भारत में प्रतिभा पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित करती है। एक लड़की के बारे में सोचें, जो ग्रामीण पिछड़े क्षेत्र से संबंधित है और अपने अगले करियर कदम पर विचार कर रही है। उसे कहां ट्रेनिंग लेनी चाहिए और उसके लिए किस तरह की नौकरियां खुली होंगी। आज भारत में कई युवाओं की कहानियां ग्रामीण लड़कियों की कहानी का आईना हैं। यद्यपि उनके पास अपने जीवन को बेहतर बनाने के लिए एक मजबूत अभियान है, उनकी पहुंच सीमित है।

इसी तरह के मुद्दे स्किलिंग के क्षेत्र को प्रभावित करते हैं। अपस्किल की तलाश करने वाले उम्मीदवारों को विश्वसनीय कौशल प्रदाताओं से जुड़ना मुश्किल होता है और ‘प्रमाणित’ प्रशिक्षुओं के पास अक्सर उन्हें रोजगार योग्य बनाने के लिए आवश्यक कौशल नहीं होते। भारत के सबसे बड़े कौशल कार्यक्रम, पी.एम.के.वी.वाई. के आंकड़े इस बात की गवाही देते हैं। पिछले कुछ वर्षों में, पी.एम.के.वी.वाई. के तहत प्रशिक्षित 4 व्यक्तियों में से केवल 1 को ही रखा गया है।

काम के भविष्य को डिजाइन करना : प्रौद्योगिकी संभावित रूप से उन अंतरालों को पाट सकती है, जो हम कार्यबल बाजार में देखते हैं। पहले से ही, कई नियोक्ता डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से भर्ती कर रहे हैं और पंजाब सरकार नौकरी पोर्टल जैसे राज्य स्तरीय रोजगार पहलों में महत्वपूर्ण वृद्धि हुई है। ब्लू और ग्रे कॉलर श्रमिकों को समर्थन देने के लिए, केंद्र सरकार ने ‘उन्नति’ मंच के बीटा संस्करण की भी घोषणा की है। इस बीच, निजी क्षेत्र की कई आशाजनक पहलें सामने आई हैं। हालांकि ये पहलें प्रभावशाली हैं, लेकिन इन्हें एक सांझे डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से जोडऩे से अत्यधिक लाभ मिल सकता है। सरकार ने पहले ही ‘प्लेटफाम्र्स के प्लेटफार्म’ के रूप में ‘उन्नति’ को विकसित करने की अपनी योजना का संकेत दिया है ताकि इंटरऑपरेबिलिटी को सुविधाजनक बनाया जा सके।

ऐसे टैलेंट नोड से ग्रामीण पृष्ठभूमि के युवा काफी लाभ उठा सकते हैं। एक ही स्थान पर, वे मान्यता प्राप्त कौशल कार्यक्रमों के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं, जिसमें प्लेसमैंट रिकॉर्ड भी शामिल हैं, साथ ही साथ रोजगार के अवसरों के बारे में भी जानकारी मिल सकती है। जैसे-जैसे इस मंच में और पहलों को एकीकृत किया जाता है, यह भारत की प्रतिभा के बारे में एक विहंगम दृश्य पेश करते हुए सूचनाओं के भंडार की मेजबानी कर सकता है।

यद्यपि टैलेंट नोड एक आशाजनक विचार है, इसके निष्पादन के लिए कई कठिन चुनौतियों का समाधान करने के लिए नवीन समाधानों की आवश्यकता होगी। पहला मुद्दा मौजूदा कौशल का सत्यापन है, एक ऐसी समस्या जिसे हल करना विशेष रूप से कठिन रहा है। इसके लिए व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के और मानकीकरण और प्रमाणन की आवश्यकता होगी, एक ऐसा कार्य जिसे कौशल विकास मंत्रालय ने राष्ट्रीय व्यावसायिक मानकों के माध्यम से पहले ही शुरू कर दिया है।

दूसरा संबंधित मुद्दा सार्वभौमिक पहुंच का है। अनौपचारिक क्षेत्र में भारत में कार्यरत जनसंख्या का लगभग 93 प्रतिशत हिस्सा है। टेलैंट नोड के मामले में, इस आबादी को बहिष्करण के एक उच्च जोखिम का सामना करना पड़ सकता है। अपवर्जन जोखिम को कम करने के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों चैनलों के माध्यम से हाशिए के समूहों के साथ जुड़ाव की आवश्यकता होगी।

निष्कर्ष : आज शिक्षा केवल स्कूलों और कॉलेजों में जो पढ़ाया जाता है, तक ही सीमित नहीं है, बल्कि विकसित बाजार और तकनीकी प्रगति के कारण सीखने का दायरा व्यापक हो गया है। प्रतिस्पर्धी और विकसित हो रहे रोजगार बाजार में करियर सुरक्षित करने के लिए युवाओं के लिए अपस्किलिंग और शेष उद्योग-प्रासंगिक महत्वपूर्ण हैं। बाजार संचालित कौशल हासिल करने से युवाओं को प्लेसमैंट के बेहतरीन अवसर मिलेंगे और उन्हें आशाजनक करियर बनाने में मदद मिलेगी। (लेखक ओरेन इंटरनैशनल के सह-संस्थापक और एम.डी., राष्ट्रीय कौशल विकास परिषद के साथ प्रशिक्षण भागीदार हैं।)-दिनेश सूद

कुशल बाजार

कोरोनावायरस (COVID-19) के फैलाव को धीमा करने में सहायता करने के लिए लगाए गए प्रतिबंधों के कारण लघु व्यवसायों के सामने आने वाली वित्तीय चुनौतियों के संबंध में किए जा सकने वाले उपायों के बारे में सहायता करने के लिए एक व्यवसाय सलाह कार्यक्रम उपलब्ध करवाने हेतु Victorian Goverenment द्वारा Victorian Chamber of Commerce and Industry (VCCI) के साथ मिलकर काम किया जा रहा है।

इस कार्यक्रम के माध्यम से, पात्र व्यवसायों के मालिकों को किसी अनुभवी संव्यवसायिक (प्रोफेशनल) के साथ चार की सँख्या तक सत्र मिल सकते हैं, प्रत्येक सत्र 2 घंटे का होगा और वह संव्यवसायिक उन मालिकों को उनके व्यवसायों के भविष्य के बारे में जानकारी सहित निर्णय लेने में सहायता करेगा।

यह कार्यक्रम निम्नलिखित के बारे में तदानुकूल मार्गदर्शन उपलब्ध कराता है:

  • व्यवसाय बहाली - व्यवसाय की सुदृढ़ बहाली (लागत में कमी, ऋण और धनापूर्ति (कैशफ्लो) प्रबंधन)
  • बाजार में बदलाव - यह समझने के लिए कि कोरोनावायरस (COVID-19) के कारण बाजार में कैसे बदलावों की शुरुआत हुई या बदलावों की गति में कैसे तीव्रता आई
  • डिजिटल ज्ञान स्तर और विभिन्न माध्यमों से पारस्परिक संपर्क - व्यवसायों को नए ग्राहकों और बाजारों तक पहुँचने में सहायता के बारे में
  • बाजार और वितरण श्रंखला विविधता - वितरण श्रंखला के ख़तरों की संभावनाओं को कम करने के बारे में
  • पुनर्कुशलता और पुनर्प्रशिक्षण - व्यवसायों को, उनके वर्तमान कर्मचारियों को ज्यादा कुशल बनाने में सहायता के बारे में

VCCI website पर आवेदन करने के लिए ‘Apply now’ बटन दबाएं

क्या सहायता उपलब्ध है?

पात्र व्यवसाय मालिकों का एक अनुभवी संव्यवसायिक से संपर्क कराया जाएगा जो तीन माह की अवधि में उनके साथ आपसी बातचीत के चार की सँख्या तक सलाह सत्र करेगा। प्रत्येक सत्र दो घंटे का होगा। सलाह के ये सत्र फोन, विडियो बैठक और अगर उचित हुआ तो, आमने-सामने किए जाएंगे। किसी सलाहकार से संपर्क कराए जाने से पहले, आवेदकों को एक प्रश्नावली के उत्तर देने के लिए कहा जाएगा जिसकी रचना उनके व्यवसाय की बहाली की विशेष आवश्यकताओं का आकलन करने के लिए की गई है।

प्रारंभिक सत्र के बाद, आवेदकों को की विस्तृत योजना उपलब्ध कराई जाएगी एक विस्तृत कार्यवाही योजना प्रदान की जाएगी, जिसमें उनके व्यवसाय की आवश्यकताओं के अनुसार विशेष रुप से तैयार की गई सलाह शामिल होगी।

आवेदकों को आगे और भी सहायता के लिए उनकी ज़रुरतों के हिसाब से अन्य संपर्क भी करवाए जाएंगे।

इनमें वित्तीय परामर्श (काउंसलिंग), डिजिटल विशेषज्ञ सेवाएं तथा कोचिंग, और मानसिक स्वास्थ्य सहायता तथा प्रशिक्षण शामिल हो सकते हैं।

इसके बाद सलाहकार द्वारा, आवेदक की प्रगति जानने, और उन्हें अतिरिक्त सहायता प्रदान करने के लिए उनके साथ अगले तीन महीनों में तीन सत्रों की तिथियाँ निर्धारित की जाएंगी।

व्यवसायों के लिए सुविधाएं

इस कार्यक्रम से व्यवसायों को निम्नलिखित में सहायता मिलती है:

  • बहाली, बाजार में बदलाव, डिजिटल ज्ञान स्तर, वितरण श्रंखला विविधता और वर्तमान कर्मचारियों को ज्यादा कुशल बनाने के लिए अपनी आवश्यकताओं के अनुसार नीतियाँ बनाने में
  • खतरों और वित्तीय जोखिमों को कम करने में
  • अन्य सरकारी सहायताओं और स्थानीय संव्यवसायिक सेवाओं से संपर्क करने में

इस कार्यक्रम के लिए किस प्रकार के व्यवसायों द्वारा आवेदन किया जा सकता है?

इस कार्यक्रम के लिए उन लघु व्यवसायों के मालिक आवेदन नहीं कर सकते हैं जिनमें पूर्ण-कालिक कर्मचारी 20 से ज्यादा हैं। इस कार्यक्रम के आशय से, एक लघु व्यवसाय का मालिक कोई एकल व्यापारी (सोल ट्रेडर), साझेदारी में व्यापार करने वाले व्यक्ति, निजी कंपनी या लघु व्यवसाय चलाने वाला कोई ट्रस्ट हो सकता है। 20 पूर्ण-कालिक कर्मचारियों का मतलब है सभी कर्मचारियों (चाहे पूर्ण-कालिक हो या अंश-कालिक) ने, Australian Bureau of Statisctics द्वारा परिभाषित सामान्य कार्य घंटों में, जितने सामान्य घंटे काम किया है उसकी कुल अवधि।

व्यवसायों के लिए निम्नलिखित भी आवश्यक है:

  • उनके पास एक सक्रिय आस्ट्रेलियन व्यवसाय सँख्या (ABN) होना
  • वे एक सार्वजनिक कंपनी, चेरिटेबल व्यवसाय (जिनका संचालन लाभ कमाने के लिए नहीं होता) या Body Corporate and Community Management Act 1997 के अन्तर्गत एक निगमित निकाय (बॉडी कार्पोरेट) न हों।
  • उनका Victoria में पुनःस्थापन या निरंतर व्यवसाय करने का इरादा हो

आवेदन कैसे करें

VCCI website के माध्यम से कुशल बाजार आवेदन करने के लिए इस पृष्ठ पर ‘Apply now’ बटन दबाएं।

अगर आपको अपने आवेदन- पत्र के बारे में सहायता की ज़रुरत है, तो कृपया VCCI से 03 8662 5333 पर संपर्क करें।

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