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क्या करें निवेशक

क्या करें निवेशक
BSE दोपहर तक एक हजार पॉइंट नीचे गिरा। (फाइल फोटो)

क्या करें निवेशक

बीएसई सेंसेक्स अब तक के सर्वोच्च स्तर के आसपास है और विधानसभा चुनाव के नतीजे भारतीय जनता पार्टी के पक्ष क्या करें निवेशक में हैं, ऐसे में इक्विटी में निवेश पर खुदरा निवेशकों का झुकाव होगा। अब निकासी का समय नहीं है बल्कि अच्छे शेयरों पर दांव लगाने का। अच्छी खबर यह है कि धीमी रफ्तार से ही सही, अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्र में स्थिरता के साथ सुधार देखा जा सकता है। दूसरी तिमाही क्या करें निवेशक में भारतीय अर्थव्यवस्था का विस्तार 4.8 फीसदी की दर से हुआ, जो पिछली तिमाही के 4.क्या करें निवेशक 4 फीसदी के मुकाबले ज्यादा है। विश्लेषकों का मानना है कि आगामी तिमाहियों में इसमें और बढ़ोतरी क्या करें निवेशक क्या करें निवेशक हो सकती है। दूसरी तिमाही में कंपनियों के मुनाफे में बढ़त की रफ्तार 10 फीसदी रही, जो उम्मीद से दोगुना है।

बीएनपी पारिबा एमएफ के सीनियर पोर्टफोलियो मैनेजर अपूर्व शाह ने कहा, कई चीजें इक्विटी के पक्ष में जा रही है। राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर चुनाव में क्या हुआ उस पर विचार किए बिना देखें तो दो-तीन साल के नजरिये से इक्विटी में निवेश बेहतर विकल्प है। अर्थव्यवस्था में संभावित बदलाव हो रहा है, कई क्षेत्रों में सुधार देखने को मिला है और वैश्विक स्तर पर स्थितियां बेहतर हो रही हैं।

विश्लेषकों का हालांकि कहना है कि हम उन शेयरों से बाहर निकलने पर विचार करना चाहिए जिसमें उल्लास के साथ तेजी देखने को मिल रही हो। किम सिक्योरिटीज क्या करें निवेशक के प्रमुख (शोध) जिगर शाह कहते हैं, अगर आप अच्छी निर्यातोन्मुखी और उपभोक्ता क्षेत्र में हैं तो अपना निवेश बनाए रखिए। अगर आप कुछ औद्योगिक क्षेत्र में चुनाव के बाद उल्लासमय तेजी की उम्मीद कर रहे हैं तो मुनाफावसूली का यह अच्छा समय है क्योंकि फंडामेंटल के हिसाब से कुछ क्या करें निवेशक भी नहीं बदला है।

ऐसे में इस मौके का इस्तेमाल उन कंपनियों से छुटकारा पाने में करना चाहिए, क्या करें निवेशक जो फंडामेंटल में बदलाव के बिना तेजी से दौड़ रहे हैं। निवेशक उन शेयरों से भी निकल सकते हैं जो कर्ज के भारी बोझ से दबे हुए हैं और कम मूल्यांकन वाली दूसरी कंपनियों में निवेश करना चाहिए, जिसकी नकदी की स्थिति बेहतर हो। हालांकि अच्छा प्रदर्शन करने वाले क्षेत्रों में निवेश बनाए रखना चाहिए क्योंकि ऐसा नहीं करने पर निवेशक भविष्य में होने वाले मुनाफे से वंचित हो जाएगा।

लेकिन ऐसे समय में आपको कितना निवेश करना चाहिए? ज्यादातर विशेषज्ञों का कहना है कि हमें एकबारगी सबकुछ दांव पर लगाते हुए आक्रामक तरीके से खरीदारी नहीं करनी चाहिए क्योंकि चुनाव नतीजे के चलते बाजार का मौजूदा उल्लास समाप्तहो सकता है और बाजार आम चुनाव के बारे में सोचना शुरू करेगा।

सेंसेक्‍स 50 हजार के पार, अगर गिरावट आई तो क्‍या करें निवेशक?

आपका वित्‍तीय लक्ष्‍य अगले 3-5 साल में पूरा होना है तो इक्विटी निवेश को तुरंत घटाने के बारे में सोचना चाहिए.

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इसके लिए कुमार की टीम ने 20 साल की अवधि ली जिसमें निफ्टी टीआरआई इंडेक्‍स ने 'ऑल-टाइम हाई' लेवल छुआ. फिर देखा कि इस स्‍तर के बाद एक साल और 3 साल में कैसा रिटर्न रहा. इससे पता चला कि अगर आपने सबसे ऊंचे स्‍तर के दौरान निवेश किया होता तो निफ्टी से एक साल के आधार पर 73 फीसदी बार पॉजिटिव रिटर्न मिलता. 3 साल के आधार पर यह 86 फीसदी बार पॉजिटिव होता.

हालांकि, आपका वित्‍तीय लक्ष्‍य अगले 3-5 साल में पूरा होना है तो इक्विटी निवेश को तुरंत घटाने के बारे में सोचना चाहिए. यानी आपको मुनाफावसूली करनी चाहिए. अगर अगले 5 साल या इससे अधिक समय के लिए आपको पैसे की जरूरत नहीं है तो यहां एक प्‍लान है.

निवेश की शुरुआत करते वक्‍त आपने जो ओरिजिनल एसेट एलोकेशन तय किया था, उसे बैलेंस करें. अगर पोर्टफोलियो में आपका इक्विटी एलोकेशन 5 फीसदी से ज्‍यादा बढ़ गया है तो इक्विटी निवेश कम करके तुरंत पुराने एसेट एलोकेशन पर लाएं. इक्विटी पोर्टफोलियो में सुरक्षा की परत बनाएं. वैल्‍यू ओरिएंटेड फंडों और मिड/स्‍मॉलकैप फंडों के वैल्‍यूएशन अब भी किफायती हैं.

सुनिश्चित करें कि आपका वैल्‍यू ओरिएंटेड और मिड/स्‍मॉलकैप फंडों में निवेश 'फाइव फिंगर स्‍ट्रैटेजी' के आधार पर हो. इसमें 5 अलग-अलग स्‍टाइल में बराबर-बराबर निवेश किया जाता है. इन स्‍टाइल में वैल्‍यू, क्‍वालिटी, मिड/स्‍मॉलकैप, किफायती कीमतों पर ग्रोथ और इंटरनेशनल फंड शामिल हैं.

अगर इक्विटी वैल्‍यूएशन का बढ़ना जारी रहता है और ये बहुत महंगे हो जाते हैं तो लंबी अवधि की योजना के मुताबिक जो इक्विटी एलोकेशन तय किया गया था उसका तीन-चौथाई घटा दें.

कुमार ने बताया कि मौजूदा वैल्‍यूएशन 'हाई' हैं, लेकिन इसने उनके इन-हाउस वैल्‍यूएशन की सीमा पार नहीं की है. ऐसा हो जाने पर निवेशक अपने इक्विटी एलोकेशन को एक-चौथाई कम कर सकते हैं. इस पैसे को डायनेमिक एसेट एलोकेशन फंडों में शिफ्ट किया जा सकता है.

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1000 प्वॉइंट्स क्यों गिर गया Sensex और इस तरह की स्थिति में क्या करें निवेशक?

शेयर बाजार के विशेषज्ञों का कहना है कि, निकट भविष्य में बाजार में तेजी आएंगी। इसलिए निवेशकों को ज्यादा परेशान नहीं होना चाहिए। क्योंकि घरेलू आर्थिक सुधार पटरी पर है और भारत में कोरोना टीकाकरण की गति भी अच्छी है।

1000 प्वॉइंट्स क्यों गिर गया Sensex और इस तरह की स्थिति में क्या करें निवेशक?

BSE दोपहर तक एक हजार पॉइंट नीचे गिरा। (फाइल फोटो)

संदीप सिंह. भारतीय शेयर बाजार BSE में सोमवार दोपहल तेज गिरावट देखने को मिली। BSE सेंसेक्स 1,170.12 अंक टूटकर 58,465.89 अंक पर बंद हुआ और निफ्टी 348.25 अंक के नुकसान से 17,416.55 अंक पर बंद हुआ। इसकी सबसे बड़ी वजह विभिन्न देशों में कोरोनावायरस के बढ़ते मामले हैं। इसके साथ रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में जो 4 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली। वो RIL में सऊदी अरामनो द्वारा ली जाने वाली 20 प्रतिशत की हिस्सेदारी को छोड़ने के फैसले के बाद देखने को मिली। इसके अलावा शेयर बाजार के गिरने की वजह सरकार के कृषि कानून को वापस लेना की घोषण करना भी माना क्या करें निवेशक जा रहा है। ऐसे में निवेशकों का मूड खराब दिख रहा है। जिसका सीधा असर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज में गिरावट के साथ देखने को मिला।

बाजारों को क्या परेशान कर रहा है? इसी साल 19 अक्टूबर को BSE ने 62,245 के उच्च स्तर के बेंचमार्क को छूआ था। लेकिन पिछले एक महीने में 5.8 प्रतिशत की गिरावट के साथ सेंसेक्स 3600 अंक टूट गया। वहीं जनवरी और अक्टूबर के बीच के 10 महीनों का आंकलन किया जाए। तो विश्व में कोविड के बढ़ते मामलों की वजह से कई देशों में लगाया गया लॉकडाउन इसकी एक वजह जरूर बना है।

इसके अलावा केंद्र सरकार के द्वारा सुधार के एजेंडे से एक कदम पीछे हटाना भी शेयर बाजार में गिरावट की एक वजह बताया जा रहा है। दरअसल प्रधानमंत्री मोदी ने शुक्रवार को आगामी शीतकालीन सत्र में तीनों कृषि कानूनों को निरस्त करने की घोषणा की है। जिसके बाद से ही निवेशकों का मूड खराब है। इसके साथ ही रिलायंस इंडस्ट्रीज और सऊदी अरामको के बीच रद्द हुई डील भी शेयर बाजार के लिए बड़ा झटका साबित हुई है।

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आगे बाजार का कैसा रहेगा रूख? फिलहाल शेयर बाजार में तुरंत राहत मिलने की कोई उम्मीद नहीं है। लेकिन लंबी अवधि में बाजार में फिर से तेजी क्या करें निवेशक आएगी। ऐसे में आने वाले दिन काफी दबाव में होंगे। इसके अलावा यूरोप सहित दूसरे देशों में कोविड के बढ़ते मामले और वैश्विक आर्थिक सुधार की गति भी बाजार के रूख को दिशा देगी। इसके साथ ही अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा परिसंपत्ति खरीद में कमी भी शेयर बाजार पर दबाव बनाएंगी।

निवेशकों क्या करें निवेशक को क्या करना चाहिए? शेयर बाजार के विशेषज्ञों का कहना है कि, निकट भविष्य में बाजार में तेजी आएंगी। इसलिए निवेशकों को ज्यादा परेशान नहीं होना चाहिए। क्योंकि घरेलू आर्थिक सुधार पटरी पर है और भारत में कोरोना टीकाकरण की गति भी अच्छी है। ऐसे में एक बार फिर शेयर बाजार नई ऊंचाई पर पहुंचेगा।

कोरोना के खौफ में शेयर बाजार, अब निवेशक क्या करें

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नई दिल्ली: गुरूवार को बाजार के खुलते ही दलाल स्ट्रीट गोते लगाते नजर आई। जहां संसेक्स 1700 प्वाइंट्स की गिरावट के साथ खुला तो वहीं निफ्टी में भी पिछले 2 साल की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई और इन सब के पीछे वजह है कोरोनावायरस । दरअसल WHO के कोरोनावायरस को पैनडेमिक घोषित करने के बाद अमेरिका समेत कई देशों ने अपने देशों ने अपने-अपने बॉर्डर्स बंद कर दिये । इस महामारी से निपटने के लिए ओवल हाउस में दिए गए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बयान से भी निवेशकों को भरोसा नहीं हुआ, नतीजा अमेरिकी शेयर बाजार में जबर्दस्त गिरावट । अमेरिकी बाजार 1400 अंकों की गिरावट के साथ बंद हुआ और इसका असर एशियाई मार्केट पर पड़ना लाजमी था। अब तक बाजार 2600 अंक लुढ़क चुका है आपको बता दें कि ये गिरावट इतनी बड़ी थी कि बाजार खुलते ही महज एक मिनट में निवेशकों का 6 लाख करोड़ रुपए स्वाहा हो गया है।

संसेक्स में आज सुबह से जो हो रहा है उसका अंदाजा बाजार एक्पर्ट्स को पहले से था लेकिन ये गिरावट इतनी बड़ी होगी इस बात का अंदाजा किसी को नहीं था । लेकिन अब सवाल उठता है कि हर बदलते पल के साथ नई गिरावट झेल रहे बाजार में निवेशकों को क्या करना चाहिए।

क्या है एक्सपर्ट्स की राय-

मार्केट एक्सपर्ट अंबरीश बलिगा की मानें तो निवेशकों को इस वक्त धैर्य से काम लेना चाहिए। इस वक्त मार्केट में किसी भी तरह का मूवमेंट नुकसान ही देगा । इसीलिए बेहतर होगा कि Falling line के इस दौर में निवेशक कम से कम एक महीने तक बाजार में लगाए हुए पैसे को हाथ भी न लगाए क्योंकि इस वक्त अगर थोड़ी बहुत रिकवरी होती भी है तो वो नई बिकवाली के चलते वो नई गिरावट पैदा करेगी।

वहीं पुनीत किनरा का मानना है कि बाजार के हालात सुधरने में कम से कम एक तिमाही का वक्त लगेगा और कोरोना की वैक्सीन ही महामारी के साथ-साथ बाजार की हालत भी सुधारेगी।

नए निवेशकों को सलाह-

इसके साथ ही नए निवेशकों के लिए पुनीत का कहना है कि अगर पैसा इंवेस्ट करना है तो लॉर्ज कैप में इंवेस्ट करें क्योंकि मार्केट रिट्रीट सबसे पहले लॉर्ज कैप्स में नजर आएगी ।

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