वायदा का उपयोग करके व्यापार कैसे करें

ईटीएफ के साथ आसानी से विदेशी मुद्रा में निवेश करें

ईटीएफ के साथ आसानी से विदेशी मुद्रा में निवेश करें
Nippon India Nifty Auto ETF ओपन एंडेड स्कीम होगा जो निफ्टी ऑटो इंडेक्स को ट्रैक करेगा.

कैसे निवेश करें

wikiHow's Content Management Team बहुत ही सावधानी से हमारे एडिटोरियल स्टाफ (editorial staff) द्वारा किये गए कार्य को मॉनिटर करती है ये सुनिश्चित करने के लिए कि सभी आर्टिकल्स में दी गई जानकारी उच्च गुणवत्ता की है कि नहीं।

यहाँ पर 17 रेफरेन्स दिए गए हैं जिन्हे आप आर्टिकल में नीचे देख सकते हैं।

यह आर्टिकल २,५५० बार देखा गया है।

यदि आपके पास थोड़ा सा भी धन बचा हुआ है, तो उसका निवेश करके आप उसे और भी बढ़ा सकते हैं। वास्तव में, यदि आपने प्रभावी रूप से पर्याप्त निवेश किया होगा, तो अंत में आप अपने निवेश से होने वाली कमाई और उस पर मिलने वाले ब्याज से अपना जीवन जी सकते हैं। यदि आप नौसिखिया हैं और बाजार को अभी समझ रहे हैं, तो सुरक्षित निवेश जैसे कि, बॉन्ड्स, म्यूचुअल फंड्स और रिटायरमेंट एकाउंट्स, के साथ शुरू करें । जब पर्याप्त धन बना लें, तो आप ज्यादा जोखिम भरे निवेश, जैसे कि, रियल एस्टेट या कमोडिटीज़ में निवेश कर सकते हैं जिनमें संभावित रिटर्न अपेक्षाकृत ज्यादा होता है।

भारत में म्यूचुअल फंड में निवेश कैसे करें?

म्यूचुअल फंड उद्योग एक प्रकार का निवेश वाहन है जो कई निवेशकों से स्टॉक, बॉन्ड, मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट आदि जैसी प्रतिभूतियों में निवेश करने के लिए धन एकत्र करता है। पेशेवर मनी मैनेजर म्यूचुअल फंड का प्रबंधन करते हैं, संपत्ति आवंटित करते हैं और निवेशकों के लिए पूंजीगत लाभ का उत्पादन करने का प्रयास करते हैं। म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो संरचित और उनके प्रॉस्पेक्टस में उल्लिखित निवेश उद्देश्यों से मेल खाने के लिए प्रबंधित होते हैं। व्यक्ति और छोटे व्यवसाय म्यूचुअल फंड में निवेश कर सकते हैं, जो उन्हें स्टॉक, बॉन्ड आदि के पेशेवर रूप से प्रबंधित पोर्टफोलियो तक पहुंच प्रदान करते हैं। शेयरधारक फंड के लाभ या हानि को आनुपातिक रूप से साझा करते हैं। आम तौर पर, म्यूचुअल फंड का प्रदर्शन फंड के कुल मार्केट कैप में बदलाव पर आधारित होता है, जो फंड के अंतर्निहित निवेश के प्रदर्शन को जोड़कर प्राप्त किया जाता है।

--> --> --> --> --> (function (w, d) < for (var i = 0, j = d.getElementsByTagName("ins"), k = j[i]; i

Polls

  • Property Tax in Delhi
  • Value of Property
  • BBMP Property Tax
  • Property Tax in Mumbai
  • PCMC Property Tax
  • Staircase Vastu
  • Vastu for Main Door
  • Vastu Shastra for Temple in Home
  • Vastu for North Facing House
  • Kitchen Vastu
  • Bhu Naksha UP
  • Bhu Naksha Rajasthan
  • Bhu Naksha Jharkhand
  • Bhu Naksha Maharashtra
  • Bhu Naksha CG
  • Griha Pravesh Muhurat
  • IGRS UP
  • IGRS AP
  • Delhi Circle Rates
  • IGRS Telangana
  • Square Meter to Square Feet
  • Hectare to Acre
  • Square Feet to Cent
  • Bigha to Acre
  • Square Meter to Cent
  • Stamp Duty in Maharashtra
  • Stamp Duty in Gujarat
  • Stamp Duty in Rajasthan
  • Stamp Duty in Delhi
  • Stamp Duty in UP

These articles, the information therein and their other contents are for information purposes only. All views and/or recommendations are those of the concerned author personally and made purely for information purposes. Nothing contained in the articles should be construed as business, legal, tax, accounting, investment or other advice or as an advertisement or promotion of any project or developer or locality. Housing.com does not offer any such advice. No warranties, guarantees, promises and/or representations of any kind, express or implied, are given as to (a) the nature, standard, quality, reliability, accuracy or otherwise of the information and views provided in (and other contents of) the articles or (b) the suitability, applicability or otherwise of such information, views, or other contents for any person’s circumstances.

Housing.com shall not be liable in any manner (whether in law, contract, tort, by negligence, products liability or otherwise) for any losses, injury or damage (whether direct or indirect, special, incidental or consequential) suffered by such person as a result of anyone applying the information (or any other contents) in these articles or making any investment decision on the basis of such information (or any such contents), or otherwise. The users should exercise due caution and/or seek independent advice before they make any decision or take any action on the basis of such information or other contents.

Auto Stocks में मुनाफा कमाने का गोल्डेन चांस, 5 जनवरी को खुलेगा देश का पहला ऑटो ईटीएफ

India’s First Auto ETF: स्टॉक मार्केट में सीधे निवेश की बजाय ईटीएफ के जरिए भी ऑटो शेयरों में तेजी का फायदा उठाने का गोल्डेन चांस जल्द ही मिलने वाला है.

Auto Stocks में मुनाफा कमाने का गोल्डेन चांस, 5 जनवरी को खुलेगा देश का पहला ऑटो ईटीएफ

Nippon India Nifty Auto ETF ओपन एंडेड स्कीम होगा जो निफ्टी ऑटो इंडेक्स को ट्रैक करेगा.

India’s First Auto ETF: स्टॉक मार्केट में सीधे निवेश की बजाय ईटीएफ के जरिए भी ऑटो शेयरों में तेजी का फायदा उठाने का गोल्डेन चांस जल्द ही मिलने वाला है. निप्पन इंडिया म्यूचुअल फंड (NIMF) के एसेट मैनेजर निप्पन लाइफ इंडिया एसेट मैनेजमेंट लिमिटेड (NAM India) ने आज (3. जनवरी) को देश का पहला ऑटो सेक्टर ईटीएफ लाने का ऐलान किया है. यह निप्पन इंडिया ऑटो ईटीएफ (Nippon India Nifty Auto ETF) ओपन एंडेड स्कीम होगा जो निफ्टी ऑटो इंडेक्स को ट्रैक करेगा. एनआईएमएफ देश के सबसे बड़े ईटीएफ प्लेयर्स में शुमार है जो 30 नवंबर 2021 तक उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक 50 हजार करोड़ रुपये के फंड के मैनेज करती है.

रुपये के कमजोर होने का असर कैसे करें कम

कमजोर आर्थिक आंकड़ों की वजह से रुपया दो महीने के निचले स्तर पर आ गया। ऐसे में निवेशक उदार विप्रेषण योजना (एलआरएस) पर विचार कर सकते हैं जिसके जरिये एक व्यक्ति विदेश में सालाना 250,000 डॉलर तक का निवेश कर सकता है।

अगर आपका बच्चा जल्द ही अमेरिका के किसी विश्वविद्यालय में पढ़ाई के लिए जाने वाला है और आपको आने वाले दिनों में उसकी फीस का भुगतान करना होगा तब मार्च में रुपये के 72 रुपये प्रति डॉलर के स्तर पर और अप्रैल में 75 रुपये प्रति डॉलर के स्तर पर आने से आपकी चिंता जरूर बढ़ी होगी। निश्चित तौर पर चिंता का बड़ा कारण लंबी अवधि में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये का अवमूल्यन है।

पिछले 10 वित्तीय वर्षों के दौरान, औसतन डॉलर (2010-11 और 2020-21 के बीच) के मुकाबले रुपये में 4.7 प्रतिशत की सालाना चक्रवृद्धि दर से गिरावट आई है। आज लोगों के पास कई लक्ष्य हैं जिनके लिए उन्हें विदेशी मुद्राओं में खर्च करने की जरूरत होगी, मसलन बच्चों की उच्च शिक्षा, विदेश यात्रा (अस्थायी रूप से प्रतिबंधित), विदेश में घर खरीदने जैसे कामों के लिए। जाहिर है उन्हें एक पोर्टफोलियो बनाने की जरूरत है जो मुद्रा अवमूल्यन के रुझान से उनका बचाव कर सके।

उच्च मुद्रास्फीति

लंबी अवधि में डॉलर के मुकाबले रुपये का अवमूल्यन क्यों होता रहता है? एचडीएफसी बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री अभीक बरुआ कहते हैं, 'हमारी अर्थव्यवस्था में उच्च मुद्रास्फीति दर के कारण भारत अपने व्यापारिक साझेदारों की तुलना में व्यापारिक प्रतिस्पर्धा का रुझान खो रहा है।' अमेरिका में आमतौर पर कम महंगाई दर (दो फीसदी या उससे कम) होती है जबकि भारत में यह काफी ज्यादा है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (औद्योगिक कामगार) आधारित मुद्रास्फीति पिछले 10 वित्त वर्षों में औसतन 6.7 प्रतिशत रही है। प्रतिस्पर्धा में इसी कमी के कारण रुपये का अवमूल्यन होता है। बरुआ बताते हैं कि भारतीय बाजारों में ज्यादा पूंजी प्रवाह होने से अवमूल्यन ईटीएफ के साथ आसानी से विदेशी मुद्रा में निवेश करें का स्तर ज्यादा होता है।

अंतरराष्ट्रीय फंडों में निवेश

इससे निपटने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि विभिन्न जगहों वाला पोर्टफोलियो हो यानी ईटीएफ के साथ आसानी से विदेशी मुद्रा में निवेश करें जिसमें डॉलर परिसंपत्ति हो। सेबी के पंजीकृत निवेश सलाहकार और फि ड्यूसियारिज के संस्थापक अविनाश लुथरिया कहते हैं, 'एक साधारण पोर्टफोलियो बनाएं जिसमें निफ्टी इंडेक्स फंड और एसऐंडपी 500 इंडेक्स फंड का 50:50 का अनुपात शामिल हो।' विदेश में निवेश करने से आपको न केवल भौगोलिक विविधता का लाभ मिलेगा बल्कि डॉलर आधारित परिसंपत्तियों में निवेश से आपका पोर्टफोलियो मुद्रा जोखिम के लिहाज से कम संवेदनशील होगा।

अमेरिका के बाजार में 2009 के बाद से ही लगातार तेजी बनी रही है जिसकी वजह से कई निवेशक इस बात पर हैरानी जताते हैं कि इसमें निवेश करना समझदारी है या नहीं। प्लान अहेड वेल्थ एडवाइजर्स के मुख्य वित्तीय योजनाकार विशाल धवन कहते हैं, 'सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) का रास्ता अपनाकर अमेरिकी फंड में अपने निवेश की शुरुआत कर दें। इसके अलावा, सिर्फ बड़ी तकनीकी कंपनियों के शेयरों पर ध्यान न दें जिनमें सबसे ज्यादा तेजी दिखी है बल्कि निवेश में ज्यादा विविधता बरतें।'

एक व्यापक वैश्विक स्तर के विविध इक्विटी फंड में निवेश करना एक और विकल्प है। पीजीआईएम इंडिया ग्लोबल इक्विटी अपॉच्र्युनिटी फंड चलाने वाले पीजीआईएम इंडिया म्युचुअल फंड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अजित मेनन कहते हैं, 'भारत में निवेशकों के लिए यह जानना मुश्किल है कि भविष्य में कौन सा देश या किस क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन की संभावना है। ग्लोबल फंड के लिए वे यह काम विशेषज्ञ फंड मैनेजरों को सौंप सकते हैं।'

मेनन बताते हैं कि उनका फंड दुनिया भर में नए क्षेत्रों पर जोर देता है जिनमें ऑन-डिमांड इकनॉमी (वीडियो स्ट्रीमिंग, एजुकेशन ऑन डिमांड आदि), क्लाउड आधारित तकनीक, डेटा सिक्योरिटी, ई-कॉमर्स, डिजिटल भुगतान सेवा, रोबोटिक्स, ऑटोमेशन और स्वास्थ्य तकनीक शामिल है। बेहतर प्रभाव के लिए निवेशक को अंतरराष्ट्रीय फंडों को इक्विटी पोर्टफोलियो में कम से कम 15-20 प्रतिशत तक की हिस्सेदारी में लाना होगा।

एलआरएस

निवेशक उदार विप्रेषण योजना (एलआरएस) का विकल्प भी चुन सकते हैं जिसमें उन्हें प्रति व्यक्ति सालाना 250,000 डॉलर तक निवेश की अनुमति मिलती है। उन्हें ब्रोकिंग मंच पर एक अकाउंट खोलना होगा जिससे भारतीय निवेशक सीधे अमेरिका जैसे बाजारों में निवेश कर पाएंगे। इसके प्रति मुख्य आकर्षण की वजह यह है कि निवेशक को एक्सचेंज-ट्रेडेड-फंड्स (ईटीएफ) और शेयरों के मामले में अधिक विकल्प मिलते हैं जिनमें से वह चुन सकते हैं। लुथरिया कहते हैं, 'हालांकि कर से जुड़ा अनुपालन ज्यादा जटिल हो गया है।' ऐसे में केवल बड़े निवेशक ही इसका विकल्प चुन सकते हैं।

सोने में निवेश

सोना में निवेश से निवेशकों को रुपये के अवमूल्यन का मुकाबला करने में भी मदद मिल सकती है। सोना की अंतरराष्ट्रीय कीमत डॉलर में तय होती है। सोना की भारतीय कीमत अंतरराष्ट्रीय डॉलर की कीमत से ली जाती है। मान लीजिए कि अगर आपके पास एक डॉलर की कीमत जितना ईटीएफ के साथ आसानी से विदेशी मुद्रा में निवेश करें सोना है और एकडॉलर 75 रुपये के बराबर है। अगर रुपये में गिरावट 75 से 80 के बीच हो तब भी आपके पास जो सोना है उससे आप अब भी एक डॉलर खरीद सकते हैं।

हालांकि सभी जिंसों की तरह सोना में भी लंबे समय तक तेजी और गिरावट देखी जाती है। ऐसे में अगर आप लंबी अवधि में सोना में निवेश करते हैं तब पोर्टफोलियो में इसकी हिस्सेदारी 10-15 फीसदी तक होनी चाहिए।

समझें बारीकियां

आम तौर पर रुपये के अवमूल्यन से निर्यातकों को फायदा मिलता है जबकि आयातकों पर इसका उलटा असर पड़ता है। जो लोग डायरेक्ट स्टॉक पोर्टफोलियो चलाते हैं उन्हें अपने निवेश में मुद्रा अवमूल्यन के प्रभाव को गहराई से समझने की जरूरत है। सेबी में पंजीकृत स्वतंत्र इक्विटी शोध कंपनी स्टालवर्ट इन्वेस्टमेंट एडवाइजर्स के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी जतिन खेमानी कहते हैं, 'कुछ कंपनियां कच्चे माल का आयात करती हैं और अपने तैयार माल का एक हिस्सा निर्यात करती हैं इसलिए उन पर ज्यादा प्रभाव नहीं है। कई अपने शुद्ध विदेशी मुद्रा निवेश के जरिये बचाव करते हैं ताकि अल्पावधि में ज्यादा उतार-चढ़ाव से उनका बचाव हो सके।'

सेबी द्वारा पंजीकृत स्वतंत्र इक्विटी अनुसंधान कंपनी, स्टालवर्ट इन्वेस्टमेंट एडवाइजर्स के मुख्य कार्याधिकारी और संस्थापक जतिन खेमानी कहते हैं कि कुछ कंपनियों की अपने उत्पाद की प्रकृति और अनुकूल औद्योगिक ढांचे के लिहाज से मूल्य निर्धारण की ताकत है और यह मुद्रा के प्रतिकूल उतार-चढ़ाव के लिहाज से कीमतों में संशोधन लाने में सक्षम है।

वह आगे कहते हैं कि प्रभाव को सामान्य बनाने के बजाय निवेशकों को प्रत्येक कंपनी के कारोबारी मॉडल को समझने की जरूरत है। खेमानी ने कहा, 'आप इस बात पर गौर करिये कि पहले जब मुद्रा में तेजी से उतार-चढ़ाव दिखा तब वित्तीय स्थिति कैसी थी। इससे आपको यह समझने में मदद मिलेगी कि कारोबारी मॉडल कितना लचीला है।'

सेबी की पंजीकृत निवेश सलाहकार कंपनी प्लूटस कैपिटल के प्रबंध अधिकारी अंकुर कपूर कहते हैं, 'आईटी क्षेत्र में बढ़त की संभावना है। फार्मा, केमिकल और पेंट में असर इस बात पर निर्भर करेगा कि इनका कितना निर्यात होता है और कितनी कीमतें बढ़ाई जा सकती हैं क्योंकि इनमें से सभी इनपुट आयात करते हैं। सभी क्षेत्रों में विविध पोर्टफोलियो का निर्माण करें ताकि मुद्रा में होने वाले उतार-चढ़ाव के प्रभाव को कम किया जा सके।'

Paytm Money की नई सेवा 'ETFs' से मात्र 16 रुपए से शुरू करें निवेश

Kavita Singh Rathore

राज एक्सप्रेस। यदि आप बहुत काम अमाउंट का निवेश करने का मन बना रहे है तो अब आपके पास एक बहुत अच्छा और नया ऑप्शन 'ETFs' है। ऑनलाइन पेमेंट ईटीएफ के साथ आसानी से विदेशी मुद्रा में निवेश करें ऐप Paytm लांच के बाद से ही एक से बढ़कर एक नई सुविधाएं अपनी ऐप में जोड़ी आई हैं। वहीं, अब Paytm की सब्सिडियरी कंपनी Paytm Money ने अपने प्लेटफॉर्म पर एक नई सेवा की पेशकश की है। जो कि, एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETFs) की है।

Paytm Money की नई सेवा :

दरअसल, Paytm Money ने अपने प्लेटफॉर्म पर एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETFs) की नै सेवा लांच की हैं। कंपनी की ये सेवा कुछ समय पहले ही लांच कर दी जाती लेकिन, कंपनी इसे लांच करने के लिए बाजार नियामक SEBI द्वारा मंजूरी मिलने का इंतज़ार कर रही थी। SEBI की मंजूरी मिलते ही Paytm Money ने इसे अपने यूजर्स के लिए लांच कर दिया है। इस सेवा की खास बात यह है कि, इसमें निवेश की मिनिमम सीमा मात्र 16 रुपए तय की गई है। यानि आप 16 रुपए का भी निवेश कर सकेंगे।

कंपनी का लक्ष्य :

Paytm Money द्वारा अपने प्लेटफॉर्म पर शुरू की गई एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड (ETF) की सेवा ETF सिक्योरिटीज का एक कलेक्शन होता है। जिसे लोग ब्रोकरेज फर्म के द्वारा स्टॉक एक्सचेंज पर खरीद या बेच सकते हैं। बताते चलें, कंपनी को अपनी इस नई सेवा के माध्यम से आप आने वाले 12 से 18 महीने में अपने प्लेटफॉर्म (ETFs) पर 1 लाख नए यूजर्स द्वारा निवेश होने की उम्मीद है। यह कहना गलत नहीं होगा कि, कंपनी का लक्ष्य इतने समय में 1 लाख नए यूजर्स को जोड़ना है।

Paytm Money का कहना :

Paytm Money का कहना है कि, हमने इस नई सेवा को नए निवेशकों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया है। इसलिए इसमें निवेश करना बहुत आसान और सुविधाजनक होगा। Paytm Money के माध्यम से निवेशक इक्विटी में 16 रुपए, गोल्ड में 44 रुपए और निफ्टी में 120 रुपए जैसे कम अमाउंट से ETF इन्वेस्टमेंट शुरू कर सकते हैं।

Paytm Money ETF के फीचर्स :

भारत में इंडेक्स, गोल्ड, इक्विटी और डेट कैटेगरी में 69 तरह के ETFs मौजूद हैं।

इंटरेक्टिव इंटरफेज निवेशक की चुने गए ETFs में प्राइस चेंज को ट्रैक करने में मदद करता है।

इस सेवा में यूजर को प्राइस अलर्ट सेट करने का विकल्प मिलेगा।

Paytm Money पर ETF का लाइव प्राइस अपडेट मिलता रहेगा।

निवेशक ओपन मार्केट आवर में सेल ऑर्डर डाल सकता है और पैसा सीधे अपने बैंक अकाउंट में ट्रांसफर कर सकता है।

ताज़ा ख़बर पढ़ने के लिए आप हमारे टेलीग्राम चैनल को सब्स्क्राइब कर सकते हैं। @rajexpresshindi के नाम से सर्च करें टेलीग्राम पर।

रेटिंग: 4.56
अधिकतम अंक: 5
न्यूनतम अंक: 1
मतदाताओं की संख्या: 160
उत्तर छोड़ दें

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा| अपेक्षित स्थानों को रेखांकित कर दिया गया है *