वायदा का उपयोग करके व्यापार कैसे करें

विदेशी मुद्रा करियर

विदेशी मुद्रा करियर
विदेशी मुद्रा भंडार में भारी गिरावट। (प्रतीकात्मक फोटो)

एक सप्ताह बढ़ने के बाद फिर घटा अपना विदेशी मुद्रा भंडार, गोल्ड रिजर्व में हुआ इजाफा

बिजनेस डेस्कः फॉरेन करेंसी असेट में फिर कमी हुई है। इसका असर देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर दिखा है। तभी तो पांच अगस्त 2022 को समाप्त सप्ताह के दौरान भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 89.7 करोड़ डॉलर घटकर 572.978 अरब डॉलर रह गया। इससे पहले के सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़ोतरी हुई थी। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने यह जानकारी दी।

फिर घट गया विदेशी मुद्रा भंडार

आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, इससे पहले बीते 29 जुलाई को समाप्त सप्ताह के दौरान अपना विदेशी मुद्रा भंडार 2.4 अरब डॉलर बढ़कर 573.875 अरब डॉलर पर पहुंच गया था। उससे पहले देश के विदेशी मुद्रा भंडार में लगातार चार सप्ताह तक गिरावट हुई थी।

फॉरेन करेंसी असेट भी घटे

पांच अगस्त को समाप्त सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार में आई गिरावट का मुख्य कारण फॉरेन करेंसी असेट का घटना है। यह कुल मुद्रा भंडार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। आरबीआई के शुक्रवार को जारी किये गये भारत के साप्ताहिक आंकड़ों के अनुसार समीक्षाधीन सप्ताह में विदेशी मुद्रा आस्तियां (एफसीए) 1.611 अरब डॉलर घटकर 509.646 अरब डॉलर रह गई। डॉलर में अभिव्यक्त विदेशी मुद्रा भंडार में रखे जाने वाली विदेशी मुद्रा आस्तियों में यूरो, पौंड और येन जैसी गैर-अमेरिकी मुद्राओं में मूल्यवृद्धि अथवा मूल्यह्रास के प्रभावों को शामिल किया जाता है।

स्वर्ण भंडार में बढ़ोतरी

आंकड़ों के अनुसार, आलोच्य सप्ताह में स्वर्ण भंडार का मूल्य 67.1 करोड़ डॉलर बढ़कर 40.313 अरब डॉलर हो गया। समीक्षाधीन सप्ताह में, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के पास जमा विशेष आहरण अधिकार (SDR) 4.6 करोड़ डॉलर बढ़कर 18.031 अरब डॉलर हो गया। जबकि आईएमएफ में रखे देश का मुद्रा भंडार 30 लाख डॉलर घटकर 4.987 अरब डॉलर रह गया।

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भारत से लेकर चेक ​गणराज्य तक के घट रहे विदेशी मुद्रा भंडार, वैश्विक स्तर पर रिकॉर्ड 1 लाख करोड़ डॉलर की कमी

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दुनिया भर में विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign-Currency Reserves) में काफी तेजी से गिरावट आ रही है. इसकी वजह है कि भारत से लेकर चेक ​गणराज्य तक, कई देशों के केंद्रीय बैंकों ने अपनी-अपनी मुद्रा को समर्थन देने के लिए हस्तक्षेप किया है. ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल वैश्विक मुद्रा भंडार लगभग 1 लाख करोड़ डॉलर या 7.8 प्रतिशत घटकर 12 लाख करोड़ डॉलर रह गया है. ब्लूमबर्ग ने इस डाटा को कंपाइल करना साल 2003 से शुरू किया था. विदेशी मुद्रा भंडार में यह तब से लेकर अब तक की सबसे बड़ी गिरावट है.

इस गिरावट का एक हिस्सा केवल वैल्युएशन में बदलाव के कारण है. अमेरिकी मुद्रा डॉलर, यूरो और येन जैसी अन्य आरक्षित मुद्राओं के मुकाबले दो दशक के उच्च स्तर पर पहुंच गई है. इसने इन मुद्राओं की होल्डिंग की डॉलर वैल्यू को कम कर दिया. लेकिन घटते भंडार भी मुद्रा बाजार में तनाव को दर्शाते हैं, जो केंद्रीय बैंकों की बढ़ती संख्या को मूल्यह्रास को रोकने के लिए अपने खजानों में झांकने के लिए मजबूर कर रहा है.

भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 96 अरब डॉलर घटा

उदाहरण के लिए, भारत का विदेशी मुद्रा भंडार इस साल 96 अरब डॉलर घटकर 538 अरब डॉलर रह गया है. देश के केंद्रीय बैंक आरबीआई का कहना है अप्रैल से अब तक के वित्तीय वर्ष के दौरान भंडार में आई गिरावट में 67 प्रतिशत का योगदान एसेट वैल्युएशन बदलाव का है. इसका अर्थ है कि शेष गिरावट, भारतीय मुद्रा को आगे बढ़ाने के लिए केंद्रीय बैंक के हस्तक्षेप की वजह से है. रुपये में इस साल डॉलर के मुकाबले करीब 9 प्रतिशत की गिरावट आई है और पिछले महीने यह रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया.

जापान ने निकाले 20 अरब डॉलर

जापान ने 1998 के बाद पहली बार मुद्रा को समर्थन देने के लिए सितंबर में येन की गिरावट को धीमा करने के लिए लगभग 20 अरब विदेशी मुद्रा करियर डॉलर खर्च किए. इसका, इस साल जापान के विदेशी मुद्रा भंडार के नुकसान में लगभग 19% हिस्सा होगा. चेक गणराज्य में मुद्रा हस्तक्षेप ने फरवरी से भंडार को 19% कम किया है. हालांकि गिरावट की भयावहता असाधारण है, लेकिन मुद्राओं की रक्षा के लिए विदेशी मुद्रा भंडार का उपयोग करने की प्रथा कोई नई बात नहीं है. जब विदेशी पूंजी की बाढ़ आती है तो केंद्रीय बैंक डॉलर खरीदते हैं और मुद्रा की वृद्धि को धीमा करने के लिए अपने भंडार का निर्माण करते हैं. बुरे समय में वे इससे पूंजी निकालते हैं.

भारत का भंडार 2017 के स्तर से अभी भी 49% अधिक

ब्लूमबर्ग के मुताबिक, अधिकांश केंद्रीय बैंकों के पास अभी भी हस्तक्षेप जारी रखने के लिए पर्याप्त शक्ति है. भारत में विदेशी मुद्रा भंडार अभी भी 2017 के स्तर से 49% अधिक है, और नौ महीने के आयात का भुगतान करने के लिए पर्याप्त है. हालांकि कुछ केंद्रीय बैंक ऐसे भी हैं, जहां यह भंडार तेजी से ​खत्म हो रहा है. इस साल 42% की गिरावट के बाद, पाकिस्तान का 14 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार तीन महीने के आयात को कवर करने के लिए पर्याप्त नहीं है.

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Explainer: श्रीलंका के आर्थिक संकट की वजह 'विदेशी मुद्रा भंडार', जानें ये क्यों जरूरी है और भारत के पास कितना डॉलर?

Sri Lanka Economic Crisis: पड़ोसी देश श्रीलंका दिवालिया होने की कगार पर आ खड़ा है. उसका विदेशी मुद्रा भंडार कम होता जा रहा है. श्रीलंका कर्ज चुकाने के लिए विदेशी मुद्रा की जरूरत है. भारत ने श्रीलंका को 900 मिलियन डॉलर का कर्ज दिया है.

कारोबार करने के लिए देश को डॉलर की जरूरत होती है. (फाइल फोटो)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 16 जनवरी 2022,
  • (अपडेटेड 16 जनवरी 2022, 9:45 AM IST)
  • श्रीलंका को इस साल 7 अरब डॉलर का कर्ज चुकाना है
  • श्रीलंका पर अकेले चीन का ही 6 अरब डॉलर का कर्ज है

Sri Lanka Economic Crisis: भारत का पड़ोसी श्रीलंका सबसे खतरनाक आर्थिक संकट से जूझ रहा है. श्रीलंका के ऊपर इतना कर्ज हो गया है कि वो 'दिवालिया' होने की कगार पर आ गया है. आर्थिक संकट की वजह से वहां महंगाई आसमान छू रही है. श्रीलंका की इस हालत के पीछे बड़ी वजह जो सामने आ रही है, वो है उसका फॉरेन करेंसी रिजर्व यानी विदेशी मुद्रा भंडार. श्रीलंका के पास अब इतनी विदेशी मुद्रा भी नहीं है कि वो अपनी जरूरत का सामान आयात कर सके.

पिछले साल मार्च में श्रीलंका सरकार ने विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाने के लिए आयात पर प्रतिबंध लगा दिया था. इससे चीनी और ईंधन जैसी जरूरी चीजों की कमी भी हो गई थी. हालांकि, इसका बहुत ज्यादा फर्क नहीं पड़ा. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जुलाई 2019 में श्रीलंका का विदेशी मुद्रा भंडार 7.5 अरब डॉलर का था, जो नवंबर 2021 में घटकर 1.6 अरब डॉलर का रह गया.

श्रीलंका अपना विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाने के लिए मदद मांग रहा है. उसने चीन से भी मदद मांगी है. हालांकि, चीन की ओर से अभी तक मदद नहीं दी गई थी. श्रीलंका ने भारत से भी मदद मांगी थी. भारत की ओर से श्रीलंका को 900 मिलियन डॉलर का कर्ज दिया जा रहा है.

श्रीलंका पर कितना कर्ज?

श्रीलंका के वित्त मंत्री बासिल राजपक्षे (Basil Rajapaksa) ने इस बात को माना है कि उनका देश भारी कर्ज से जूझ रहा है. उन्होंने स्थानीय मीडिया से बात करते हुए कहा था कि श्रीलंका पर चीन, भारत और जापान का कर्ज है.

उन्होंने बताया था कि श्रीलंका को इस साल 7 अरब डॉलर का कर्ज चुकाना है. इसमें से 500 मिलियन डॉलर का कर्ज 18 जनवरी तक देना है. श्रीलंका को अगले 5 साल में 26 अरब डॉलर का कर्ज चुकाना है.

बासिल राजपक्षे प्रधानमंत्री महिंद्रा राजपक्षे (Mahindra Rajapaksa) और राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे (Gotabaya Rajapaksa) के छोटे भाई हैं.

द गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक, श्रीलंका पर चीन का ही 6 अरब डॉलर का कर्ज है. श्रीलंका ने चीन से पहले 5 अरब डॉलर का कर्ज लिया था. बाद में आर्थिक संकट से निकलने के लिए फिर से पिछले साल 1 अरब डॉलर का कर्ज लिया था.

श्रीलंका की ये हालत कैसे हुई?

- श्रीलंका की अर्थव्यवस्था पर्यटन पर काफी हद तक निर्भर है. कोरोना वायरस के चलते पर्यटन बहुत ज्यादा प्रभावित हुआ है. रिपोर्ट के मुताबिक, श्रीलंका की GDP में टूरिज्म और उससे जुड़े सेक्टरों की हिस्सेदारी 10 फीसदी के आसपास है.

- कोरोना के चलते पर्यटकों के न आने से श्रीलंका का विदेशी मुद्रा भंडार कम हुआ है. वर्ल्ड ट्रैवल एंड टूरिज्म काउंसिल की रिपोर्ट बताती है कि महामारी के चलते श्रीलंका में 2 लाख से ज्यादा लोग बेरोजगार हो गए हैं.

विदेशी मुद्रा भंडार इतना जरूरी क्यों?

- कारोबार करने के लिए विदेशी मुद्रा की जरूरत होती है. क्योंकि दुनियाभर में अमेरिकी डॉलर चलता है, इसलिए विदेशी मुद्रा भंडार में अमेरिकी डॉलर ज्यादा होता है. दुनिया का 85 फीसदी कारोबार अमेरिकी डॉलर से होता है. कर्ज भी डॉलर में ही दिया जाता है.

- अगर विदेशी मुद्रा भंडार नहीं होगा तो कारोबार करने में मुश्किल होगी. दूसरे देशों से सामान खरीदने में दिक्कत आ सकती है. कोई भी देश ज्यादा समय तक डॉलर के बिना दूसरी मुद्रा पर सामान नहीं दे पाएगा.

- रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के मुताबिक, दिसंबर 2021 तक भारत के पास 47.07 लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा करियर विदेशी मुद्रा है. मार्च 2021 तक 42.18 लाख करोड़ और मार्च 2020 तक 36.02 लाख करोड़ रुपये विदेशी मुद्रा थी.

जब खाली हो गया था भारत का विदेशी मुद्रा भंडार

- 1990 में भारत पर जबरदस्त आर्थिक संकट आया था. जून 1991 तक भारत का विदेशी मुद्रा भंडार लगभग खाली हो गया था. उसके पास कारोबार करने तक के पैसे नहीं बचे थे.

- भारत की अर्थव्यवस्था बुरी तरह चरमरा गई थी. महंगाई भी जबरदस्त बढ़ गई थी. सरकार ने आयात रोक दिया था. IMF ने भारत को 1.27 अरब डॉलर का कर्ज दिया, लेकिन ये नाकाफी था. हालात ऐसे बन गए थे जिसने भारत को 20 टन सोना गिरवी रखने को मजबूर कर दिया.

- उस समय राजनीतिक अस्थिरता की वजह से भी भारत दिवालिया होने की कगार पर खड़ा हो गया था. जून 1991 में पीवी नरसिम्हा राव प्रधानमंत्री बने. उनकी सरकार में मनमोहन सिंह (Manmohan Singh) वित्त मंत्री बने. मनमोहन सिंह ने कई सारे सुधार किए जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था पटरी पर आई.

विदेशी मुद्रा भंडार में भारी गिरावट, 89.7 करोड़ डॉलर का झटका, 572.978 अरब डॉलर तक पहुंचा कोष

विदेशी मुद्रा भंडार में आई गिरावट का मुख्य कारण विदेशी मुद्रा आस्तियों का घटना है, जो कुल मुद्रा भंडार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

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विदेशी मुद्रा भंडार में भारी गिरावट। (प्रतीकात्मक फोटो)

Foreign Exchange Reserves: देश के विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट आई है। विदेशी मुद्रा भंडार पांच अगस्त को समाप्त सप्ताह में 89.7 करोड़ डॉलर घटकर 572.978 अरब डॉलर रह गया। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने यह जानकारी दी। रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार इससे पहले 29 जुलाई को समाप्त सप्ताह के दौरान, विदेशी मुद्रा भंडार 2.315 अरब डॉलर बढ़कर 573.875 अरब डॉलर रहा था।

पांच अगस्त को समाप्त सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार में आई गिरावट का मुख्य कारण विदेशी मुद्रा आस्तियों का घटना है जो कुल मुद्रा भंडार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

आरबीआई के शुक्रवार को जारी किये गये भारत के साप्ताहिक आंकड़ों के अनुसार समीक्षाधीन सप्ताह में विदेशी मुद्रा आस्तियां (एफसीए) 1.611 अरब डॉलर घटकर 509.646 अरब डॉलर रह गयी।

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डॉलर के संदर्भ में व्यक्त एफसीए में विदेशी मुद्रा भंडार में रखे गए यूरो, पाउंड और येन जैसी गैर-अमेरिकी इकाइयों की सराहना या मूल्यह्रास का प्रभाव शामिल किया जाता है। 5 अगस्त को समाप्त सप्ताह में सोने का भंडार 671 मिलियन डॉलर बढ़कर 40.313 बिलियन डॉलर हो गया।

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के साथ विशेष आहरण अधिकार (एसडीआर) 4.6 करोड़ डॉलर बढ़कर 18.031 अरब डॉलर हो गया। जबकि आईएमएफ में रखे देश का मुद्रा भंडार 3 मिलियन घटकर विदेशी मुद्रा करियर 4.987 बिलियन हो गई, जैसा कि आंकड़ों से पता चलता है।

Forex Reserves: 634 अरब डॉलर के पार पहुंचा विदेशी मुद्रा भंडार, जानें कितना है गोल्ड रिजर्व

प्रतीकात्मक तस्वीर

India Forex Reserves: 14 जनवरी, 2022 को खत्म हुए सप्ताह में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 2.229 अरब डॉलर बढ़कर 634.965 अरब डॉलर पर पहुंच गया.

  • पीटीआई
  • Last Updated : January 22, 2022, 08:23 IST

मुंबई. देश का विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserves/Forex Reserves) 14 जनवरी 2022 को खत्म हुए सप्ताह में 2.229 अरब डॉलर बढ़कर 634.965 अरब डॉलर पर पहुंच गया. भारतीय रिजर्व बैंक यानी आरबीआई (Reserve Bank of India) के शुक्रवार को जारी आंकड़ों में यह जानकारी दी गई है.

इससे पहले 7 जनवरी को खत्म हुए सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार 87.8 करोड़ डॉलर घटकर 632.736 अरब डॉलर हो गया था. इससे पहले 31 दिसंबर, 2021 को खत्म हुए सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार 1.466 अरब डॉलर घटकर 633.614 अरब डॉलर रह गया था. 24 दिसंबर को खत्म हुए सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार 58.7 करोड़ डॉलर घटकर 635.08 अरब डॉलर रह गया था.

1.345 अरब डॉलर बढ़ी एफसीए
आरबीआई के शुक्रवार को जारी साप्ताहिक आंकड़ों के अनुसार 14 जनवरी को खत्म हुए सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार में उछाल आने की वजह कुल मुद्रा भंडार का अहम हिस्सा माने जाने वाले फॉरेन करेंसी एसेट यानी एफसीए (Foreign Currency Assets) और स्वर्ण आरक्षित भंडार में वृद्धि है. रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, सप्ताह के दौरान एफसीए 1.345 अरब डॉलर बढ़कर 570.737 अरब डॉलर हो गया. डॉलर में बताई जाने वाली एफसीए विदेशी मुद्रा करियर में विदेशी मुद्रा भंडार में रखी यूरो, पाउंड और येन जैसी दूसरी विदेशी मुद्राओं के मूल्य में वृद्धि या कमी का प्रभाव भी शामिल होता है.

गोल्ड रिजर्व में भी इजाफा
इसके अलावा रिपोर्टिंग वीक में गोल्ड रिजर्व का मूल्य 27.6 करोड़ डॉलर बढ़कर 39.77 अरब डॉलर गया. रिपोर्टिंग वीक में इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड यानी एमआईएफ (IMF) में देश का एसडीआर यानी स्पेशल ड्राइंग राइट (Special Drawing Rights) 12.3 करोड़ डॉलर बढ़कर 19.22 अरब डॉलर हो गया. आईएमएफ में देश का मुद्रा भंडार भी 3.6 करोड़ डॉलर बढ़कर 5.238 अरब डॉलर हो गया.

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