निवेश के तरीके

मनी मार्केट म्युचुअल फंड

मनी मार्केट म्युचुअल फंड
आइए समझते हैं मनी मार्केट का फंडा

मनी मार्केट म्यूचुअल फंड क्या है ?

मनी मार्केट म्यूचुअल फंड शॉर्ट-रन लिक्विड इन्वेस्टमेंट (MMMF) हैं, जो उच्च गुणवत्ता वाले मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश करते हैं। यह निवेशकों को एक वर्ष तक की अच्छी तरलता के साथ उचित रिटर्न प्रदान करते है।

मनी मार्केट म्यूचुअल फंड कैसे काम करता है?

मुद्रा बाजार के म्यूचुअल फंड (MMMF) का उपयोग कम जरूरतों पड़ने वाली नकदी को प्रबंधित करने के लिए किया जाता है। यह डेब्ट फंड श्रेणी में एक ओपन एंडेड स्कीम होती है, जो केवल नकद या नकद समकक्षों में डील करती है। इन प्रतिभूतियों में एक वर्ष की औसत परिपक्वता होती है; इसीलिए इन्हें मुद्रा बाजार का साधन कहा जाता है।

फंड मनी मार्केट म्युचुअल फंड मैनेजर उच्च गुणवत्ता वाले तरल उपकरणों जैसे ट्रेजरी बिल्स (टी-बिल्स), रेपरचेज अग्रीमेंट्स (रिपोज), कमर्शियल पेपर्स और डिपॉजिट्स सर्टिफिकेट में निवेश करते है। इस फंड का उद्देश्य अनइथल्डर्स (Unitholders) के लिए ब्याज अर्जित करना होता है। फंड का मुख्य उद्देश्य नेट एसेट वैल्यू (एनएवी) में उतार-चढ़ाव को न्यूनतम रखना होता है।

मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट्स के प्रकार

एक निवेशक के रूप में, आपको निम्नलिखित मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट्स के बारे में जानना ज़रूरी होता हैं :

जमा प्रमाणपत्र (सीडी)

ये फिक्स्ड डिपॉजिट अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों द्वारा जमा की जाती है। एफडी और सीडी के बीच एकमात्र अंतर यह होता है, कि आप ये जमा समय अवधि समाप्त होने से पहले सीडी को वापस नहीं ले सकते।

वाणिज्यिक पत्र (सीपी)

ये कंपनियों और अन्य वित्तीय संस्थानों द्वारा जारी किए जाते हैं, जिनकी क्रेडिट रेटिंग उच्च होती है। इन्हें प्रॉमिसरी नोट्स के रूप में भी जाना जाता है, वाणिज्यिक पत्र असुरक्षित उपकरण होते हैं, जिन्हें रियायती दर पर जारी किया जाता है और अंकित मूल्य पर भुनाया जाता है। अंतर निवेशक द्वारा अर्जित रिटर्न है।

ट्रेजरी बिल (टी-बिल)

टी-बिल भारत सरकार द्वारा 365 दिनों तक के शॉर्ट-टर्म धन जुटाने के लिए जारी किए जाते हैं। सरकार की गारंटी के रूप में ये सबसे सुरक्षित साधन माने जाते हैं। रिटर्न की दर, जिसे जोखिम-मुक्त दर के रूप में भी जाना जाता है, अन्य सभी साधनों की तुलना में टी-बिल पर कम होता है।

रिपर्चेज समझौता (सुधार)

यह एक समझौता है जिसके तहत RBI वाणिज्यिक बैंकों को पैसा उधार देता है। इसमें एक ही समय में समझौते की बिक्री और खरीद शामिल होती है।

3. मनी मार्केट म्यूचुअल फंड में किसे मनी मार्केट म्युचुअल फंड निवेश करना चाहिए?

मनी मार्केट फंड मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट्स के एक विविध प्रकार के पोर्टफोलियो को बनाए रखने के माध्यम से शॉर्ट-टर्म आय का उच्चतम स्तर प्रदान करता है। एक वर्ष तक के छोटे निवेश क्षितिज (horizon) वाले निवेशक इन फंडों में निवेश कर सकते हैं।

बचत बैंक खाते में अधिशेष नकद और कम जोखिम श्रमता वाले निवेशक मनी मार्केट फंड में निवेश करते हैं। ये फंड आपको बचत बैंक खाते की तुलना में अधिक रिटर्न देंते हैं। इसमें निवेशक कॉर्पोरेट होने के साथ-साथ खुदरा निवेशक भी हो सकते हैं।

हालाँकि, यदि आपके पास मध्यम से लंबी अवधि का निवेश क्षितिज (horizon) है, तो मुद्रा बाजार निधि एक आदर्श विकल्प नहीं होगा। इसके बजाय, आप डायनेमिक बॉन्ड फंड या संतुलित फंड को चुन सकते हैं, जो आपको अपेक्षाकृत अधिक रिटर्न देता है।

एक निवेशक के रूप में विचार करने के लिए मुख्य बाते

ये फंड ब्याज दर जोखिम, क्रेडिट जोखिम और पुनर्निवेश जोखिम से ग्रस्त (Suffer) होते हैं। फंड मैनेजर उन जोखिम वाली प्रतिभूतियों में निवेश करता है जिनमें डिफ़ॉल्ट की संभावना बहुत कम या ना के बराबर होती है।

रिटर्न

मनी मार्केट फंड आपको बचत खाते की तुलना में अधिक लाभ प्रदान करता है। हालांकि, गारंटीड रिटर्न नहीं होता हैं। नेट एसेट वैल्यू (एनएवी) समग्र ब्याज दर शासन में बदलाव के साथ उतार-चढ़ाव करता है। ब्याज दरों में गिरावट से एक अंतर्निहित (Inherent) परिसंपत्ति की कीमतें बढ़ जाती हैं और अच्छे रिटर्न दे सकती हैं।

व्यय अनुपात से तात्पर्य आपके पोर्टफोलियो के प्रबंधन के लिए मनी मार्केट फंड्स द्वारा ली जाने वाली फीस से होता है। हाल ही में सेबी ने अधिकतम सीमा 1.05% निर्धारित की थी। एक आदर्श कोष वह होता है जो अपने व्यय अनुपात को निम्न स्तर पर रखता है। जैसे ही प्रबंधन (एयूएम) के तहत परिसंपत्तियां बढ़ती हैं, और योजना परिचालन की लागत को कम करती है।

निवेश क्षितिज (Investment horizon)

मनी मार्केट फंड्स शॉर्ट-टर्म निवेश तीन महीने से एक साल तक के बहुत कम समय के लिए उपयुक्त होती हैं। मध्यम अवधि के क्षितिज के लिए, आप डायनेमिक बॉन्ड फंड जैसे अन्य डेब्ट फंडों में निवेश कर सकते हैं।

वित्तीय लक्ष्य

यदि आपको तरलता को बनाए रखते हुए ईएमआई भुगतान करना है या अतिरिक्त नकदी का निवेश करना है, तो आप मनी मार्केट फंड का उपयोग कर सकते हैं। आपके पोर्टफोलियो का एक छोटा सा हिस्सा विविधीकरण के लिए इनमें निवेश किया जा सकता है।

लाभ पर कर

डेब्ट फंड में निवेश आपको कर योग्य पूंजीगत लाभ प्रदान करता है। कर की दर होल्डिंग अवधि पर निर्भर करती है, यानी आप कितने समय तक फंड में निवेश करते हैं। जब आप तीन साल से कम की अवधि के लिए निवेश करते हैं, तो आप एक शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन (एसटीसीजी) बनाते हैं।

लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस (LTCG) तब बनती हैं, जब आप तीन साल या उससे अधिक समय तक निवेशित करते हैं। एसटीसीजी मनी मार्केट फंड से आपकी आय में जुड़ जाता है और आपकी आय स्लैब के अनुसार कर लगाया जाता है। यही आप फंड को 3 साल से ज्यादा रखते हैं तो इंडेक्सेशन के बाद मनी मार्केट फंड्स में LTCG पर 20% की दर से टैक्स लगता है।

मनी मार्केट म्युचुअल फंड में कैसे निवेश करें?

मनी मार्केट फंड्स में परेशानी मुक्त और पेपरलेस निवेश शुरू करने के लिए आप Z fund.in पर निम्न चरणों का उपयोग कर सकते हैं;-

चरण 1: Z fund.in पर एक खाते के लिए साइन अप करें

चरण 2: निवेश राशि और निवेश की अवधि के संबंध में अपना व्यक्तिगत विवरण दर्ज करें

मनी मार्केट म्यूचुअल फंडों के बारे में ये 5 बातें जान लें, होगा फायदा

क्‍या बनाता है अलग?

डेट म्‍यूचुअल फंडों की कई कैटेगरी हैं. मनी मार्केट म्‍यूचुअल फंड उनमें से एक है. ये स्‍कीमें उन लोगों के लिए मुफीद होती हैं जो अपने निवेश के साथ बहुत कम जोखिम लेना चाहते हैं. चूंकि ये स्‍कीमें छोटी अवधि के इंस्‍ट्रूमेंट में पैसा लगाती हैं. इसलिए इन पर अर्थव्‍यवस्‍था में ब्‍याज दर में होने वाले बदलाव का ज्‍यादा असर नहीं पड़ता है. मनी मार्केट इंस्‍ट्रूमेंट के साथ कम जोखिम होने के कारण भी इनमें निवेश अपेक्षाकृत सुरक्षित होता है. आइए, यहां इनके बारे में कुछ जरूरी बातों को जानते हैं.

Money Market Fund: जानते हैं आप, क्या होता है मनी मार्केट फंड?

किसी निवेशक (Investor) को हमेशा अपनी जोखिम ले सकने की क्षमता (Risk bearing capacity) और वित्तीय जरूरतों (Financial Needs) के लिहाज से निवेश (Invest) करना चाहिए। मनी मार्केट फंड (Money Market Fund) ऐसे निवेशकों के लिए उपयुक्त हैं जो थोड़ा कम जोखि‍म (Low Risk) चाहते हैं।

आइए समझते हैं मनी मार्केट का फंडा

आइए समझते हैं मनी मार्केट का फंडा

हाइलाइट्स

  • जो निवेशक कम जोखिम चाहते हैं, उनके बीच मनी मार्केट फंड तेजी से लोकप्रिय हो रहा है
  • मनी मार्केट वित्तीय बाजार का ही हिस्सा है, जहां बेहद शार्ट टर्म के इंस्ट्रुमेंट में डीलिंग होती है
  • मनी मार्केट के इंस्ट्रुमेंट की परिपक्वता अवधि एक साल से कम की होती है
  1. मनी मार्केट फंड में निवेश की अवधि क्या हो?
    मनी मार्केट फंड अन्य सभी डेट योजनाओ में यह घोषि‍त लक्ष्य रखते हैं कि वे प्राथमिक रूप से मनी मार्केट साधनों में निवेश करेंगे। फंड मैनेजर एक साल तक की परिपक्वता अवधि‍ वाले साधनों में निवेश का लचीलापन रखते हैं, यह प्रचलित बाजार दर और क्रेडिट स्प्रेड के माहौल पर निर्भर करता है। अब चूंकि ये साधन एक साल तक की परिपक्वता वाले साधनों में निवेश करते हैं, इसलिए आपको इन फंडों के लिए न्यूनतम एक साल मनी मार्केट म्युचुअल फंड की निवेश अवधि‍ रखनी चाहिए।
  2. प्राथमिक रूप से मनी मार्केट साधनों में निवेश करने वाले म्यूचुअल फंड कौन हैं?
    सभी डेट म्यूचुअल फंड मनी मार्केट साधनों में निवेश करते हैं, लेकिन कुछ श्रेणी के डेट म्यूचुअल फंड प्राथमिक रूप से मनी मार्केट साधनों में निवेश करते हैं। ओवरनाइट फंड: ये फंड ऐसे साधनों में निवेश करते हैं जो कि एक रात भर में परिपक्व हो जाते हैं।लिक्विड फंड: लिक्व‍िड फंड ऐसे साधनों में निवेश करते हैं जो कि 91 दिन से कम में परिपक्व हो जाते हैं।अल्ट्रा-शॉर्ट ड्यूरेशन फंड: ये फंड ऐसे साधनों में निवेश करते हैं, जिससे उनके पोर्टफोलियो की अवधि‍ 3 से 6 महीने रहती है।मनी मार्केट फंड: ये फंड ऐसे साधनों में निवेश करते हैं जिनकी परिपक्वता अवधि‍ एक साल तक होती है।
  3. मनी मार्केट फंडों में क्यों निवेश करें?
    उच्च तरलता - इनमें निहित साधनों की परिपक्वता अवधि‍ बहुत कम होती है। ये फंड आमतौर पर एग्जिट लोड चार्ज नहीं करते।ब्याज दर से जुड़ा जोखिम कम- मनी मार्केट साधनों में लंबी अवधि‍ के साधनों की तुलना में ब्याज दर की संवदेनशीलता (जोखि‍म) कम होती है।ओवरनाइट और लिक्व‍िड फंडों के मुकाबले ऊंचा यील्ड -मनी मार्केट फंडों का यील्ड ओवरनाइट और लिक्विड फंडों के मुकाबले ज्यादा होता है।मौजूदा हालत में शॉर्ट टर्म निवेश के लिए उपयुक्त- कमोडिटी की कीमतों में अनिश्चितता की वजह से महंगाई की दिशा अनिश्चित ही रहती है। इसलिए लांग टर्म के यील्ड आगे और सख्त हो सकते हैं। लेकिन एक दिन से एक साल के भीतर के यील्ड तुलनात्मक रूप से कम जोखि‍म वाले और कम स्थायित्व वाले होते हैं।
  4. एसेट के आवंटन में मनी मार्केट फंड की भूमिका
    अपने फिक्स्ड इनकम वाले साधनों की विविधता के लिए आपको विभिन्न पोर्टफोलियो के सभी तरह के डेट फंडों में विवेकपूर्ण तरीके से एसेट आवंटन करना होगा। अलग-अलग अवधि‍ में आवंटन आपके जोखिम प्रोफाइल और वित्तीय लक्ष्य पर निर्भर करेगा - शॉर्ट टर्म, मीडियम टर्म और लॉन्ग टर्म। मनी मार्केट फंड शॉर्ट टर्म के वित्तीय लक्ष्यों के लिए उपयुक्त होते हैं जैसे एक या दो साल की अवधि। कम जोखिम चाहने वाले निवेशक भी लंबी निवेश अवधि‍ के साथ ऐसे फंडों में निवेश कर सकते हैं। निवेशक किसी मनी मार्केट फंड में सिस्टमेटिक इनवेस्टमेंट प्लान (SIP) द्वारा भी निवेश कर सकते हैं। एसआईपी द्वारा निवेश करने से आपको अपनी खरीद मूल्य को औसत करने (रूपी कॉस्ट एवरेजिंग) के लिए एनएवी में उतार-चढ़ाव का फायदा भी मिलता है।
  5. मनी मार्केट फंड में निवेश करने से पहले किन बातों पर गौर करें?
    आपको हमेशा अपनी जोखिम ले सकने की क्षमता और वित्तीय जरूरतों के लिहाज से निवेश करना चाहिए। मनी मार्केट फंड ऐसे निवेशकों के लिए उपयुक्त हैं जो थोड़ा कम जोखि‍म चाहते हैं। इसमें निवेश करते समय निवेशकों को रिटर्न के बारे में तार्किक उम्मीदें ही रखनी चाहिए। वैसे तो ये फंड तुलनात्मक रूप से ब्याज दरों की कम जोखि‍म वाले होते हैं, लेकिन ब्याज दर की हालत के हिसाब से कुछ उतार-चढ़ाव हो सकता है। निवेशकों को किसी योजना की अवधि‍ प्रोफाइल को देखना चाहिए और अपनी जोखि‍म लेने की क्षमता के आधार पर निवेश करना चाहिए।

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क्‍या होते हैं मनी मार्केट फंड? कौन कर सकता है निवेश?

मनी मार्केट म्यूचुअल फंड विभिन्न वित्तीय साधनों के माध्यम से शोर्ट टर्म इंवेस्ट पर अच्छा रिटर्न प्रदान करता है. आप इसमें एक वर्ष तक निवेश कर सकते हैं.

  • Paurav Joshi
  • Publish Date - November 18, 2021 / 01:13 PM IST

क्‍या होते हैं मनी मार्केट फंड? कौन कर सकता है निवेश?

शॉर्ट टर्म होने के कारण अर्थव्‍यवस्‍था में ब्‍याज दर में होने वाले बदलाव का ज्‍यादा असर नहीं पड़ता है

मनी मार्केट फंड (Money Market Fund) म्‍यूचुअल फंड की एक कैटेगरी है. मनी मार्केट (Money Market) म्यूचुअल फंड को लिक्व‍िड फंड भी कहते हैं. इसमें कंपनी निवेशकों से लिया हुआ पैसा सुरक्ष‍ित व शॉर्ट-टर्म स्कीम में लगाती हैं, जैसे ट्रेजरी बिल, सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट, कमर्शियल पेपर, रीपर्चेज एग्रीमेंट इत्‍यादि. ऐसे निवेश एक साल से भी काम समय में मैच्योर हो जाते हैं, इसमें 91 दिन या फिर उससे भी कम समय के लिए निवेश होता है. इसके साथ ही किसी आपातकालीन स्थिति में आप अपना पूरा पैसा भी निकाल सकते हैं. इस में एक्जिट लोड भी कम रहता है.

कौन कर सकता है निवेश

मनी मार्केट म्यूचुअल फंड विभिन्न वित्तीय साधनों के माध्यम से शोर्ट टर्म इंवेस्ट पर अच्छा रिटर्न प्रदान करता है. आप इसमें एक वर्ष तक निवेश कर सकते हैं. ऐसे लोग, जिनके पास बचत खाते में ठीक-ठाक पैसा है और कम जोखिम पर उच्च रिटर्न चाहते हैं इसमें निवेश कर सकते हैं. यह फंड आपको बचत खाते की तुलना में अधिक रिटर्न देगा. लिक्विड फण्ड में आपको कम से कम 8 से 10 प्रतिशत सालाना की दर से या उससे अधिक ब्‍याज प्राप्‍त हो सकता है, क्‍योंकि लिक्विड फण्ड के अन्‍तर्गत आपके इन्वेस्ट्मन्ट का ज्‍यादातर हिस्‍सा सरकारी सिक्युरटीज़ और बॉन्ड्स में निवेश किया जाता है. यदि आप लंबी अवधि के लिए निवेश करना चाहते हैं, तो मनी मार्केट फंड (Money Market Fund) आपके लिए बेहतर नहीं है. लंबी अवधि के लिए आप डायनेमिक बांड फंड और बैलेंस फंड का उपयोग कर सकते हैं.

निवेश करने के फायदे

इसमें निवेश करने का मुख्य लाभ यह है कि ये अन्य निवेश विकल्पों जैसे कि इक्विटी आदि की तुलना में अधिक सुरक्षित होते हैं तथा इनमें अच्छा रिटर्न मिलने की संभावना रहती है. निवेशक इसमें कम अवधि के लिए भी निवेश कर सकते हैं तथा निवेशित पैसे को कभी भी निकाल सकते हैं. शॉर्ट टर्म होने के कारण अर्थव्‍यवस्‍था में ब्‍याज दर में होने वाले बदलाव का ज्‍यादा असर नहीं पड़ता है.

इन बातों का रखें ध्यान

निवेशकों को सबसे पहले विभिन्न प्रकार के मनी मार्केट म्यूचुअल फंड्स की विशेषताओं और जोखिमों के बारे में जानकारी होनी चाहिए. डेट फंडों के साथ जो जोखिम होते हैं, वे इनके साथ भी जुड़े होते हैं. यानी क्रेडिट रिस्‍क, इंटरेस्‍ट रेट रिस्‍क इत्‍यादि का जोखिम इनमें होता है.

निवेश किस उद्देश्य से किया जा रहा है उसे याद रखें और फंड चुनने से पहले देखे कि यह आपके उद्देश्य को पूरा करता है या नहीं.

हमेशा अच्‍छे ट्रैक रिकॉर्ड वाले म्‍यूचुअल फंड को चुनना चाहिए. फंड मैनेजर की निवेश रणनीति को भी देख लेना चाहिए. निवेश से पहले एक्‍सपेंस रेशियो को भी देख लें.

कैसे लगता है टैक्‍स?

मनी मार्केट फंडों पर डेट स्‍कीमों की तरह टैक्‍स लगता है. यानी अगर आप तीन साल से पहले निवेश को बेचते हैं तो रिटर्न आपकी इनकम के साथ जुड़ता है. फिर इस पर उसी हिसाब से टैक्‍स लगेगा जिस टैक्‍स स्‍लैब में आप आते हैं. अगर आप तीन साल के बाद निवेश को बेचते हैं तो इंडेक्‍सेशन बेनिफ‍िट के साथ लॉन्‍ग-टर्म कैपिटल गेंस टैक्‍स लगता है.

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