निवेश के तरीके

क्रिप्टो करेंसी पर प्रतिबंध नहीं

क्रिप्टो करेंसी पर प्रतिबंध नहीं
अल सल्वाडोर में लीगल टेंडर बन चुका है बिटकॉइन
एक ओर जहां कई देश क्रिप्टोकरेंसी को लेकर अभी फैसला नहीं कर पा रहे हैं, वहीं मध्य अमेरिकी देश अल सल्वाडोर ने सितंबर माह में क्रिप्टोकरेंसी बिटकॉइन को कानूनी रूप से स्वीकार कर लिया था। अल सल्वाडोर में अब वित्तीय लेनदेन के लिए बिटकॉइन का भी इस्तेमाल हो सकेगा यानी बिटकॉइन वहां पर लीगल टेंडर बन चुका है। ऐसा करने वाला अल सल्वाडोर दुनिया का पहला देश है।

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Supreme Court ने कहा- Bitcoins वैध हैं क्रिप्टो करेंसी पर प्रतिबंध नहीं या अवैध, इस पर अपना रुख स्पष्ट करे सरकार

By: IANS एजेंसी | क्रिप्टो करेंसी पर प्रतिबंध नहीं Updated at : 25 Feb 2022 01:50 PM (IST)

Edited By: Meenakshi

Bitcoin: सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने केंद्र सरकार से आज कहा है कि वह बिटकॉइन (Bitcoin) पर अपना रुख स्पष्ट करे कि यह वैध हैं या अवैध. मौजूदा समय में देश में क्रिप्टोकरेंसी (Cryptocurrency) के इस्तेमाल पर कोई प्रतिबंध नहीं है और न ही इनका कोई नियमन (Regulator) है. जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस सूर्य कांत की दो सदस्यीय खंडपीठ ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्य भाटी को कहा, 'आपको अपना रुख स्पष्ट करना होगा.'

87,000 बिटकॉइन से जुड़ा है मामला
खंडपीठ केंद्र सरकार के खिलाफ अजय भारद्वाज द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी. वकील शोएब आलम ने भारद्वाज की मंजूर की गयी जमानत याचिका खारिज करने की मांग की. ऐश्वर्य भाटी ने खंडपीठ को बताया था कि यह मामला 87,000 बिटकॉइन से जुड़ा है और आरोपी जांच में सहयोग नहीं कर रहा है और उसे कई समन भेजे गये हैं. मामले की सुनवाई कर रहे जजों ने आरोपी को जांच अधिकारी से मुलाकात करने का निर्देश दिया और जांच में सहयोग करने के लिये कहा.

क्रिप्टोकरेंसी: कहीं बैन तो कहीं बनी लीगल टेंडर…क्या चीन की राह पर है भारत!

बिजनेस डेस्कः क्रिप्टो करेंसी को लेकर मोदी सरकार एक्शन के मूड में है। संसद के आगामी शीतकालीन सत्र में इसे लेकर सरकार बिल लेकर आ रही है। जिसमें प्राइवेट क्रिप्टो करेंसी पर बैन लगाने से लेकर इसके लिए नियम भी बनाए जा सकते हैं। इस विधेयक का नाम ‘द क्रिप्टोकरेंसी एंड रेगुलेशन ऑफ ऑफिशियल डिजिटल करेंसी बिल, 2021’ है। देश में बड़ी संख्या में लोगों ने बिटकॉइन जैसी कई क्रिप्टो करंसी में बड़ी मात्रा में निवेश किया हुआ है। मोदी सरकार के ताजा फैसले का असर क्रिप्टो करेंसी में निवेश करने वाले लाखों लोगों पर पड़ सकता है। हालांकि यह मांग भी है कि अंतर्निहित तकनीक और इसके उपयोगों को बढ़ावा देने के लिए कुछ अपवादों को अनुमति दी जाए।

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क्या पूरी तरह से क्रिप्टोकरेंसी पर बैन पॉसिबल है

इसे सीधे शब्दों में समझें तो डिजिटल करेंसी पर पूरी तरह से बैन लगाना संभव नहीं है, क्योंकि बैन के बाद भी लोग इसे एक दूसरे के साथ शेयर कर सकते हैं. दरअसल क्रिप्टोकरेंसी सिंपल कंप्यूटर कोड के पीस होते हैं, जिसे बैन क्रिप्टो करेंसी पर प्रतिबंध नहीं नहीं किया जा सकता. हां, लेकिन यह जरूर है कि इस पर एक रेगुलेटरी बैन लगाया जा सकता है. जिसकी वजह से मेंन स्ट्रीम यूजर्स को क्रिप्टो में ट्रेड करने में दिक्कत आएगी. एक बात यह भी है कि सरकार हो सकता है क्रिप्टो को एक करेंसी के रूप में बैन करे और इसे एक ऐसेट के रूप में लागू रख सकती है.

संभव यह भी है कि भारत सरकार शीतकालीन सत्र में क्रिप्टो करेंसी पर प्रतिबंध नहीं प्राइवेट क्रिप्टोकरेंसीज पर बैन लगा कर आरबीआई द्वारा रेगुलेट डिजिटल करेंसी लॉन्च करे, जिस पर आरबीआई और केंद्रीय संस्थाएं अपना होल्ड बनाए रखें और उस पर जनता को ट्रेड करने का अवसर प्रदान करे. क्रिप्टोकरेंसी पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने को लेकर जो सबसे बड़ी समस्या आएगी वह यह है की वर्तमान समय में इस करेंसी में भारत के 15 से 20 मिलियन लोगों ने इन्वेस्ट कर रखा है, इन सभी की होल्डिंग मिला दी जाए तो यह लगभग 40 हजार करोड़ के आसपास है. इसलिए आने वाले समय में सरकार को बेहद सोच समझकर इस आभासी मुद्रा पर फैसले लेने होंगे.

क्रिप्टोकरेंसी बैन हो गई तो इन्वेस्टर्स का क्या होगा

ब्रोकर डिस्कवरी और कंपैरिजन प्लेटफार्म ब्रोकर चूज़र की एक रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर में क्रिप्टो मालिकों की संख्या के मामले में भारत पहले नंबर पर है. इस रिपोर्ट में कहा गया कि दुनिया भर में क्रिप्टो मालिकों की संख्या में अगर भारतीयों के योगदान को देखें तो यह 10.7 करोड़ है. बीते 12 महीनों में कुल ग्लोबल सर्च, स्क्रिप्ट मालिकों की संख्या, ग्लोबल क्रिप्टो एडॉप्शन इंडेक्स और अन्य फैक्टर्स के आधार पर भारत सातवां सबसे ज्यादा क्रिप्टो अवेयर देश है. इन 10 करोड़ भारतीयों ने क्रिप्टोकरेंसी में लगभग 40,000 करोड़ रुपए का निवेश किया है.

सवाल उठता है कि अगर भारत सरकार इन क्रिप्टोकरेंसीज को बैन कर देती है तो फिर इन इन्वेस्टर्स और इनके पैसे का क्या होगा. अगर भारत ने क्रिप्टोकरेंसी बैन होती है तो इन्वेस्टर्स के पास 2 प्राइमरी ऑप्शन बचेंगे. पहला इन्वेस्टर अपनी करेंसी को बेच दे या फिर दूसरा कि अपने क्रिप्टो ऐसैट्स को करेंसी एक्सचेंज वॉलेट में रखें. यानि जो लोग बैन के बाद भी क्रिप्टोकरेंसी को अपने पास रखना चाहते हैं, वह इसे सिर्फ कस्टडी वॉलेट्स में रख सकते हैं.

केंद्र सरकार भारत में प्राइवेट क्रिप्टोकरेंसी पर प्रतिबंध लगाने और आधिकारिक डिजिटल करेंसी बनाने के लिए विधेयक पेश करेगा

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सूची के अनुसार, विधेयक भारत में सभी निजी क्रिप्टोकरेंसी को प्रतिबंधित करने का प्रयास करता है। हालांकि, यह कुछ अपवादों को क्रिप्टोकरेंसी और इसके उपयोग की अंतर्निहित तकनीक को बढ़ावा देने की अनुमति देता है।

यह विधेयक भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी की जाने वाली क्रिप्टो करेंसी पर प्रतिबंध नहीं आधिकारिक डिजिटल करेंसी के निर्माण के लिए एक सुविधाजनक ढांचा तैयार करने का भी प्रयास करता है।

पिछले साल, सुप्रीम कोर्ट ने आरबीआई की एक क्रिप्टो करेंसी पर प्रतिबंध नहीं अधिसूचना को रद्द कर दिया था जिसमें विनियमित संस्थाओं को वर्चुअल करेंसी में लेनदेन करने से रोका गया था। यह राय थी कि प्रतिबंध क्रिप्टो करेंसी पर प्रतिबंध नहीं असंगत हैं।

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Cryptocurrency: इस साल क्रिप्टोकरेंसी के भारत में लीगल टेंडर यानी वैधानिक होने की खूब चर्चाएं थीं। सभी कारोबारी व निवेशक क्रिप्टो करेंसी पर प्रतिबंध नहीं यह जानना चाह रहे थे कि सरकार इस पर मुहर लगाती है या नहीं। इसके चलते आम बजट पर सभी की निगाहें थीं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के आभासी संपत्तियों पर कर लगाने के प्रस्ताव ने भारत में क्रिप्टोकरेंसी की वैधता पर बहस छेड़ दी है। जबकि कई लोगों ने डिजिटल मुद्राओं पर कर लगाने के निर्णय का स्वागत किया है, यह सोचकर कि यह आभासी मुद्राओं को पहचानने का पहला कदम है, सरकार ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि क्या भारत में बिटकॉइन जैसी मुद्राओं को कानूनी निविदा माना जा सकता है। आखिर सरकार ने इस विषय पर अपना पक्ष भी स्‍पष्‍ट कर दिया था। गत 1 फरवरी को पेश केंद्रीय बजट 2022-23 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि इस करेंसी से होने वाली आय पर सरकार कर जरूर लगाएगी लेकिन इसे देश में लीगल टेंडर किया जाना अभी तय नहीं है। हालांकि सरकार ने यह भी साफ कहा था कि इस पर फिलहाल प्रतिबंध नहीं लगाया जाएगा। इसके साथ ही सरकार ने इस आभासी डिजिटल संपत्ति के हस्तांतरण से होने वाली आय पर 30 प्रतिशत कर लगाने का भी प्रस्ताव रखा था। जानिये इसके बारे में कुछ खास बातें।

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