निवेश के तरीके

Swing Trading क्या है फायदे और नुकसान

Swing Trading क्या है फायदे और नुकसान

Share Market Ke Fayde Aur Nuksan | शेयर बाजार के फायदे और नुकसान

Share Market Ke Fayde Aur Nuksan | शेयर बाजार के फायदे और नुकसान , नमस्कार दोस्तों स्वागत है आप सभी का एक बार फिर हमारी Website Be RoBoCo में , आज एक बार हम फिर हाजिर हैं आपके लिए एक महत्वपूर्ण जानकारी को लेकर जिसे हम Share Market Ke Fayde Aur Nuksan | शेयर बाजार के फायदे और नुकसान के नाम से जानते हैं।

दोस्तो क्या आपने भी शेयर बाजार में लाभ के टोटके , शेयर बाजार में नुकसान से बचने के टिप्स , Advantage Of Share Market और Disadvantage Of Share Market In Hindi आदि के बारे में Search किया है और आपको निराशा हाथ लगी है ऐसे में आप बहुत सही जगह आ गए है , आइये Benefits Of Share Market, Share Market Ke Nuksan, Share Market Me Nuksan Kaise Hota Hai और Top 10 Mistakes In Share Market ​आदि के बारे में बुनियादी बाते जानते है।

दोस्तो किसी भी Business Model को अच्छी तरह से समझने के लिए आपके लिए सिक्के के दोनों पहलू को देखना अति आवश्यक है यदि इस देश के सबसे बड़े ब्रोकरेज फर्म की रिपोर्ट की मानें तो करीब करीब 1 साल में 90% से अधिक निवेशक शेयर मार्केट में अपना पैसा गवां देते हैं , ऐसा क्यों होता है ? आखिर क्यों लोग Share Market में नुकसान उठाते है। इन सभी बातों के ऊपर चर्चा इस लेख में हम करने वाले हैं तो लेख के अंत तक बने रहें , चलिए शुरू करते हैं।

Swing trading क्या है? स्विंग Swing Trading क्या है फायदे और नुकसान ट्रेडिंग में स्टॉक सिलेक्शन कैसे करें?

आप चाहें तो mutual funds मे भी निवेश कर सकते हैं परंतु यह सिर्फ एक पुराना तरीका है जिसमें सिर्फ लॉन्ग टर्म में ही लाभ प्राप्त किया जा सकता है। परंतु स्विंग ट्रेडिंग एक ऐसा कारगर विकल्प है जिससे मदद से आप अपने पैसे पर कम समय में अच्छा रिटर्न प्राप्त कर सकते हैं ।

स्विंग ट्रेडिंग इंट्राडे ट्रेडिंग तथा scalping समान ही है परंतु जो इसे अन्य प्रकारों से भिन्न बनाती है वह यह है कि इसमें आपके पास अपने निवेश संबंधी निर्णय को लेने के लिए पर्याप्त समय होता है जिसमें आप अपने तार्किक विश्लेषण के आधार पर निर्णय लेते हैं

आज के इस आर्टिकल में हम स्विंग ट्रेडिंग क्या है तथा उससे संबंधित विषयों के बारे में अध्ययन Swing Trading क्या है फायदे और नुकसान करेंगे ।

Table of Contents

Swing trading क्या है?

Swing trading, trading एक ऐसा प्रकार है जिसमें किसी कंपनी के शेयर को 1 दिन से अधिक समय के लिए खरीदा जाता है शेयर को खरीदने से लेकर बेचने की अवधि 1 दिन से लेकर कुछ हफ्तों तक के लिए हो सकती है।

यह ट्रेडिंग मार्केट में short term gain तथा medium term gains के लिए की जाती है यह ट्रेडिंग का एक ऐसा रूप होता है जिसमें ट्रेडिंग एक तय समय के लिए की जाती है स्विंग ट्रेडिंग मे इस तय समय में हुए मार्केट में शेयर के प्राइस मूवमेंट से लाभ प्राप्त किया जाता है।

स्विंग ट्रेडिंग कम समय में ज्यादा प्रभावी होती है क्योंकि जहां एक तरफ निवेशकों को अपने निवेश पर 15 से 20 प्रतिशत रिटर्न अर्जित करने के लिए 1 साल या उससे अधिक का समय देना होता है वही एक स्विंग ट्रेडर का उद्देश्य कम समय में अच्छे लाभ कमा कर अपने लक्ष्यों की पूर्ति करना होता है क्योंकि स्विंग ट्रेडिंग की मदद से आप हफ्ते मैं अच्छा रिटर्न पा सकते हैं।

इस ट्रेडिंग का उपयोग कोई भी आम व्यक्ति लॉयर डॉक्टर, बिजनेसमैन ,आर्किटेक्ट या कोई भी व्यक्ति जो किसी भी प्रकार की जॉब करता है वह कर सकता है।

इस ट्रेडिंग की मदद से आप शॉर्ट टर्म Swing Trading क्या है फायदे और नुकसान में शेयर के प्राइस मूवमेंट से पैसे कमा सकते हैं जिसमें टेक्निकल एनालिसिस का उपयोग करके आप शेयर के प्राइस मूवमेंट का पता लगाकर यह अनुमान लगा सकते हैं कि आने वाले समय में किसी शेयर में कितनी वृद्धि हो सकती है।

Swing trading में stock selection कैसे करें?

स्विंग ट्रेडिंग अन्य ट्रेडिंग के सिद्धांतों पर ही कार्य करती है ।परंतु इसमें व्यक्ति के पास अपने निर्णय लेने हेतु समय होता है। जिससे वह अपने नुकसान को सीमित कर सकता है। जिस प्रकार अन्य ट्रेडिंग प्रकारों में लाभ तथा हानि दोनों हो सकती हैं उसी प्रकार इसमें भी जोखिम रहता है। इसलिए यदि आप अच्छी तरह से स्टॉक का चयन करें तो आप अपने नुकसान को कम तो कर ही सकते हैं ।साथ ही साथ अपने लाभ की संभावना को बढ़ा सकते हैं।

स्टॉक चयन करते समय निम्न बातों का ध्यान रखना आवश्यक है।

मौलिक विश्लेषण

सर्वप्रथम किसी कंपनी के स्टॉक के चयन हेतु आपके पास उस कंपनी के विषय में कुछ मौलिक विश्लेषण होने चाहिए जैसे कि उस Swing Trading क्या है फायदे और नुकसान कंपनी का वैल्यूएशन कितना है वह कंपनी किस क्षेत्र में कार्यरत है तथा इससे पहले उसने कैसा कार्य किया है।

लिक्विडिटी

स्विंगट्रेडिंग करने से पहले आपको उसकी तरलता यह लिक्विडिटी के बारे में जान लेना चाहिए यदि उस शेयर की लिक्विडिटी अच्छी है तो आप कम समय में उससे अच्छा रिटर्न कमा पाएंगे।

ट्रेंड व मार्केट चाल

स्विंग ट्रेड करते समय आपको टेक्निकल एनालिसिस की आवश्यकता होती है जिसकी मदद से आप उस कंपनी के पुराने डाटा के आधार पर आने वाले समय में उस शेयर में होने वाले बदलाव का अनुमान लगा सकते हैं इसके आधार पर आपको उसके ट्रेंड शेयर की औसत चाल तथा उसके प्राइस मूवमेंट की जानकारी मिल जाएगी।

अन्य स्टॉक के साथ तुलना

किसी कंपनी को चयन करने से पहले आपको उस कंपनी के सेक्टर की अन्य कंपनियों के साथ उसकी तुलना करनी चाहिए जिससे आपको शेयर की जानकारी अच्छी तरीके से हो सके।

स्विंग ट्रेडिंग के लिए किस टाइम फ्रेम का उपयोग करें?

मार्केट में स्विंग ट्रेडिंग करने से पहले आपको यह ध्यान रखने की आवश्यकता है कि इसका समय काल 1 दिन से कुछ हफ्ते तक का होता है अतः आपको इसके विश्लेषण हेतु टाइम फ्रेम की आवश्यकता होती है। जिससे आप उसका सटीक आंकलन करके लाभ प्राप्त कर सकें।

चार्ट का अध्य्यन मे आपको मार्केट का विस्तृत आंकलन करने की आवश्यकता होती है इसके लिए आप चार्ट के weekly टाइम फ्रेम या day time frame का उपयोग कर सकते हैं साथ ही ट्रेडिंग की प्लानिंग हेतु 1घंटे या 4घंटे के टाइम फ्रेम का उपयोग कर सकते हैं।

स्विंग Swing Trading क्या है फायदे और नुकसान ट्रेडिंग करते समय एंट्री और एग्जिट कहां करें?

यदि आपको स्विंग ट्रेडिंग से लाभ प्राप्त करना है तो आपको सही समय पर शेयर में एंट्री करने की आवश्यकता होती है।यह तय करने हेतु आपको मार्केट में विभिन्न रणनीतियां का उपयोग करना है। तथा किसी की सहायता से आप अपना लाभ भी तय कर सकते हैं।

Support and resistance

शेयर बाजार में सपोर्ट और रेजिस्टेंस बहुत महत्वपूर्ण होते हैं ।क्योंकि सपोर्ट मार्केट में खरीदारी को प्रदर्शित करता है ।अर्थात यहां खरीदारी का ज्यादा दबाव होता है ।तथा रेजिस्टेंस सप्लाई को अर्थात् बिकवाली को प्रदर्शित करता है तो यदि आप किसी शेयर मे एंट्री लेते हैं तो आप यह सपोर्ट एंड रेजिस्टेंस की सहायता से कर सकते हैं।यदि मार्केट कहीं स्ट्रांग सपोर्ट बना रहा है तो आप वहां छोटे स्टॉपलॉस के साथ एंट्री लेने की योजना बना सकते हैं तथा रेजिस्टेंस पर उसको बेच सकते हैं।

मूविंग एवरेज

मूविंग एवरेज मार्केट की औसत चाल को बताने का कार्य करता है चार्ट के तकनीकी विश्लेषण में 21,33,50 ,100,एवं 200 मूविंग एवरेज का उपयोग किया जाता है। यह मार्केट के पिछले कुछ दिनों की औसत चाल के अनुसार आपको भविष्य में आने वाले उतार चढ़ाव का डाटा बताता है।इसकी सहायता से आप अपनी एंट्री की योजना बना सकते हैं।

इंडिकेटर का उपयोग

मार्केट में कई तरह के इंडिकेटर उपलब्ध हैं जो आपको मार्केट की भिन्न-भिन्न दशाओं से अवगत कराते हैं आप इन इंडिकेटर्स का उपयोग करके प्रवेश करने तथा बाहर निकलने की रणनीति को बना सकते हैं।

स्विंग ट्रेडिंग मार्केट में कम समय में निवेश करके मुनाफा कमाने हेतु कारगर है। परंतु यदि आपस में सफल होना चाहते हैं तो आपको इसे सावधानी के साथ रिस्क मैनेजमेंट की सहायता से करना चाहिए। क्योंकि यदि आपको अपने लाभ के साथ-साथ अपने नुकसान के बारे में भी पता रहेगा तो आप मार्केट में होने वाले उतार-चढ़ाव से अपनी भावनाओं को नियंत्रित कर सकेंगे।

स्विंग ट्रेडिंग Vs लांगटर्म इन्वेस्टमेंट

स्विंग ट्रेडिंग, इंट्राडे ट्रेडिंग से भिन्न है जहां इंट्राडे ट्रेडिंग में आपको ब्रोकर द्वारा मार्जिन मनी प्राप्त होती है तथा उसी दिन आपको शेयर खरीद कर मार्केट बंद होने से पहले बेचकर बाहर निकलना होता है। किसी भी हालत में आप अपने सौदे को अगले दिन तक नहीं ले जा सकते हैं।

स्विंग ट्रेडिंग, लांगटर्म ट्रेडिंग की भांति ही होती है इसमें ब्रोकर द्वारा मार्जिन प्राप्त नही होता है। लांगटर्म की भांति आप स्विंग ट्रेडिंग के लिए जितने शेयर खरीदते हैं उनका पूरा पैसा आपको अदा करना होता है।

स्विंग-ट्रेडिंग-Vs-लांगटर्म-इन्वेस्टमेंट

जब एक बार आप शेयर खरीद लेते हैं तो यह पूरी तरह आप पर ही निर्भर करता है कि आप उसे कब बेचते हैं, यदि आप इसे कुछ दिनों, कुछ हफ़्तो या कुछ महीनों में बेचकर अपना प्रॉफिट बुक कर लेते हैं तो यह स्विंग ट्रेडिंग कहलाता है।

लेकिन यदि आप स्विंग ट्रेडिंग को आधार बनाकर ही ट्रेडिंग करते हैं तो कुछ मामलों में यह लांगटर्म इन्वेस्टमेंट से भिन्न हो जाता है। क्योंकि लांगटर्म इन्वेस्टमेंट और स्विंग ट्रेडिंग के लिए अलग-अलग रणनीतियां बनानी होती हैं।

मुख्यतः स्विंग ट्रेडिंग के लिए किसी कंपनी का फंडामेंटल अधिक मायने नहीं रखता है बल्कि यहां टेक्निकल एनालिसिस ज्यादा कारगर होता है। टेक्निकल एनालिसिस द्वारा ही अपना छोटा छोटा लक्ष्य निर्धारित किया जाता है और लक्ष्य मिलते ही शेयर बेचकर बाहर निकल जाया जाता है।

स्विंग ट्रेडिंग में मुख्यतः कुछ दिनों, कुछ हफ्तों या एक दो महीने का ही लक्ष्य निर्धारित किया जाता है।

संक्षेप में हम कह सकते हैं कि कम समय मे छोटे-छोटे प्रॉफिट के लिए निवेश करना ही स्विंग ट्रेडिंग कहलाता है।

लेकिन स्विंग ट्रेडिंग के लिए स्टॉक का चयन काफी सटीक होना चाहिए वरना प्रॉफिट बना पाना असंभव होता है।

लांगटर्म इन्वेस्टमेंट ( Long-Term Swing Trading क्या है फायदे और नुकसान Investment )

लांगटर्म इन्वेस्टमेंट में किसी शेयर को खरीदने की वही प्रक्रिया होती है जो स्विंग ट्रेडिंग में होती है फर्क सिर्फ इतना है कि स्विंग ट्रेडिंग में जब कोई शेयर खरीदा जाता है तो उसका एक छोटा सा लक्ष्य निर्धारित कर के कुछ दिनों या कुछ हफ्तों में उस शेयर को बेच दिया जाता है।

वही लांगटर्म के लिए जो शेयर खरीदा जाता है लंबे समय के निवेश को लक्ष्य बनाकर खरीदा जाता है यह समय 2- 4 वर्ष का भी हो सकता है 10- 20 वर्ष का या इससे भी अधिक हो सकता है।

लांगटर्म में निवेश करके शेयर बाजार से काफी बड़ा प्रॉफिट बनाया जाता है क्योंकि यहां निवेशक को ‘पावर आफ कंपाउंडिंग’ का लाभ प्राप्त होता है। जितने लोगों ने शेयर बाजार से Swing Trading क्या है फायदे और नुकसान मोटा पैसा कमाया है लांगटर्म इन्वेस्टमेंट से ही कमाया है।

लांगटर्म निवेश के लिए टेक्निकल एनालिसिस की जरूरत बहुत कम होती है यहां किसी कंपनी के फंडामेंटल को देखकर निवेश किया जाता है।

लांगटर्म में निवेश के लिए एक ही बार किसी अच्छे स्टॉक को चुनना होता है और उसे खरीद कर लंबे समय के लिए अपने पास रख लिया जाता है। जितना अधिक समय बीतता है उतना अधिक फायदा हमें देखने को मिलता है।

लांगटर्म निवेश में अपने समय की बचत तो होती ही है, इसके अलावा बाजार के छोटे-मोटे उतार-चढ़ाव से भी कोई घबराहट नहीं होती है।

निष्कर्ष

लांगटर्म निवेश और स्विंग ट्रेडिंग दोनों ही अपनी अपनी जगह सही है, दोनों में ट्रेड करने का तरीका भी एक ही है।

फर्क सिर्फ इतना है कि किसी को जल्दी जल्दी प्रॉफिट बुक करने में मजा आता है तो किसी को अपने निवेश में पावर आफ कंपाउंडिंग देखने में मजा आता है।

कम समय में छोटा-छोटा लाभ लेना है तो स्विंग ट्रेडिंग बेहतर है, और मल्टीपल लाभ लेना हो तो लांगटर्म निवेश बेहतर है। किंतु दोनों ही परिस्थितियों में स्टॉक का चयन सटीक करना जरूरी है।

Station Guruji

शॉर्ट सेलिंग क्या है और शेयर बाजार में इसे कैसे किया जाता है?

शॉर्ट सेलिंग क्या है?

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यदि आप शेयर बाजार में निवेश करते हैं तो शॉर्ट सेलिंग (Short selling) के बारे में सुने होंगे। आप में से कई लोग शॉर्ट सेलिंग करते भी होंगे। लेकिन शॉर्ट सेलिंग के बारे में पूरी जानकारी नहीं होने के कारण आप इससे अनजान होंगे।

आज मैं आपको शॉर्ट सेलिंग के बारे में पूरी Swing Trading क्या है फायदे और नुकसान जानकारी दे रहा हूं। शॉर्ट सेलिंग क्या होता है? यह किस प्रकार काम करता हैै? Short selling द्वारा प्रत्येक दिन हजारों का मुनाफा कमा सकते हैं।

कुछ दिन पहले मैंने बताया था कि शेयर बाजार में निवेश कैसे करें? फिर इंट्राडे ट्रेडिंग (Intraday Trading) में प्रतिदिन हजार रुपे कैसे कमाए? अच्छा शेयर का चुनाव कैसे करें?

P/E Ratio का क्या महत्व क्या है? इस प्रकार आपको स्टॉक मार्केट का काफी जान हो गया है। अब मैं आपको वह बता रहा हूं जो आप के लिए स्टॉक मार्केट में काफी सहायक सिद्ध होगा।

हम एक दूसरे को कहते हैं कि जब भी हम शेयर खरीदते हैं उसका दाम नीचे आ जाता है। जब भी हम निवेश करने की सोचते हैं शेयर मार्केट नीचे आ जाता है। मैं आपको शॉर्ट सेलिंग के बारे में बता रहा हूं। स्टॉक मार्केट भले ही नीचे गिरे लेकिन शॉर्ट सेलिंग से आप का मुनाफा उपर ही जाएगा।

यदि आप गिरते हुए मार्केट में Intraday Trading करते हो तो आपका नुकसान पक्का है और जानबूझकर नुकसान उठाना कोई भी नहीं चाहता है। शॉर्ट सेलिंग वह तरीका है जिसमें यदि मार्केट नीचे जा रही है तब भी आप निवेश करके अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं। अभी शायद आप मेरी बातों को नहीं समझ रहे हैं। आगे मैं आपको उदाहरण के द्वारा इसे समझा रहा हूं।

शॉर्ट सेलिंग(Short selling) कैसे करें?

शॉर्ट सेलिंग में पहले हम शेयर को बेचते हैं और बाद में उसे खरीदते हैं। आप सोच रहे होंगे जो शेयर मेरे पास है ही नहीं उसे हम कैसे बेंच सकते हैं। इसका जवाब यह है कि आपका ब्रोकर उस कंपनी को विश्वास दिलाता है कि शाम तक आपका शेयर खरीद लेंगे तभी कोई निवेशक शॉर्ट सेल कर पाता है।

आप अभी भी नहीं समझे। इसे एक उदाहरण द्वारा समझते हैं। मान लिया कि अभी टाटा मोटर्स के 1 शेयर के दाम ₹400 है। आपको लगता है कि आज इस शेयर का दाम नीचे जाएगा। आपने टाटा मोटर्स के 50 शेयर ₹ 400 में बेच यानि शॉर्ट सेलिंग कर दिया।

एक घंटा बाद उस शेयर का दाम ₹380 हो गया। फिर आप उनको खरीद लिया। एक शेयर पर ₹20 मुनाफा हुआ। चुकी आप 50 शेयर बेचे थे इसलिए 50 × 20 = 1000 यानी आपको 1 घंटे में ₹ 1000 का मुनाफा हो गया। इसे इंट्राडे शॉर्ट सेलिंग कहते हैं।

इस प्रकार आप किसी भी कम शेयर पहले बेच देंगे और उसके बाद उसे खरीद लेंगे। यदि उसका दाम नीचे आया तो आपको मुनाफा हो जाएगा।

इंन्ट्राडे ट्रेडिंग (Intraday Trading) में मैंने आपको बताया था कि आप किसी भी कंपनी का शेयर खरीद लीजिए जो आपको लगता है इसका दाम ऊपर जाएगा और जब उसका दाम ऊपर चला जाता है आप उसे बेचकर मुनाफा कमा ले है।

शॉर्ट सेलिंग, इंन्ट्राडे ट्रेडिंग (Intraday Trading) का बिल्कुल उल्टा है। पहले इसमें शेयर बेचते हैं और बाद में खरीदते हैं। यह पूरा प्रोसेस आपको उसी दिन करना होता है। 3:30 बजे से पहले पहले आपको पूरी प्रक्रिया कर लेना है।

9:15 के मार्केट खुलता है और 3:30 पर शेयर मार्केट बंद होता है। इस बीच Swing Trading क्या है फायदे और नुकसान में आप इंट्राडे और शॉर्ट सेलिंग दोनों काम पूरे करने होते हैं। यदि आप शॉर्ट सेलिंग करते हैं पहले शेयर बेच दे और जब उसका दाम नीचे आ गया तो उसे खरीद लें।

चुकी शॉर्ट सेलिंग में आपने वह शेयर बेचा है जो आपके डिमैट अकाउंट में था ही नहीं इसलिए आपके अकाउंट में कुछ भी शेयर नहीं आएगा। सिर्फ केवल मुनाफा या नुकसान आपके अकाउंट में आएगा।

शॉर्ट सेलिंग (Short selling) से क्या फायदे हैं?

इस प्रकार आप शॉर्ट सेलिंग समझ गए होंगे। अब आपके मन में यह सवाल उठता होगा कि शॉर्ट सेलिंग से क्या फायदे हैं? शॉर्ट सेलिंग से कई फायदे हैं जो इस प्रकार है-

1. जिस दिन मार्केट नीचे की ओर जा रहा है उस दिन भी आप शॉर्ट सेलिंग द्वारा मुनाफा कमा सकते हैं।

2. कौन सा शेयर ऊपर जाएगा यह अंदाज लगाना मुश्किल है। लेकिन किस शेयर का दाम नीचे जाएगा यह अंदाज लगाना काफी आसान है। इस प्रकार आप शॉर्ट सेलिंग में आसानी से शेयर को चुन सकते हैं।

3. शेयर मार्केट के सेंसेक्स ऊपर जाने के कुछ विशेष कारण नहीं होते लेकिन नीचे जाने की कई कारण होते हैं। जैसे कोरोना महामारी, चीन से तनाव, अमेरिका से संबंध खराब, चक्रवात, मानसून इत्यादि।

इसलिए गिरते मार्केट में मुनाफा कमाने का मूल मंत्र है शॉर्ट सेलिंग हैं।

4. चुकी आपको उसी दिन शॉर्ट सेलिंग में शेयर को बेचना और खरीदना होता है। इसलिए आपको कल की चिंता नहीं करनी पड़ती है कि कल मार्केट ऊपर जाएगा या नीचे आएगा।

5. शॉर्ट सेलिंग में आप को ज्यादा पैसे लगाने की आवश्यकता नहीं होती। आपके अकाउंट में जितना पैसा है उसके 5 से 10 गुना ज्यादा आप शॉर्ट सेलिंग कर सकते हैं।

जैसे आपके अकाउंट में मान लीजिए ₹ 10,000 है तो आप 50,000 से 1,00,000 तक का शॉर्ट सेलिंग कर सकते हैं।

शॉर्ट सेलिंग (Short selling) से नुकसान

जैसा कि आप जानते हैं कि जिस में फायदा है इसमें नुकसान भी होता है। दुनिया की कोई भी काम ऐसा नहीं है जिसमें फायदा ही फायदा है नुकसान नहीं। ठीक उसी प्रकार शॉर्ट सेलिंग Swing Trading क्या है फायदे और नुकसान में भी कुछ नुकसान है।

यदि आपका अनुमान गलत हो गया और शेयर का दाम नीचे आने के बजाय ऊपर चला गया तो आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है। जैसे आपने किसी कंपनी का शेयर ₹ 100 पर शॉर्ट सेल किया।

शाम तक उस शेयर का मूल्य ₹ 100 से ₹ 120 पर पहुंच गया। आपको उस शेयर करो ₹ 120 में बाय करना पड़ेगा। इस प्रकार आपको₹ 20 प्रति शेयर नुकसान उठाना पड़ेगा।

इसके अलावा केई नुकसान है जो इस प्रकार है-

1. कई बार होता है कि जिस कंपनी का शेयर हम Short selling किए हैं दिन के अंत तक खरीद नहीं हो पाता है। क्योंकि उसे कोई खरीदार है ही नहीं। शेयर खरीद नहीं होने के कारण हम डिफॉल्टर के श्रेणी में आ जाते हैं। सेबी द्वारा हम पर जुर्माना लगाया जाता है।

2. बहुत से ऐसे कंपनी है जिसमें शॉर्ट सेलिंग नहीं की जाती है। कई बार हम उस शेयर का चुनाव कर लेते हैं और शॉर्ट सेलिंग नहीं होने के कारण हमें निराशा हाथ आती है।

3. शॉर्ट सेलिंग करने के बाद कई बार उस शेयर में लोअर सर्किट लगा दिया जाता है जिससे हमो उसे शेयर को बेचने में बहुत परेशानी आती है।

4. कई बार अनुमान गलत होने से काफी नुकसान उठाना पड़ता है। चुकी हमें यह काम उसी दिन पूरा करना होता है। इसलिए यदि शेयर को हम इस उम्मीद में शॉर्ट सेलिंग करते हैं कि इसका दाम नीचे जाएगा और यदि दाम उपर चला जाता है तो हमें ना चाहते हुए भी उसे नुकसान पर खरीदने होते है।

5. कई बार शॉर्ट सेलिंग में जानबूझकर कंपनी के शेयर का दाम गिराया जाता है। जिसके कारण मार्केट में उथल पुथल मच जाता है।

क्या हमें शॉर्ट सेल (Short selling) करना चाहिए?

दोस्तों मैं कोई भी सलाह तभी देता हूं जब मैं वह काम स्वयं करता हूं। मैं पिछले 10 सालों से शेयर मार्केट में निवेश करता हूं और वही सलाह आपको देता हूं जो सही है।

शॉर्ट सेलिंग शेयर मार्केट से लाभ कमाने का एक अच्छा तरीका है। भारत में लाखों लोग शॉर्ट सेलिंग करते हैं। लेकिन इसमें कई प्रकार के रिस्क भी हैं। यदि आप जोखिम उठाने के लिए तैयार हो तभी आप Short selling करें।

कई बार इसमें नुकसान भी उठाना पड़ सकता है। निवेश करने से पहले अच्छी तरह जांच पड़ताल कर लें तभी निवेश करें। किसी के कहने और सुनने से कभी भी निवेश ना करें। उतना ही पैसा निवेश करें जितना नुकसान आप सहन कर सकते हैं। कभी भी कर्जा लेकर निवेश ना करें।

स्टेशन गुरुजी

मेरे वेबसाइट का नाम स्टेशन गुरुजी है। मैं मोटिवेशनल कहानी, पढ़ाई लिखाई, वित्तीय जानकारी इत्यादि विषयों पर सच्ची एवं अच्छी जानकारी देता रहता हूं। यह आपके लिए काफी उपयोगी साबित हो सकता है।

आप कभी भी गूगल में जाकर स्टेशन गुरुजी और उसके आगे अपना सवाल लिख दे। आपको उसका जवाब मिल जाएगा। यदि आपके मन में कोई और सवाल हो तो आप मुझे ईमेल कर दे। मैं आपको जवाब देने का प्रयास करूंगा। मेरा ईमेल आईडी है [email protected]

ट्रेडिंग क्या है?

ट्रेडिंग क्या है

ट्रेडिंग की बहुत सारी किस्में भी होती हैं तो आइए हम आपको बताते हैं कि ट्रेडिंग के कितने प्रकार होते हैं:

  • स्काल्पिंग ट्रेडिंग (Scalping Trading)
  • इंट्राडे ट्रेडिंग (Intraday Trading)
  • स्विंग ट्रेडिंग (Swing Trading)
  • पोजीशनल ट्रेडिंग (Positional Trading)

ऊपर दी हुई 4 किस्मों के बारे में हम संक्षेप में बात करते हैं।

स्काल्पिंग ट्रेडिंग (Scalping Trading)

स्काल्पिंग ट्रेडिंग का मकसद होता है मिनटों में पैसा कमाना इसमें ट्रेडर शेयर को कुछ चंद मिनटों (या उससे ज्यादा समय के लिए) के लिए ही खरीदते हैं और स्टॉक मार्केट में इन्हीं शेयर के दाम बढ़ने (या कम होने पर) पर खरीदे गए शेयर को बेचकर मुनाफा कमा लेते हैं। जब कोई भी ट्रेडर ऐसी ट्रेडिंग करता है तो उसे स्काल्पिंग ट्रेडिंग कहते हैं।

ऐसी ट्रेडिंग करने वाले ट्रेडर 1 दिन में 1 से ज्यादा कुछ बार 10-20 से ज्यादा भी ट्रेड करते हैं।

इंट्राडे ट्रेडिंग (Intraday Trading)

इंट्राडे ट्रेडिंग को हम डे ट्रेडिंग भी कहते हैं। इसका मतलब यह है कि ट्रेडर एक ही दिन में शेयर खरीद लेता
है और उसी दिन में अपने शेयर को फायदे या नुकसान में बेच देता है। आसान शब्दों में कहें तो एक ट्रेडर 1 दिन में समान खरीदता है और उसी दिन में अपना सामान बेच देता है।

इसे कहते हैं इंट्राडे ट्रेडिंग। इंट्राडे ट्रेडिंग का मकसद अचानक आई उछाल या गिरावट का लाभ उठाना होता है जिससे ट्रेडर समय रहते ही मुनाफा कमा सके।

इंट्राडे ट्रेडिंग में ट्रेडर हर बार लाभ ही कमाए ऐसा संभव नहीं है ट्रेडर को इसमें नुकसान भी हो सकता है।

ट्रेडिंग में सबसे मुश्किल इंट्राडे ट्रेडिंग होती है इसलिए इसको अच्छी तरह स्टॉक मार्केट सीखने के बाद ही करना शुरू करना चाहिए।

स्विंग ट्रेडिंग (Swing Trading)

स्विंग ट्रेडिंग में अक्सर ट्रेडर शेयर को 1 हफ्ते से लेकर 4 हफ्तों तक अपने पास रखता है और फिर इन शेयर को सेल कर देता है। स्विंग ट्रेडिंग का मुख्य लक्ष्य Swing Trading क्या है फायदे और नुकसान कुछ सप्ताह में शेयर के दाम में आने वाले Swing का लाभ उठाकर जल्द से जल्द लाभ कमाना होता है। इसी को ही स्विंग ट्रेडिंग कहते हैं। इस बात का ध्यान रहे कि इसमें जोखिम भी होता है

पोजीशनल ट्रेडिंग (Positional Trading)

पोजीशन ट्रेडिंग से तात्पर्य है कि इसमें ट्रेडर शेयर खरीदता है और इन शेयरों को लंबे समय के लिए अपने पास
रखता है। ऐसा करने के लिए हर एक ट्रेडर को शेयर अपने पास रखने के लिए शेयर की डिलीवरी अपने डीमैट अकाउंट में लेनी पड़ती है।

ट्रेडर ने जितने शेयर जिस दाम में खरीदे हैं इन शेयरों का मूल्य ब्रोकर को देना पड़ता है ऐसा करने से
उसको डीमैट अकाउंट में सभी शेयर मिल जाते हैं। इसके बाद वह कभी भी अपने शेयर को बेचकर पैसे जुटा
सकता है।

लेकिन इसमें रिस्क भी होता है। क्योंकि अक्सर हम देखते हैं कि शेयर बाजार में किसी अच्छी या बुरी खबर के कारण आने वाले दिनों में बाजार कुछ बहुत ज्यादा ऊपर या बहुत ज्यादा नीचे खुलता हैं। उदाहरण के तौर पर 2020 में स्टॉक मार्केट कोरोना वायरस की वजह से बहुत बुरी तरह से गिरा था।

अक्सर लोगों के मन में आता है कि क्या ट्रेडिंग से रेगुलर इनकम कमाई जा सकती है या नहीं। ऐसा सवाल हर इंसान के मन में आता है तो आइए हम आपको आसान शब्दों में इसकी जानकारी देते हैं।

हर एक इंसान के लिए ट्रेडिंग के जरिए पैसे कमाना संभव है पर यह आसान नहीं होता है क्योंकि जैसा कि हमने ऊपर बताया है कि अगर कोई व्यक्ति शेयर के मूल्य की हर एक छोटी मूवमेंट से अच्छा पैसा कमाना चाहता है तो उसके लिए ज्यादा से ज्यादा शेयर लेने आवश्यक हैं और इसके लिए पैसों की जरूरत बहुत ज्यादा होगी।

पैसों के साथ-साथ हर एक व्यक्ति को जो कि इसमें पैसे लगाते हैं उनको TECHNICAL ANALYSIS की जानकारी होनी भी जरूरी है। तभी हम प्राइस के पैटर्न को समझ सकेंगे और वक्त आने पर शेयर को बेच और खरीद सकेंगे।

ट्रेडिंग में सबसे महत्वपूर्ण बात यह होती है कि लगातार अपनी गलतियों से सीखना क्योंकि जितना ही हम
सीखेंगे उतना हमारा तजुर्बा बढ़ेगा जिससे कि हम Successful Trader ट्रेडर बन सकेंगे। अपनी गलतियों से सीखना और उससे आगे बढ़ना ही सक्सेसफुल ट्रेडर की पहचान होती है।

ट्रेडिंग अकाउंट कैसे खोलते हैं?

ट्रेडिंग अकाउंट खुलवाने के लिए सबसे पहले हमें स्टॉक ब्रोकर के पास जाना पड़ेगा। स्टॉक ब्रोकर हमारा ट्रेडिंग अकाउंट आसानी से खोल सकता है। आज के समय में ट्रेडिंग अकाउंट कर बैठे ऑनलाइन खोला जा सकता है।
नीचे हमने मशहूर स्टॉक ब्रोकर के लिंक दिए हैं जिन पर क्लिक करके आप अपना डिमैट अकाउंट घर से ही 15 मिनट में खोल सकते हैं।

भारत के मशहूर स्टॉक ब्रोकर:

फिर इसके बाद शेयर को बेचने और खरीदने के लिए ट्रेडिंग अकाउंट में पैसे जमा करवाने जरूरी है जिसके लिए हमें ट्रेडिंग अकाउंट के साथ अपना एक बैंक अकाउंट भी लिंक करवाना जरूरी है। क्योंकि अगर हम कभी पैसों की जरूरत हो तो हम ट्रेडिंग अकाउंट में से बैंक अकाउंट में पैसा जमा करवा सकें।

यह जरूरी नहीं है कि हम अपना कोई नया बैंक अकाउंट ही खुलवाएं बैंक में अगर हमारे पास अपना कोई पुराना खाता भी है तो हम उसको भी लिंक करवा सकते हैं। इससे हमारे शेयर का जो Dividend होगा उसके हकदार हम होंगे और उसकी राशि हमारे इसी बैंक अकाउंट में जाएगी।

स्टॉक ब्रोकर क्या होता है?

ट्रेडर या इन्वेस्टर के साथ स्टॉक एक्सचेंज को जोड़ने का काम स्टॉक ब्रोकर करता है। स्टॉक ब्रोकर हमारे स्टॉक
एक्सचेंज के बीच एक कनेक्शन का काम करता है।

Trading अकाउंट खोलने के लिए जो जरूरी डॉक्यूमेंट चाहिए होते हैं वह नीचे लिखे हैं:

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न्यूनतम अंक: 1
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