लाभदायक ट्रेडिंग के लिए संकेत

पेपर ट्रेडिंग के फायदे और नुकसान

पेपर ट्रेडिंग के फायदे और नुकसान
मेटा छंटनी: Facebook की पेरेंट कंपनी Meta ने कुल 11000 कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाने का ऐलान कर दिया है।

शेयर बाजार में क्या है कमोडिटी , जानिए कैसे करते हैं खरीद-बेच, पेपर ट्रेडिंग के फायदे और नुकसान कितना फायदेमंद

कमोडिटी मार्केट निवेशकों के लिए कीमती धातुओं, कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस, ऊर्जा और मसालों जैसी कमोडिटीज में ट्रेड करने की एक जगह होती है। इस समय में, फॉरवर्ड मार्केट कमीशन भारत पेपर ट्रेडिंग के फायदे और नुकसान में करीबन 120 कमोडिटीज के लिए फ्यूचर्स ट्रेडिंग करने की अनुमति देता है। कमोडिटीज में ट्रेडिंग अपने पोर्टफोलियो में विविधता लाने की मांग करने वाले निवेशकों के लिए बहुत बेहतर होती है, क्योंकि इसके निवेश अक्सर मुद्रास्फीति के साथ मदद करते हैं।

2. कमोडिटी ट्रेडिंग क्या है

इक्विटी, रियल एस्टेट और सोने और चांदी जैसी कीमती धातुओं में निवेश के बाद, लोगों ने कमोडिटी में भी निवेश करना शुरू कर दिया। यह रिटेल इन्वेस्टर और ट्रेडर के लिए निवेश करने का एक नया प्लेटफॉर्म मिल गया। हालांकि, कमोडिटी ट्रेडिंग में जोखिम और चुनौतियां भी हैं। लेकिन यह ट्रेडर को मुनाफा कमाने का भी एक अच्छा प्लैटफॉर्म देता है, जहाँ ट्रेडर कमोडिटी को ऑनलाइन खरीद और बेच सकता है।

ट्रेडिंग के अन्य सेगमेंट की तरह कमोडिटी में भी ट्रेड करने के लिए मेहनत, ज्ञान, अनुभव और समर्पण की आवश्यकता होती है। ट्रेडर को कमोडिटी, बाजार और वैश्विक अर्थव्यवस्था के बारे में पर्याप्त जानकारी होना चाहिए जो कमोडिटी की कीमत में उतार-चढ़ाव का कारण बनता है। ट्रेडर को कमोडिटी बाजार में सही कदम उठाने में सक्षम होने के लिए मौलिक विश्लेषण और / या तकनीकी विश्लेषण के बारे में पर्याप्त जानकारी होना आवश्यक है।

3. कमोडिटी मार्केट कैसे काम करती है

मान लीजिए कि आपने एमसीएक्स पर हर 100 ग्राम के लिए 72,000 रुपये पर सोना फ्यूचर्स अनुबंध खरीदा है। एमसीएक्स पर गोल्ड का मार्जिन 3.5 प्रतिशत होता है। तो आप अपने सोने के लिए 2,520 रुपये का भुगतान करेंगे। मान लीजिए कि अगले दिन सोने की लागत प्रति 100 ग्राम 73,000 रुपये तक बढ़ जाती है। 1,000 रुपये उस बैंक अकाउंट में जमा किए जाएंगे, जिसे आपने कमोडिटी मार्केट से लिंक किया है। मान लें कि एक दिन के बाद, यह 72,500 रुपये तक गिर जाता है। उसी प्रकार से, 500 रुपये आपके बैंक अकाउंट से डेबिट किए जाएंगे।

कमोडिटी मार्केट में ट्रेडिंग

कमोडिटी ट्रेडिंग का मूल आधार मांग और आपूर्ति (Demand and Supply) है, जैसे जब आपूर्ति (Supply) कम हो जाती है, तो मांग (Demand) बढ़ जाती है और इसलिए कीमतें (Prices) बढ़ जाती है और जब आपूर्ति (Supply) अधिक हो जाती है, तो मांग (Demand) के साथ कीमतें घट जाती है। ट्रेडर इन उतार-चढ़ाव से लाभ उठाकर मुनाफा (Profit) कमाता है या नुकसान (Loss) से बचता है। व्यापक रूप से ट्रेडिंग के लिए कमोडिटीज की चार श्रेणियां है: धातु (Metal), ऊर्जा (Energy), पशुधन (Livestock) और कृषि (Agri)।

मौसम, सरकारी नीतियों, सामाजिक कारकों और वैश्विक कारकों से प्रभावित मांग और आपूर्ति में बदलाव के कारण कीमतें भी प्रभावित होती हैं। प्रत्येक कमोडिटी को एक विशिष्ट लॉट साइज और अनुबंध मूल्य (Contract Price) के अंतर्गत ट्रेड किये जाते हैं और मूल्य में उतार चढ़ाव लाभ या हानि का कारण बनता है। यहां कमोडिटी ट्रेडिंग की प्रत्येक श्रेणी का एक संक्षिप्त विवरण दिया गया है।

कमोडिटी ट्रेडिंग के फायदे

कमोडिटी ट्रेडिंग में अन्य ट्रेडिंग सेगमेंट की तुलना में कई फायदे प्रदान करती है। ज्यादातर, ट्रेडिंग निवेश आर्थिक अनिश्चितताओं के समय निवेशकों को लाभ प्रदान करता है।

पोर्टफोलियो का विविधीकरण

कमोडिटी ट्रेडिंग, ट्रेडर पेपर ट्रेडिंग के फायदे और नुकसान को उनके पोर्टफोलियो में विविधता लाने में मदद करती है। एक ट्रेडर कमोडिटीज के साथ स्टॉक, बॉन्ड और अन्य सेगमेंट में निवेश करके, किसी एक सेगमेंट में अचानक आये गिरावट से अपने नुकसान को कम करने में सक्षम हो सकता है। इसके अलावा, कमोडिटी, स्टॉक की तुलना में आर्थिक और भौगोलिक कारकों के लिए अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देती हैं। इसलिए कमोडिटी में निवेश करके बेहतर रिटर्न और अस्थिरता को कम कर सकते है।

हेजिंग

जब अर्थव्यवस्था में गिरावट आती है तो, मुद्रास्फीति बढ़ जाती है और कमोडिटी की कीमतें बढ़ जाती हैं। इस समय, स्टॉक और बॉन्ड की कीमतें नीचे आती है लेकिन कमोडिटी में निवेश निवेशकों को उछाल से लाभ उठाने और कमोडिटी की ऊंची कीमती से बचाने में मदद करती है।

कम मार्जिन

कमोडिटी ट्रेडिंग के लिए आवश्यक मार्जिन राशि अनुबंध मूल्य की लगभग 5-10% होता है जो अन्य एसेट्स क्लास की तुलना में काफी कम है। इसलिए, ट्रेडर कम पैसे के साथ अधिक ट्रेड कर सकता हैं।

विकास और रिटर्न के अधिक अवसर

कमोडिटी ट्रेडिंग काफी जोखिम भरा है लेकिन यदि जोखिम को अच्छी तरह से प्रबंधित किया जाए और निवेश को उचित शोध और विश्लेषण के बाद ठीक से किया जाता है, तो यह बहुत ही मुनाफे का सौदा हो सकता है। कमोडिटी के लिए तेजी से बढ़ती मांग के कारण, कमोडिटी ट्रेडर बढ़ सकते हैं और अच्छे पैसे कमा सकते हैं।

लिक्विडिटी

कमोडिटी में निवेश रियल एस्टेट जैसे अन्य एसेट क्लास में निवेश की तुलना में अत्यधिक लिक्विड है और खरीद और बिक्री बहुत आसान और तेजी से होती है। इसलिए पोजीशन को आसानी से स्क्वायर ऑफ किया जा सकता है और जब आवश्यक हो तब कैश किया जा सकता है।

5. कमोडिटी ट्रेडिंग के जोखिम

निवेश और ट्रेड के सभी अन्य रूपों की तरह, कमोडिटी ट्रेडिंग भी कई जोखिमों के अधीन है। जब निवेशक बाजार में बिना तैयारी या बहुत अधिक उम्मीदों के साथ प्रवेश करता है, तो जोखिम बढ़ जाता है। निवेशकों को सावधानी बरतनी चाहिए और अपने जोखिम लेने के सामर्थ्य के हिसाब से ही ट्रेड करना चाहिए।

उच्च लिवरेज

कमोडिटी ट्रेडिंग के लिए आवश्यक मार्जिन राशि काफी कम है, इस प्रकार उच्च लाभ प्राप्त होता है। हालांकि, अगर अच्छी तरह से संभाला नहीं जाता है तो उच्च लाभ एक जाल पेपर ट्रेडिंग के फायदे और नुकसान के रूप में भी कार्य कर सकता है। ट्रेडर के पास उस धन को खोने की उच्च संभावना होती है और इस प्रकार भारी कर्ज के अधीन हो सकता है।

उच्च अस्थिरता

कमोडिटी पूरी तरह से अस्थिरता के मामले में काफी जोखिम भरा होता है। कमोडिटी में अस्थिरता स्टॉक के मुकाबले लगभग दोगुनी और बॉन्ड के मुकाबले लगभग चार गुना होती है। इसलिए, कमोडिटी बाजार में ट्रेडिंग अनुभवहीन ट्रेडर के लिए बहुत जोखिम भरा हो सकता है।

ज्ञान और समझ की कमी

ट्रेडिंग के किसी भी रूप का आधार अनुभव और ज्ञान होता है। कई नए ट्रेडर खुद को शिक्षित नहीं करते हैं और खुद ट्रेडिंग के समुद्र में कूद जाते हैं। ट्रेडर को ट्रेडिंग की प्रैक्टिस शुरू करने से पहले अच्छी कमोडिटी ट्रेडिंग किताबें, बातचीत और अन्य अनुभवी ट्रेडर के साथ अनुभव साझा करना चाहिए और अपनी खुद की ट्रेडिंग की योजनाएं बनानी चाहिए और रणनीतियों को पढ़ना चाहिए।

इस प्रकार, कमोडिटी ट्रेडिंग एक दिलचस्प और पुरस्कृत प्रक्रिया है जो निवेशकों को उनके पोर्टफोलियो की हेजिंग, अटकलें और विविधीकरण में मदद करती है। साथ ही, बाजार काफी अस्थिर और जोखिम भरा होता है, इसलिए ट्रेडर को बाजार में प्रवेश करने से पहले सावधानी बरतनी चाहिए और अच्छे मुनाफे पेपर ट्रेडिंग के फायदे और नुकसान को कमाने और नुकसान को कम करने के लिए केंद्रित, समर्पित और मेहनती रहना चाहिए।

6. कमोडिटी ट्रेडिंग में क्या अलग है

कमोडिटी ट्रेडिंग और शेयर बाज़ार ट्रेडिंग करने में बुनियादी फर्क है। शेयर बाजार में आप शेयरों को एक बार खरीद कर कई साल बाद भी बेच सकते हैं लेकिन कमोडिटी मार्केट में दो-तीन नियर मंथ में ही कारोबार होता है। इसलिए सौदे खरीदते या बेचने में एक निश्चित अवधि का पालन करना जरूरी होता है। यह इक्विटी फ्यूचर ट्रेडिंग (equity future trading) की तरह होता है।

7. फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट क्या है ?

दो पार्टियों के बीच यह खरीदने बेचने का ऐसा सौदा होता है जो आज के दाम पर फ्यूचर की डेट में एक्सचेंज होता है। कमोडिटी राष्ट्रीय स्तर ऑनलाइन मॉनिटरिंग और सर्विलांस मैकेनिज्म के साथ ट्रेड होता है। एमसीएक्स और एनसीडीएक्स में कमोडिटी फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट एक महीने, दो महीने और तीन महीने के लिए एक्सापाइरी सायकल के आधार पर खरीदे जाते हैं।

Meta Laysoffs: Facebook की पेरेंट कंपनी मेटा ने 11000 से ज्यादा कर्मचारियों को नौकरी से निकाला

Meta News, Facebook Meta Layoff Start Today : Facebook की पेरेंट कंपनी Meta ने 13 प्रतिशत (11000 से ज्यादा) कर्मचारियों की छुट्टी कर दी है।

Meta Laysoffs: Facebook की पेरेंट कंपनी मेटा ने 11000 से ज्यादा कर्मचारियों को नौकरी से निकाला

मेटा छंटनी: Facebook की पेरेंट कंपनी Meta ने कुल 11000 कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाने का ऐलान कर दिया है।

Meta Layoffs 2022: Facebook की पेरेंट कंपनी Meta Platforms Inc. ने 9 नवंबर, बुधवार को उम्मीद के मुताबिक 11000 से ज्यादा कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया है। यह संख्या कंपनी के कुल कर्मचारियों का 13 प्रतिशत है। बता दें कि कंपनी ने लगातार गिरते रेवेन्यू और कमाई में कमी के चलते पहले ही कर्मचारियों की छंटनी के संकेत दे दिए थे। गौर करने वाली बात है कि सितंबर के आखिर तक मेटा कंपनी में 87,314 कर्मचारी थे।

Mark Zuckerberg Post on पेपर ट्रेडिंग के फायदे और नुकसान meta Layoffs (मार्क जुकरबर्ग ने की घोषणा)

मेटा के चीफ एग्जिक्युटिव मार्क जुकरबर्ग ने एक ब्लॉग पोस्ट में कहा, ‘आज मैं, मेटा के इतिहास में किए गए बदलाव में से कुछ सबसे पेपर ट्रेडिंग के फायदे और नुकसान पेपर ट्रेडिंग के फायदे और नुकसान कठिन फैसलों को साझा कर रहा हूं। मैंने अपनी टीम को करीब 13 प्रतिशत तक कम करने का फैसला किया है और 11000 से ज्यादा प्रतिभाशाली कर्मचारियों को जाना होगा।’

जुकरबर्ग ने आगे कहा, ‘हम कुछ और अतिरिक्त फैसले भी ले रहे हैं ताकि पहले से बेहतर और ज्यादा क्षमता वाली कंपनी बन सकें, इसके लिए अतिरिक्त खर्चों में कटौती कर रहे हैं और भर्तियों पर रोक को फिलहाल आगे बढ़ा रहे हैं।’

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मेटा ने कहा है कि जिन कर्मचारियों को निकाला जा रहा है, उन्हें 16 हफ्ते की बेसिक सैलरी मिलेगी। इसके अलावा जितने भी साल नौकरी की है, उसके हिसाब से हर साल दो सप्ताह की सैलरी भी अतिरिक्त मिलेगी। यानी अगर किसी ने 10 साल नौकरी की है तो उसे 16+ 20 सप्ताह की सैलरी दी जाएगी।

बता दें कि मेटा ने अपनी वैल्यू के दो-तिहाई से ज्यादा तक गिर चुके हैं और प्री-मार्केट ट्रेडिंग में 3 प्रतिशत का उछाल देखा गया।

बता दें कि 2004 में फेसबुक की शुरुआत हुई थी और ऐसा पहली बार है कि खर्चों में कटौती के चलते कंपनी ने पहली बार इस तरह का ऐक्शन लिया है। कंपनी को डिजिटल एडवर्टाइजिंग रेवेन्यू में जबरदस्त कमी देखने को मिली है।

Twitter ने भी हजारों कर्मचारियों की है छंटनी

हाल ही में माइक्रोब्लॉगिंग साइट ट्विटर के मालिक एलन मस्क और माइक्रोसॉफ्ट कॉर्प ने भी नौकरियों में कटौती की थी। एलन मस्क द्वारा ट्विटर सीईओ बनने के बाद ट्विटर ने करीब 3700 लोगों को नौकरी से निकाल दिया है।

इसके अलावा Snapchat के मालिकाना हक वाली कंपनी Snap ने भी अगस्त में नौकरियों में छंटनी का ऐलान किया था। कंपनी ने कहा था कि करीब 20 फीसदी कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा।

मेटावर्स में निवेश से नुकसान

बता दें कि अक्टूबर 2022 के आखिर में ही मेटा ने अपने दिसंबर क्वार्टर के रेवेन्यू आउटलुक का ऐलान किया था। कंपनी ने जानकारी दी थी कि मेटावर्स में लगातार निवेश के चलते अगले साल काफी नुकसान होगा। इसके बाद ही कंपनी के शेयरों में काफी गिरावट आ गई थी। अभी तक इस साल मेटा का शेयर करीब 70 फीसदी से ज्यादा टूट चुका है। लेकिन मार्क जुकरबर्ग ने अपने निवेशकों से ब्रैंड में भरोसा कायम रखने को कहा है। उनका कहना है कि कंपनी के साथ बने रहने वाले निवेशकों को फायदा मिलेगा।

Bihar Post Poll Alliance: चुनिंदा हालातों में चुनाव बाद हुए गठबंधन स्वीकार्य, जदयू-राजद के गठबंधन पर बोला SC

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस एमएम संदरेश की बेंच ने कहा कि दल बदल कानून में भी इस तरह के गठबंधन का प्रावधान है। संविधान का 10वां शेड्यूल भी इसकी इजाजत देता है।

Bihar Post Poll Alliance: चुनिंदा हालातों में चुनाव बाद हुए गठबंधन स्वीकार्य, जदयू-राजद के गठबंधन पर बोला SC

दिल्ली दौरे के दौरान लालू यादव और नीतीश कुमार(फोटो सोर्स: PTI)।

राष्ट्रीय जनता दल के साथ मिलकर सरकार बनाने वाले नीतीश कुमार के खिलाफ दायर एक याचिका को खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चुनिंदा हालात में चुनाव बाद किए गए गठबंधन स्वीकार्य हैं। याचिका में राजद-जदयू गठबंधन को गलत बता शीर्ष अदालत से नीतीश कुमार को बर्खास्त करने को कहा गया था।

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस एमएम संदरेश की बेंच ने कहा कि दल बदल कानून में भी इस तरह के गठबंधन का प्रावधान है। संविधान का 10वां शेड्यूल भी इसकी इजाजत देता है। सुप्रीम कोर्ट की डबल बेंच का कहना था कि याचिका में कोई मजबूत दलील पेपर ट्रेडिंग के फायदे और नुकसान नहीं दी गई है, जिस पर कोर्ट विचार करने का मन बनाए। लिहाजा इस याचिका को सिरे से खारिज किया जाता है।

चंदन कुमार नाम के शख्स ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करके दलील दी थी कि नीतीश और जदयू का महागठबंधन जनता के साथ धोखा है। हॉर्स ट्रेडिंग और करप्ट पॉलिटिक्स के चलते लोगों को एक स्थिर सरकार नहीं मिल पा रही है। उनका कहना था कि ये गठबंधन संविधान का सरासर उल्लंघन है। नीतीश कुमार को सुप्रीम कोर्ट तत्काल प्रभाव से बर्खास्त करने का आदेश जारी करे।

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याचिकाकर्ता का कहना था कि चुनाव बाद हुए इस गठबंधन को अदालत फ्राड घोषित करे। ऐसी पार्टियों के लिए शीर्ष अदालत दिशा निर्देश जारी करे जो करप्ट और हॉर्स ट्रेडिंग की राजनीति में लिप्त हैं। उनकी मांग थी कि सुप्रीम कोर्ट संसद को आदेश जारी करे, जिससे एक ऐसा कानून बनाया जा सके जिसमें चुनाव से पहले हुए गठबंधन पैसे और बाहुबल के इस्तेमाल से न तोड़े जा सकें।

उनकी दलील थी कि सत्ता के लालची नेता अपने फायदे के लिए चुनाव पूर्व किए गठबंधन तोड़कर अपनी मर्जी से गठजोड़ कर लेते हैं। याचिका में संसद को ये भी निर्देश देने के लिए कहा गया था कि वो संविधान की 10वीं अनुसूची में व्यापक फेरबदल करे, जिससे इस तरह के मौकापरस्त गठबंधनों के होने का रास्ता बंद हो सके।

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सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस एमएम संदरेश की बेंच ने कहा कि दल बदल कानून में भी इस तरह के गठबंधन का प्रावधान है। संविधान का 10वां शेड्यूल भी इसकी इजाजत देता है।

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राष्ट्रीय जनता दल के साथ मिलकर सरकार बनाने वाले नीतीश कुमार के खिलाफ दायर एक याचिका को खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चुनिंदा हालात में चुनाव बाद किए गए गठबंधन स्वीकार्य हैं। याचिका में राजद-जदयू गठबंधन को गलत बता शीर्ष अदालत से नीतीश कुमार को बर्खास्त करने को कहा गया था।

सुप्रीम कोर्ट पेपर ट्रेडिंग के फायदे और नुकसान के जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस एमएम संदरेश की बेंच ने कहा कि दल बदल कानून में भी इस तरह के गठबंधन का प्रावधान है। संविधान का 10वां शेड्यूल भी इसकी इजाजत देता है। सुप्रीम कोर्ट की डबल बेंच का कहना था कि याचिका में कोई मजबूत दलील नहीं दी गई है, जिस पर कोर्ट विचार करने का मन बनाए। लिहाजा इस याचिका को सिरे से खारिज किया जाता है।

चंदन कुमार नाम के शख्स ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करके दलील दी थी कि नीतीश और जदयू का महागठबंधन जनता के साथ धोखा है। हॉर्स ट्रेडिंग और करप्ट पॉलिटिक्स के चलते लोगों को एक स्थिर सरकार नहीं मिल पा रही है। उनका कहना था कि ये गठबंधन संविधान का सरासर उल्लंघन है। नीतीश कुमार को सुप्रीम कोर्ट तत्काल प्रभाव से बर्खास्त करने का आदेश जारी करे।

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उनकी दलील थी कि सत्ता के लालची नेता अपने फायदे के लिए चुनाव पूर्व किए गठबंधन तोड़कर अपनी मर्जी से गठजोड़ कर लेते हैं। याचिका में संसद को ये भी निर्देश देने के लिए कहा गया था कि वो संविधान की 10वीं अनुसूची में व्यापक फेरबदल करे, जिससे इस तरह के मौकापरस्त गठबंधनों के होने का रास्ता बंद हो सके।

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मेटा के चीफ एग्जिक्युटिव मार्क जुकरबर्ग ने एक ब्लॉग पोस्ट में कहा, ‘आज मैं, मेटा के इतिहास में किए गए बदलाव में से कुछ सबसे कठिन फैसलों को साझा कर रहा हूं। मैंने अपनी टीम को करीब 13 प्रतिशत तक कम करने का फैसला किया है और 11000 से ज्यादा प्रतिभाशाली कर्मचारियों को जाना होगा।’

जुकरबर्ग ने आगे कहा, ‘हम कुछ और अतिरिक्त फैसले भी ले रहे हैं ताकि पहले से बेहतर और ज्यादा क्षमता वाली कंपनी बन सकें, इसके लिए अतिरिक्त खर्चों में कटौती कर रहे हैं और भर्तियों पर रोक को फिलहाल आगे बढ़ा रहे हैं।’

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मेटा ने कहा है कि जिन कर्मचारियों को निकाला जा रहा है, उन्हें 16 हफ्ते की बेसिक सैलरी मिलेगी। इसके अलावा जितने भी साल नौकरी की है, उसके हिसाब से हर साल दो सप्ताह की सैलरी भी अतिरिक्त मिलेगी। यानी अगर किसी ने 10 साल नौकरी की है तो उसे 16+ 20 सप्ताह की सैलरी दी जाएगी।

बता दें कि मेटा ने अपनी वैल्यू के दो-तिहाई से ज्यादा तक गिर चुके हैं और प्री-मार्केट ट्रेडिंग में 3 प्रतिशत का उछाल देखा गया।

बता दें कि 2004 में फेसबुक की शुरुआत हुई थी और ऐसा पहली बार है कि खर्चों में कटौती के चलते कंपनी ने पहली बार इस तरह का ऐक्शन लिया है। कंपनी को डिजिटल एडवर्टाइजिंग रेवेन्यू में जबरदस्त कमी देखने को मिली है।

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हाल ही में माइक्रोब्लॉगिंग साइट ट्विटर के मालिक एलन मस्क और माइक्रोसॉफ्ट कॉर्प ने भी नौकरियों में कटौती की थी। एलन मस्क द्वारा ट्विटर सीईओ बनने के बाद ट्विटर ने करीब 3700 लोगों को नौकरी से निकाल दिया है।

इसके अलावा Snapchat के मालिकाना हक वाली कंपनी Snap ने भी अगस्त में नौकरियों में छंटनी का ऐलान किया था। कंपनी ने कहा था कि करीब 20 फीसदी कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा।

मेटावर्स में निवेश से नुकसान

बता दें कि अक्टूबर 2022 के आखिर में ही मेटा ने अपने दिसंबर क्वार्टर के रेवेन्यू आउटलुक का ऐलान किया था। कंपनी ने जानकारी दी थी कि मेटावर्स में लगातार निवेश के चलते अगले साल काफी नुकसान होगा। इसके बाद ही कंपनी के शेयरों में काफी गिरावट आ गई थी। अभी तक इस साल मेटा का शेयर करीब 70 फीसदी से ज्यादा टूट चुका है। लेकिन मार्क जुकरबर्ग ने अपने निवेशकों से ब्रैंड में भरोसा कायम रखने को कहा है। उनका कहना है कि कंपनी के साथ बने रहने वाले निवेशकों को फायदा मिलेगा।

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