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मारुति सुजुकी ने ‘नेक्सा’ के तहत बेचे जाने वाले वाहनों में सीएनजी ईंधन की पेशकश की

एमएसआई के वरिष्ठ कार्यकारी निदेशक (विपणन और बिक्री) शशांक श्रीवास्तव ने बताया कि कंपनी अपनी प्रीमियम हैचबैक बलेनो और बहुउद्देश्यीय वाहन एक्सएल6 के लिए ‘एस-सीएनजी’ विकल्प पेश कर रही है। इस गाड़ियों की कीमत 8.28 लाख रुपये से 12.24 लाख रुपये के बीच है।

श्रीवास्तव ने एक बातचीत में कहा, ‘‘इस साल करीब चार लाख सीएनजी कारों की बिक्री का लक्ष्य है, जबकि पिछले साल हमने 2.3 लाख कारें बेची थीं।''

उन्होंने कहा कि 2010 में तीन मॉडल- इको, ऑल्टो और वैगन-आर के लिए सीएनजी विकल्प की पेशकश करने के साथ कंपनी ने अबतक कुल 11.4 लाख सीएनजी वाहन बेचे हैं।

श्रीवास्तव ने कहा, ‘‘आज हमारे कुल 16 मॉडलों में से 10 में सीएनजी है. दो नए मॉडलों के साथ मारुति की सीएनजी पेशकश 12 मॉडल तक पहुंच जाएगी।''

उन्होंने बलेनो और बिक्री विकल्प एक्सएल6 के सीएनजी विकल्पों के बारे में कहा कि उत्पादन पहले ही शुरू हो चुका है और हम नवंबर के पहले सप्ताह में बिक्री शुरू करेंगे।

बलेनो एस-सीएनजी दो संस्करणों में बिक्री विकल्प उपलब्ध होगी। डेल्टा, मैनुअल ट्रांसमिशन (एमटी) की कीमत 8.28 लाख रुपये और जेटा (एमटी) की कीमत 9.21 लाख रुपये होगी। दूसरी और एक्सएल6 एस-सीएनजी केवल जेटा (एमटी) संस्करण में उपलब्ध होगी और इसकी कीमत 12.24 लाख रुपये होगी। सभी कीमतें शोरूम की हैं।

उन्होंने कहा कि नेक्सा श्रृंखला में सीएनजी वाहनों की पेशकश पर लंबे समय से चर्चा चल रही थी और यह फैसला नेक्सा ग्राहकों पर किए गए एक शोध के आधार किया गया।

श्रीवास्तव ने कहा कि शोध से पता चला कि यह सिर्फ किफायत से जुड़ा मामला नहीं है, बल्कि इसका एक पहलू यह है कि सीएनजी बहुत ही स्वच्छ तकनीक है।

बिक्री प्रभाव अकादमी विकल्प

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कोरोना से सस्ते मकानों का विकल्प हुआ कम, महंगे घरों की भारी डिमांड से रिकॉर्ड बिक्री

कोरोना महामारी ने घर खरीदारों के सामने सस्ते घर (40 लाख रुपये से कम कीमत) के विकल्प को कम कर दिया है। एनारॉक प्रॉपर्टी कंसल्टेंट्स की रिपोर्ट से यह जानकारी मिली है। वहीं, इस बीच बीच महंगे घरों.

कोरोना से सस्ते मकानों का विकल्प हुआ कम, महंगे घरों की भारी डिमांड से रिकॉर्ड बिक्री

कोरोना महामारी ने घर खरीदारों के सामने सस्ते घर (40 लाख रुपये से कम कीमत) के विकल्प को कम कर दिया है। एनारॉक प्रॉपर्टी कंसल्टेंट्स की रिपोर्ट से यह जानकारी मिली है। वहीं, इस बीच बीच महंगे घरों की रिकॉर्ड बिक्री हुई है।

संपत्ति बाजार में कुल नए घरों की आपूर्ति में सस्ते घरों की आपूर्ति गिरी है। रिपोर्ट के अनुसार, 2020 के शुरुआती महीने तक कुल नए लॉन्च में सस्ते घरों की हिस्सेदारी 40 फीसदी थी जो चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल-जून, 2021) के दौरान घटकर 20 फीसदी रह गई है। यानी 2020 में अगर 100 नए घर बन रहे थे तो उसमें 40 घर अफोर्डेबल कैटेगरी के थे। वहीं, चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही तक यह घटकर 20 रह गए हैं। क्रेडाई पश्चिमी यूपी के सचिव सुबोध गोयल ने हिन्दुस्तान को बताया कि सीमेंट और स्टील बनाने वाली कंपनियों ने कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी की है।

कच्चे माल में उछाल से अफोर्डेबल प्रोजेक्ट बनाना मुश्किल

कोरोना के बाद से रियल एस्टेट में इस्तेमाल होने वाला अधिकांश कच्चा माल में अचानक से उछाल आया है। इसका बुरा असर रियल एस्टेट सेक्टर पर पड़ा है। इससे रियल एस्टेट डेवलपर्स के लिए अफोर्डेबल प्रोजेक्ट बनाना मुश्किल हो गया है। इसके चलते डेवलपर्स अफोर्डेबल प्रोजेक्ट लॉन्च करने से बिक्री विकल्प बच रहे हैं जिससे सस्ते घरों की आपूर्ति घटी है। वहीं, सिग्नेचर ग्लोबल के चेयरमैन, प्रदीप अग्रवाल ने बताया कि बड़े अपार्टमेंट और फ्लोर की मांग पूरा करने के लिए रियल एस्टेट डेवलपर राज्यों की नई हाउसिंग पॉलिसी पर फोकस कर रहे है जो कि 170 स्क्वायर यार्ड तक यूनिट साइज के साथ प्रोजेक्ट को प्रोत्साहित करता है। यह आंकड़ा अफोर्डेबल हाउसिंग स्कीम के 90 स्क्वायर यार्ड के दायरे से काफी बड़ा है। एक कारण यह भी है कि कई बड़े पैमाने के डेवलपर्स अपनी मौजूदा इन्वेंट्री को खत्म करने के लिए तत्पर हैं।

बड़े घरों की ओर बढ़ा रुझान

रियल एस्टेट कंपनी अंतरिक्ष इंडिया के बिक्री विकल्प सीएमडी राकेश यादव ने हिन्दुस्तान को बताया कि कोरोना के दौर में घरों की मांग तेजी से बढ़ी है, लेकिन खरीदारों का रुझान अब बड़े साइज के घर की ओर है। ऐसा बदलाव वर्क फ्रॉम होम कल्चर से हुआ है। कोरोना के बाद घर ही ऑफिस बन गया है तो लोग अपनी जरूरत को समझते हुए बड़ा घर खरीदना चाह रहे हैं। इस बदलाव से 3बीएचके और 4बीएचके फ्लैट की मांग तेजी से बढ़ी है। इसी को देखते हुए डेवलपर्स भी बाजार की मांग के अनुरूप नए प्रोजेक्ट को लॉन्च कर रहे हैं। इस बदलाव ने सस्ते घरों की आपूर्ति को कम किया है जबकि महंगे और बड़े घरों पर फोकस बढ़ाया है।

खरीदारी क्षमता घटने का भी दबाव

हाउसिंग.कॉम के सीईओ, मणि रंगराजन ने बताया कि मौजूदा संकट ने अफोर्डेबल हाउसिंग सेगमेंट के एक खास तबके को काफी प्रभावित किया है। पिछले एक साल में मध्यम वर्ग का एक वर्ग निचले आर्थिक तबके में फिसल गया है। इससे सस्ते घरों की मांग प्रभावित हुई है। वहीं, उच्च मध्यम वर्ग के लोग या आर्थिक रूप से मौजूद लोग घर खरीद रहे हैं।

नए प्रोजेक्ट को शुरू करना अब संभव नहीं

क्रेडाई नेशनल ( नार्थ रीजन) के उपाध्यक्ष और गौड़ ग्रुप के एमडी मनोज गौड़ ने कहा कि निर्माण लागत में तेज बढ़ोतरी और लॉकडाउन की वजह से प्रोजेक्ट पूरा करने में हुई देरी से अफोर्डेबल हाउसिंग सेगमेंट अब बिक्री विकल्प पहले जैसा फायदेमंद नहीं रहा है। पिछले एक साल में निर्माण लागत 20 फीसदी से ज्यादा बढ़ गई है। इसके अलावा इस साल के लॉकडाउन ने प्रोजेक्टों में देरी की और कुल लागत में इजाफा किया है। रेरा की डेडलाइन भी अभी तक नहीं बढ़ाई गई है। अफोर्डेबल हाउसिंग डेवलपर्स के लिए कम मार्जिन को देखते हुए एक नए प्रोजेक्ट को शुरू करना अब संभव नहीं है

महंगे घरों की रिकॉर्ड बिक्री

कोरोना महामारी के बीच महंगे घरों की रिकॉर्ड बिक्री हुई है। स्क्वेर यार्ड की रिपोर्ट के अनुसार, पहली छमाही में सिर्फ मुंबई में 4000 करोड़ रुपये से अधिक कीमत की लग्जरी घरों की बिक्री हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, मुंबई में जो महंगे घर खरीदे गए हैं उनमें 15 से 20 करोड़ से अधिक कीमत वाले घरों की हिस्सेदारी 45 फीसदी, 20 से 30 करोड़ की हिस्सदेारी 40 फीसदी, 30 से 50 करोड़ की हिस्सेदारी 10 फीसदी और 50 करोड़ रुपये से ऊपर के घर की हिस्सेदारी सात फीसदी थी।

FIFA World Cup 2022 के टिकटों की बिक्री आज से शुरू, कतर में फैंस के लिए विकल्प कम, फिर भी जोश में है दम

दुनिया के सबसे तेज-तर्रार खेल फुटबॉल (Football) के महाकुंभ के लिए टिकटों की बिक्री का सिलसिला 5 जुलाई से शुरू होकर 16 अगस्त तक चलेगा.

FIFA World Cup 2022 के टिकटों की बिक्री आज से शुरू, कतर में फैंस के लिए विकल्प कम, फिर भी जोश में है दम

TV9 Bharatvarsh | Edited By: साकेत शर्मा

Updated on: Jul 05, 2022 | 11:06 AM

कतर में होने वाले फीफा वर्ल्ड कप 2022 (FIFA World Cup 2022) के लिए टिकटों की बिक्री विकल्प आज से शुरू हो गई. दुनिया के सबसे तेज-तर्रार खेल फुटबॉल के महाकुंभ के लिए टिकटों की बिक्री का ये सिलसिला 16 अगस्त तक चलेगा. टिकटों की सेल पहले आओ, पहले पाओ वाली नीति के तहत होगा. इसे FIFA.com/tickets पर भारतीय समयानुसार दोपहर ढाई बजे से खरीदा जा सकता है. बता दें कि मिडिल ईस्ट में पहली बार फुटबॉल वर्ल्ड कप का आयोजन हो रहा है. टिकटों को लेकर मेजबान कतर को मिलाकर कुल 10 देशों में ज्यादा दिलचस्पी है, जिसमें कनाडा, इंग्लैंड, फ्रांस, जर्मनी, भारत, साउदी अरब, स्पेन, UAE और USA शामिल हैं.

फीफा वर्ल्ड कप 2022 के सेल्स और मार्केटिंग के हेड हसन राबिया अल कुवारी ने बताया कि टिकटों के बिक्री की प्रक्रिया 5 जुलाई से शुरू होगी. उन्होंने कहा कि प्रत्येक फैन एक मैच के ज्यादा से ज्यादा 6 टिकट खरीद सकता है.

सबसे बढ़कर है फुटबॉल का जुनून

फुटबॉल खेल है जोश और जुनून का. इसे लेकर दुनिया भर में क्रेज है. कतर में होने वाले फीफा वर्ल्ड कप को लेकर भी खेल प्रेमियों के बीच गजब का उत्साह है. ये उत्साह तब दिख रहा है जब कतर में उनके लिए सुविधाजनक विकल्पों की कमी है. फ्लाइट के दाम 2 से 3 गुना बढ़े हैं. होटल के कमरों के किराए बढ़े हैं. लेकिन जेब ढीली हो रही इसकी परवाह किए बगैर फैंस के बीच टिकटों की होड़ दिख रही है तो सिर्फ इसलिए क्योंकि उन सब पर फुटबॉल का जुनून हावी है.

8 स्टेडियम पर होगा फुटबॉल के महाकुंभ का आयोजन

फीफा वर्ल्ड कप 2022 का आयोजन कतर के 8 स्टेडियम बिक्री विकल्प बिक्री विकल्प में होना है. ये सभी स्टेडियम राजधानी दोहा के आस पास हैं. 29 जून तक पहले चरण में 1.8 मिलियन टिकट बिक चुके थे. जबकि अब आज से टिकटों की बिक्री की दूसरी फेज शुरू हुई है. टूर्नामेंट का आयोजन 21 नवंबर से 18 दिसंबर के बीच होना है. भारत की टीम इस टूर्नामेंट का हिस्सा नहीं बावजूद इसके फीफा वर्ल्ड कप का टिकट खरीदने की होड़ में भारतीय टॉप 10 देशों में शुमार हैं.

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