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NAV क्या है

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बीच में न रोकें एसआईपी:
अक्सर देखा गया है कि बाजार में गिरावट आने पर निवेशक एसआईपी रोक देते हैं या पैसा निकाल लेते हैं। यहां ध्यान रखने वाली बात ये है कि गिरते बाजार के साथ शेयर भी सस्ते होते हैं और आपको कम पैसे में ज्यादा यूनिट मिलते हैं। फिर जब बाजार चढ़ता है तो आपकी यूनिटों की कीमत बढ़ जाती हैं, इसलिए एसआईपी बीच में रोकना आपके लिए घाटे का सौदा साबित होता है।

SIP Tips: निवेशकों को कब रोकनी चाहिए एसआईपी, NAV क्या है कब निकालें पैसे? सीखें जरूरी टिप्स

Mutual Funds SIP Tips: SIP म्यूचुअल फंड में निवेश करने और लंबी अवधि में फंड जुटाने का सबसे आरामदायक और सुविधाजनक तरीका है.

SIP Tips: निवेशकों को कब रोकनी चाहिए एसआईपी, कब निकालें पैसे? सीखें जरूरी टिप्स

Mutual Fund Tips: SIP म्यूचुअल फंड में निवेश करने और लंबी अवधि में फंड जुटाने का सबसे आरामदायक और सुविधाजनक तरीका है.

Mutual Funds SIP Tips: सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) म्यूचुअल फंड में निवेश करने और लंबी अवधि में फंड जुटाने का सबसे आरामदायक और सुविधाजनक तरीका है. यह निवेशकों में अनुशासित निवेश करने की की आदत को बढ़ावा देता है और रूपी कास्ट एवरेजिंग का लाभ सुनिश्चित करता है. हालांकि, कई बार बाजार के उतार चढ़ाव या किसी संबंधित जोखिम की वजह से एसआईपी में निवेशकों को घाटा भी हो जाता है. एक निवेशक को तब क्या करना चाहिए? क्या उसे नुकसान उठाने वाले SIP को रोकना या वापस लेना चाहिए या SIP चालू रखना चाहिए? ये ऐसे सवाल हैं जो निवेशकों को परेशान करते र​हते हैं. आइए हम उसी का जवाब खोजने की कोशिया करते हैं.

एसेट अलोकेशन

यह एसआईपी निवेश का एक बहुत महत्वपूर्ण पहलू है. इक्विटी लिंक्ड म्यूचुअल फंड से मिलने वाला रिटर्न शेयर बाजार का एक फंक्शन है. अगर बाजार खुद ही ज्यादा आकर्षक रिटर्न नहीं दे रहा है, तो आपके द्वारा निवेश किया गया इक्विटी फंड भी उसी को फॉलो कर सकता है. एक और बात का ध्यान यह रखना चाहिए कि पूर्व प्रदर्शन को देखते हुए निवेश करना अच्छा आइडिया नहीं है. मसलन अगर पिछले साल मिडकैप और स्मालकैप ने अच्छा रिटर्न दिया है तो अपना ज्यादातर पैसा इन्हीं फंडों में लगाना गलत आइडिया होगा.

बेहतर है कि अपने एसेट को डाइवर्सिफाई तरीके से निवेश करें. यह लांग टर्म, मिड टर्म और र्शार्ट टर्म फंड का मिश्रण होना चाहिए. यह विकल्प हर व्यक्ति के लिए अलग हो सकता है. क्योंकि सबके निवेश का लक्ष्य या जोखिम लेने की क्षमता एक जैसी नहीं होती है. अपने निवेश को केवल एक प्रकार के फंड तक सीमित करना निश्चित रूप से बहुत अच्छा विचार नहीं है. निवेश करते समय अपनी जोखिम लेने की क्षमता का ध्यान रखें.

Mutual Funds SIP: एसआईपी में पहली बार करने जा रहे हैं निवेश? बेहतर रिटर्न के लिए इन 5 बातों का जरूर रखें ध्यान

कब निकालें पैसा

यह निवेशकों द्वारा सबसे अधिक पूछा जाने वाला प्रश्न है. इस प्रश्न का उत्तर यह है कि उेसा करने के पहले अपने फंड का प्रदर्शन जरूर देख लें. आपके द्वारा निवेश किए गए फंड के प्रदर्शन को ट्रैक करें. अगर फंड का एक साल से कम समय के लिए प्रदर्शन लो है तो इससे बाजार में उतार-चढ़ाव हो सकता है. लेकिन अगर प्रदर्शन 18 महीने से अधिक के लिए कमजोर है तो दूसरे बेहतर फंड की तलाश करना चाहिए.

हालांकि, फंड के प्रदर्शन की मैपिंग करते समय यह एकमात्र पैरामीटर नहीं है. आपको उन कंपनियों की संरचना और उनके प्रदर्शन की भी जांच करनी चाहिए जिनमें फंड ने निवेश किया है. इस बिंदु पर एक और अच्छी रणनीति यह है कि अपने म्यूचुअल फंड की तुलना उसी के समान म्यूचुअल फंड के प्रदर्शन के आधार पर करें. जब आप अपने एसआईपी को भुनाने और वैकल्पिक फंडों की पहचान करने के बारे में निर्णय लेते हैं तो पहले अच्छे से एक्सरसाइज कर लें.

निवेश की अवधि

SIP में जितना अधिक समय तक निवेश किया जाता है, उतना ही बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना होती है. आम तौर पर, एसआईपी में कम से कम 5 साल या उससे ज्यादा के निवेश पर विचार करें. जाहिर तौर पर नुकसान और बाजार के जोखिमों को कम करने के लिए कम से कम 5 साल लगते हैं. कंपाउंडिंग का फायदा भी कम से कम 5 साल पर देखना चाहिए. एक बाजार सुधार चरण का मतलब उन फंइस दौरान जब बाजार में करेक्शन हो तो अपने निवेश को भुनाने की बजाए इसे कम कीमत पर अधिक फंड खरीदने के अवसर के रूप में लें.

हो सकता है कि कभी किसी को म्यूचुअल फंड में नुकसान हो जाए, लेकिन इस पर तुरंत रिएक्ट नहीं करना चाहिए. अपने पोर्टफोलियो को लाल रंग में देखकर गलत निर्णय ना लें. इस तरह के रिजल्ट की वजह चुनाव, जियो पॉलिटिकल टेंशन, स्लोडाउन, कोरोना वायरस जैसी कोई महामारी या अन्य ऐसे फैक्टर हो सकते हैं. अर्थव्यवस्था ने यह सब देखा है और फिर भी आगे बए़ती रही है. कह सकते हैं कि निवेश एक लांग टर्म गेम है और इसी का अनुसार निवेशकों को स्ट्रैटेजी बनानी चाहिए.

(लेखक: P Saravanan, प्रोफेसर आफ फाइनेंस एंड अकाउंटिंग, IIM तिरूचिरापल्ली)

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नव नाम का मतलब और राशि

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नव नाम का हिंदी व अंग्रेजी में अर्थ

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नव नाम का मतलब क्या होता है? Nav name meaning in hindi Nav naam ka matlab kya hota hai, Nav nam ka arth kya hai

नव नाम का अर्थ बेहद यूनिक है! नव नाम का अर्थ "नाम, नया, जिसकी प्रशंसा होती है" होता है।

जैसा कि हमनें बताया कि नव नाम का मतलब "नाम, नया, जिसकी प्रशंसा होती है" होता है, ऐसे में अगर आप अपने बच्चे का नाम नव रखते हैं तो आपके बच्चे का व्यक्तित्व भी नव नाम के मतलब की तरह यानि "नाम, नया, जिसकी प्रशंसा होती है" जैसा हो सकता है!

नव नाम का इंग्लिश में क्या मतलब होता है? Nav name english meaning in hindi Nav naam ka english mein kya matlab hota hai

ऐसे में, अगर आप अपने बच्चे का नाम नव रखने का सोच रहे हैं तो आपको बेशक जानना चाहिए कि नव का अंग्रेजी में मतलब क्या होता है?

आपके द्वारा चुनें जा रहे नव नाम का इंग्लिश में मतलब है "name, new, praised", जिसका हिंदी में अर्थ होता है "नाम, नया, जिसकी प्रशंसा होती है"

नव लड़की का नाम है या लड़के का? Nav ladki ka naam hai ya ladke ka Nav ladki ka naam hota hai ya ladke ka

नव नाम पुलिंग है, इसलिए स्वाभाविक रूप से नव लड़का का नाम है।

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नव नाम का व्यक्तित्व और व्यवहार

नव नाम का व्यक्तित्व और व्यवहार

नव नाम के लोगों का व्यक्तित्व कैसा हो सकता है? Nav naam ke vyakti ka vyavhar kaisa hota hai Nav naam ke vyakti ka behaviour kaisa hota hain in hindi

नव नाम के लोग निर्भीक और बहादुर हो सकते हैं।

नव नाम वाले लोगों को कोई मूर्ख नहीं बना सकता है। इस नाम वाले लोग अन्य लोगों को सीधी और साफ़-सुथरी सलाह देने में विश्वास रख सकते हैं।

नव नाम के लोग अपने विचारों के पक्ष में कम बात कर सकते हैं और कम बोलना पसंद कर सकते हैं।

नव नाम के हर अक्षर का मतलब क्या हो सकता है? Nav name ke har akshar ka NAV क्या है matlab in hindi Nav naam ka vyavhar

हर नाम के हर अक्षर की अपनी ख़ासियत और मतलब होता है। यहाँ देखें नव नाम के हर अक्षर का मतलब क्या हो सकता है!

N आप कलात्मक हो सकते हैं और आप में उत्कृष्ट संचार कौशल हो सकता है।

A लोग आपका अनुसरण कर सकते हैं और आपके गुणों को सीखने का प्रयास भी कर सकते हैं।

V आप जन्मजात विजेता हो सकते हैं। आप दूसरों को आसानी से जीतने भी नहीं दे सकते हैं।

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नव नाम की राशि, नक्षत्र, धर्म

नव नाम की राशि, नक्षत्र, धर्म

नव नाम की राशि क्या है? Nav ki rashi in hindi Nav naam ki rashi kya hoti hai, Nav naam ki rashi kya hai

vrishchik

नव नाम की राशि वृश्चिक होती है। बच्चे के जन्म के समय चाँद जिस राशि व नक्षत्र भाग में होता है, उसी राशि व नक्षत्र से संबंधित अक्षर से बच्चे का नाम रखा जाता है।

इस तरह अगर आपके बच्चे के जन्म के समय चाँद, वृश्चिक राशि के भाग में होता है तो इस राशि के अक्षर के अनुसार आपके बच्चे का नाम नव रखा जा सकता है।

राशिवृश्चिक
तत्वजल
राशि से संबंधित अक्षरतो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू
राशि का चिन्हबिच्छू जैसा
राशि का स्वामीमंगल
प्यार व साथी की राशिकर्क, मीन

नव नाम का नक्षत्र क्या है? Nav name nakshatra in hindi Nav naam ka nakshatra kya hai

नव नाम का नक्षत्र अनुराधा है।

अनुराधा नक्षत्र के संबंधित अक्षर हैं - ना,नी,नू,ने! इस नक्षत्र का स्वामी शनि और तारामंडल संख्या 4 है। अनुराधा नक्षत्र का चिन्ह सूप या जलधारा है।

नक्षत्रअनुराधा
नक्षत्र से संबंधित अक्षरना,नी,नू,ने
नक्षत्र का स्वामीशनि
नक्षत्र का चिन्हसूप या जलधारा
नक्षत्र का तारामंडल संख्या4

नव किस धर्म का नाम है? Nav naam ka dharm kya hai in hindi Nav kis dharm ka naam hai

अगर आप नव नाम को चुन रहे हैं तो यह आप ज़रुर जानना चाहेंगे कि नव नाम किस धर्म से संबंधित है! ऐसे में आपको बता दें कि आपके द्वारा चुना जा रहा नाम नव, हिंदू धर्म से संबंधित है।

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नव आम का अंकज्योतिष

नव आम का अंकज्योतिष

नव नाम का शुभ अंक क्या हो सकता है? Lucky number of Nav in hindi Nav naam ka shubh ank kya hota hai, Nav naam ka lucky number kya hai

निम्लिखित नामांक पता लगाने की विधि है। जिसके द्वारा हम आपको नव नाम के अंक से जुड़ी जानकारी दे रहे हैं।

123456789
ABCDEFGHI
JKLMNOPQR
STUVWXYZ

N (5) + A (1) + V (4) = 10 = 1

इस विधि के अनुसार नव नाम का शुभ अंक 1 है। यह आत्म-सम्मान का प्रतीक है, इस अंक वाले व्यक्ति में संगठन के लिए मजबूत प्रबंधकीय कौशल, नेतृत्व की क्षमता भी हो सकती है।

जिनका नाम नव होता है उनकी जिंदगी में 1 संख्या का बेहद महत्व होता है। ऐसे लोग अपने जीवन में कई शुभ घटनाओं, सफलता और ख़ुशी भरे पल को 1 संख्या से जुड़ा हुआ महसूस कर सकते हैं।

नव नाम का लकी नंबर 1, इस नाम वाले लोगों के लिए उनकी जिंदगी में बेहद लकी साबित हो सकता है। कुल मिलाकर देखा जाए तो नव नाम का लकी नंबर 1, नव नाम वाले लोगों को उनकी जिंदगी में कई खुशनुमा पल से जोड़ सकता है।

नव नाम में कितने अक्षर होते हैं? Nav nam mein kitne letters hote hain Nav nam mein kitne akshar hote hain

नव नाम में 2 अक्षर होते हैं। अगर आप अपने बच्चे का 2 अक्षर का नाम रखना चाहते हैं तो आपके लिए नव नाम एक अच्छा विकल्प हो सकता है।

नव नाम आपके बच्चे के लिए बेहद अच्छा रहेगा! इसके NAV क्या है अलावा आपको नव नाम से मिलते-जुलते नाम, हिंदू धर्म के अन्य नाम, न अक्षर से नाम, वृश्चिक राशि के बच्चों के नाम भी पसंद आ सकते हैं। यहाँ जानें धर्म के अनुसार बच्चों के नाम और राशि के अनुसार बच्चों के नाम!

SIP Investment Tips: SIP शुरू करते समय रखें इन बातों का खयाल, वरना झेलना पड़ सकता है भरी नुकसान

SIP Investment Tips: वैसे तो सिप में निवेश करना ज्यादातर फायदे का सौदा ही साबित होता है, लेकिन कई बार कम जानकारी के कारण एसआईपी निवेशक कुछ गलतियां कर बैठते हैं। अगर आप म्यूचुअल फंड में निवेश करने जा रहे हैं तो इन गलतियों से जरूर बचें-

Updated: October 08, 2021 04:33:09 pm

(SIP Investment Tips), नाई दिल्ली. सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान यानी एसआईपी (SIP) म्यूचुअल फंड में निवेश करने का सबसे पॉपुलर तरीका हो गया है। एसआईपी उन लोगो के लिए बेहतर है जो शेयर बाजार की पेचीदगियों से खुद को दूर रखना चाहते हैं और जो मार्केट के जोखिम से बचना चाहते हैं।

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आपको बता दें कि एसआईपी से आप अपनी पसंद के म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) में अपनी सुविधा के हिसाब से नियमित रूप से एक निश्चित धनराशि जमा कर सकते हैं। आज– कल लोग फंड्स की बदलती नेट असेट वैल्‍यू (NAV) के आधार पर अपने निवेश को संतुलित कर अच्‍छा पैसा बनाते हैं।


हमेशा बाजार के उछाल पर न करे निवेश:
शेयर बाजार में जब उछाल होता है तो कई निवेशक फायदा उठाने के लिए म्यूचुअल फंड में बिना सोचे निवेश करना शुरू कर देते हैं। लेकिन बाजार हमेशा स्थिर नहीं रहता, कभी ऊपर तो कभी नीचे होता रहता है। इसलिए बाजार देखकर कभी निवेश ना करें.
म्यूचुअल फंड में निवेश हमेशा अनुशासन और धैर्य से करना चाहिए, इसलिए सिस्टेमेटिक निवेश योजना के जरिये आप एक निश्चित अंतराल में थोड़ी-थोड़ी रकम किसी फंड में डाल सकते हैं। ये आपके बाजार को जोखिम से बचाता है।


गिरते बाजार पर क्या करें:
ऐसे कई निवेशक हैं, जो बाजार नीचे आने पर एसआईपी रोक देते हैं और बाजार बढ़ते समय निवेश शुरू करते हैं. यह निवेश के बुनियादी सिद्धांत ‘बाय लो एंड सेल हाई’ के बिल्कुल उलट है। यह फैसला आपको घाटे में डाल सकता है। गिरते बाजार के समय भी निवेश जारी रखकर इस गलती से बच सकते हैं। बाजार की चाल का आकलन करने के बजाय निवेश अवधि के साथ मेल खाते फंड्स की कैटेगरी में निवेश करना चाहिए। इस तरह, आप निवेश की गई पूंजी को खोए बिना सही फंड चुन सकते हैं।


कम एनएवी का सस्ते फंड से मतलब नहीं:
कई खुदरा निवेशक कम एनएवी (Low NAV) को सस्‍ते फंड के तौर पर लेते हैं और उनमें एसआईपी के जरिये निवेश करके ज्यादा रिटर्न की उम्‍मीद करते हैं।

बता दें कि किसी फंड की एनएवी ज्‍यादा या कम होने के कई कारण हो सकते हैं। किसी फंड की एनएवी उसके असेट अंडर मैनेजमेंट की मार्केट प्राइस पर निर्भर करती है। अच्छे मैनेजर्स वाले फंड की एनएवी दूसरे फंड्स के मुकाबले ज्‍यादा तेजी से बढ़ेगी, इस ही तरह नए फंड की एनएवी पुराने फंड के मुकाबले कम होगी क्‍योंकि नए फंड को ग्रोथ के लिए कम समय मिला है।

ऐसे में निवेशकों को म्‍यूचुअल फंड में सिप के जरिये निवेश करते समय उसकी एनएवी पर ज्‍यादा ध्‍यान देने की जरूरत नहीं है। निवेशक को कंपनी के पिछले प्रदर्शन पर ध्‍यान देना चाहिए और भविष्‍य की योजनाओं पर फोकस करना चाहिए।


लॉन्ग टर्म इंवेस्टमेंट पर दें ध्यान:
म्यूचुअल फंड में निवेश से अच्छा रिटर्न की उम्मीद जल्दी न करें, किसी साल आपको अच्छा रिटर्न मिले और किसी साल कम रिर्टन, ऐसे में निवेश न रोकें। दरअसल म्यूचुअल फंड के जरिये शेयरों में निवेश से अच्छे रिटर्न के लिए 5 से 7 साल के समय की जरूरत होती है। देखा गया है कि लंबे समय तक शेयरों में निवेश अच्छा रिटर्न देता रहा है, इसलिए खराब रिटर्न पर अपना पैसा तुरंत न निकालें।

म्यूचुअल फंड में एसआईपी निवेशकों की चांदी, महिंद्रा स्कीम ने दिया 27.2 प्रतिशत का फायदा

बीच में न रोकें एसआईपी:
अक्सर देखा गया है कि बाजार में गिरावट आने पर निवेशक एसआईपी रोक देते हैं या पैसा निकाल लेते हैं। यहां ध्यान रखने वाली बात ये है कि गिरते बाजार के साथ शेयर भी सस्ते होते हैं और आपको कम पैसे में ज्यादा यूनिट मिलते हैं। फिर जब बाजार चढ़ता है तो आपकी यूनिटों की कीमत बढ़ जाती हैं, इसलिए एसआईपी बीच में रोकना आपके लिए घाटे का सौदा साबित होता है।


टारगेट कर करें निवेश:
म्यूचुअल फंड के तहत निवेश करने से पहले आपके अपने टारगेट साफ होने चाहिए कि आप किस काम के लिए पैसा इकट्ठा कर रहे हैं। तभी आप सही फंड चयन कर सकेंगे, जो लोग बिना टारगेट निवेश करते है वे अक्सर गलत फंड में अपना पैसा लगा देते हैं।

स्थिरता रखें:
फंड के मामले में दूसरों की देखा-देखी या खरीद-बिक्री न करें इस से आपको नुकसान हो सकता है, हर किसी के वित्तीय लक्ष्य और स्थितियां एक जैसी नहीं होती हैं। इसलिए अपने टारगेट और जेब के हिसाब से निवेश करें, कई बार हम फंड के पिछले प्रदर्शन के आधार पर निवेश करते हैं लेकिन ध्यान रखें कि फंड का रिटर्न बदलता रहता है. फंड का मूल्य हर तिमाही में बदलता है।

शेयर बाजार में भारी गिरावट के बीच SIP से बनेगी बात, इसी गिरावट में मिलेगा मल्टीबैगर रिटर्न

अगर आप लंबी अवधि के निवेशक हैं तो बाजार की गिरावट से घबराने की जरूरत नहीं है. यह एक मौका है जहां SIP को टॉप-अप करने की सलाह दी जाती है. इसका फायदा आपको लॉन्ग टर्म में मल्टी टाइम्स रिटर्न के रूप में मिलेगा.

शेयर बाजार में भारी गिरावट के बीच SIP से बनेगी बात, इसी गिरावट में मिलेगा मल्टीबैगर रिटर्न

TV9 Bharatvarsh | Edited By: शशांक शेखर

Updated on: May 15, 2022 | 10:52 AM

इस समय शेयर बाजार (Share market updates) में भारी उठापटक है. बिकवाली का दबाव हर सेक्टर के स्टॉक्स पर देखा जा रहा है. बाजार की इस हरकत से निवेशक परेशान हैं. हालांकि, फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स की सलाह है कि घबराने की जरूरत नहीं है. बाजार में इस तरह का चढ़ाव और उतार सामान्य बात है. अगर आप रिटेल निवेशक (Retail investors) हैं और बाजार के इस ट्रेंड को समझने में अक्षम हैं तो म्यूचुअल फंड के जरिए बाजार में निवेश करें. हर महीने SIP की मदद से म्यूचुअल फंड में निवेश (Mutual fund investment) करने पर आपको बाजार की गिरावट का फायदा मिलेगा और तेजी में नुकसान कम होगा. निवेशक के तौर पर लंबी अवधि के लिए अगर SIP करते हैं तो मल्टीबैगर रिटर्न मिलने की पूरी संभावना है.

SIP निवेश का ऐसा साधन है जो गिरावट के समय आपके पोर्टफोलियो को मजबूत करता है, जिसका फायदा लंबी अवधि में मिलेगा. हालांकि, किस कैटिगरी के म्यूचुअल फंड और किस स्कीम में एसआईपी करना चाहिए यह फैसला संजिदगी से लें. अगर लंबी अवधि के लिए आपने सही फंड और सही स्कीम का चुनाव किया है तो बाजार में गिरावट से घबराने की जरूरत नहीं है. बाजार में गिरावट के कारण जब यूनिट की कीमत घटेगी तो उसे टॉप-अप किया जा सकता है.

गिरावट ही निवेश का सुनहरा मौका

ईटी नाउ स्वदेश से बातचीत करते हुए केआर चोकसी के देवेन आर चोकसी ने कहा कि निवेशकों के लिए बाजार की गिरावट ही निवेश का सबसे सही मौका होता है. चोकसी ने कहा कि अगले 10-15 सालों में भारतीय शेयर बाजार 3 गुना तक बड़ी हो सकती है. ऐसे में अगर आप इतनी अवधि के लिए लगातार निवेश करते हैं तो रिटर्न लाजवाब मिलेगा. बीच-बीच में बाजार में जब भारी गिरावट आती है तो एसआईपी को टॉप-अप करना सही रणनीति होगी.

अलग-अलग सेक्टर का प्रदर्शन अलग-अलग होगा

सुंदरम AMC के सुनील सुब्रमण्यम का कहना है कि आने वाले 10-15 सालों में अलग-अलग सेक्टर का प्रदर्शन अलग-अलग होगा. ऐसे में सही सेक्टर का चुनाव करना जरूरी है. दूसरी महत्वपूर्ण बात ये है कि भारत अभी भी 7-8 फीसदी की दर से ग्रोथ करेगा. ऐसे में डोमेस्टिक आधारित फंड में निवेश करने पर रिटर्न ज्यादा मिलने की संभावना है क्योंकि लॉन्ग टर्म में भारतीय अर्थव्यवस्था का भविष्य उज्ज्वल है. अगर खास सेक्टर का चयन करने में असमर्थ हैं तो मल्टी कैप फंड्स या फ्लेक्सी कैप फंड्स को चुना जा सकता है.

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सही कैटिगरी के फंड का चुनाव करना जरूरी

नए निवेशकों के लिए सलाह है कि वे अपने लिए फंड का चुनाव करने से पहले अपना नजरिया साफ करें और सही कैटिगरी का चुनाव करें. सही कैटिगरी का चुनाव करने के बाद उस कैटिगरी के अच्छे फंड्स को चुनना निवेश का सही तरीका है. अगर आप पहली बार निवेश करने जा रहे हैं तो लॉर्ज कैप फंड्स का चयन करें क्योंकि यहां रिस्क बहुत कम होता है. रिटर्न भले ही कम हो लेकिन यह आपको नुकसान बहुत कम पहुंचाता है. जैसे-जैसे आपका निवेश बढ़ता जाएगा, आपके पोर्टफोलियो का विस्तार होता जाएगा.

एनएफओ (NFO) क्या है

आज के डिजिटल युग में शेयर मार्केट ने अपनी अलग पहचान बना ली है, कुछ सालों में इसमें इन्वेस्टर्स की संख्या में बहुत तेजी से इजाफा देखने को मिला है | कुछ लोग तो इसमें इन्वेस्टमेंट बहुत गहन अध्ययन के बाद ही करते है, तो कुछ लोग पहले से इसमें इन्वेस्ट करते आ रहे है | लेकिन जब से डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म को बढ़ावा मिला है तो छोटा इन्वेस्ट भी देखने को मिलता है | वर्तमान समय में बहुत सारे Digital App भी लांच हो चुके है, जिनके माध्यम से इन्वेस्ट करके मुनाफा कम सकते है | इसी कड़ी में एनएफओ (NFO) के जरिये भी इसमें इन्वेस्ट कर सकते है |

यदि आप Mutual Fund में invest करते हैं, और NFO में भी invest करने की सोच रहे हैं लेकिन आपके मन में NFO को लेकर कई सारे doubts हैं, तो यहाँ एनएफओ (NFO) क्या है तथा एनएफओ का फुल फॉर्म क्या होता है, NFO में Invest कैसे करें ? इसे जानने के लिए इस आर्टिकल को पूरा पढ़ें। इसमें हमने NFO से संबंधित सम्पूर्ण जानकारी दी है, जिससे आपके NFO से संबंधित सभी Doubts Clear हो जाएंगे।

एनएफओ (NFO) क्या है?

Table of Contents

जब भी कोई AMC यानि की “Asset Management Company” या फिर “MUTUAL FUND COMPANY” एक नया फंड लॉन्च करती है, तो वह अपना NFO लॉन्च करती है। जब कोई कंपनी अपना NFO लॉन्च करती है तो उसमें investors को आकर्षित करने के लिए उस फंड में कुछ ऑफर देती है और उसके NAV (Net Asset Value) की price को भी काफी कम रखते हैं, ताकि ये निवेशकों को आकर्षित कर सके। वर्तमान समय में जितने भी NFO आ रहे हैं, उसकी Minimum Price 10 रुपए से स्टार्ट होती है।

एनएफओ का फुल फॉर्म

एनएफओ (NFO) का अंग्रेजी में फुल फॉर्म “NEW FUND OFFER” होता है, तथा इसका हिंदी उच्चारण “न्यू फण्ड ऑफर” होता है, तथा हिंदी में इसका अर्थ “नया निधि प्रस्ताव” होता है|

क्या NFO (NEW FUND OFFER) में निवेश करना चाहिए?

अगर आप NFO में निवेश करने की सोच रहे हैं तो यह आपके लिए एक महत्वपूर्ण प्रश्न है, आप इसे इस तरह से समझ सकते हैं –

  • जब भी आप किसी mutual fund company में निवेश करते हैं तो आप उसके बारे में काफ़ी रिसर्च करते हैं जैसे कि कंपनी ने पिछले 5 years या फिर 10 years में क्या return दिया है। इसके अलावा आपक उस mutual fund company के Past Behavior का भी पता कर सकते हैं और ये भी आसानी से पता चल जाता है, कि उसके उस फंड ने कितना रिटर्न दिया और उसने कहां कहां निवेश किया था।
  • लेकिन वहीं बात जब NFO की जाए तो ये हमारे लिए बिल्कुल नई होती है। हमे इसका experience नहीं होता है और हमे ये भी पता नहीं चल पाता है कि ये आने वाले समय में हमे कितना रिटर्न्स दे सकती है।
  • न्यू म्यूचरल फंड में यानी NFO में NAV की price काफी कम होती है, जिसे देखकर लोग उसकी तरफ आकर्षित होते हैं।
  • इसलिए हम आपको बता दें, इससे कोई मतलब नहीं होता है कि किसी फंड का NAV price कितना है।
  • कहने का मतलब है कि यदि आपने 1000 रूपए को किसी NFO में लगाया और 1000 रूपए को ही किसी और अन्य फंड में लगाया तो दोनों लगभग आपको एक जैसा ही रिटर्नस ही देती है।
  • एक फैक्टर यहां पर बहुत मायने रखता है कि कंपनी किस तरह से काम करती है यदि NFO की MUTUAL FUND अच्छा वर्क कर जाए तो वह आपको अच्छा रिटर्न दे जाएगी और अगर अच्छा Work NAV क्या है ना करे तो अच्छा रिटर्न नही दे पाएगी।
  • लेकिन यदि आप पुराने MUTUAL FUND जिसमें निवेश कर रहे हैं तो हो सकता है वो आपको ज्यादा Returns दे जाए।
  • इसलिए यदि आप इस बात से आकर्षित हो रहे हो कि इसकी NAV की PRICE कम है, और इसके NAV की PRICE ज्यादा है, तो यह कोई मायने नहीं रखता है।
  • कुल मिलाकर अंत में यही निष्कर्ष निकलता है, कि आप NFO में निवेश करने के स्थान पर ऐसे फंड्स में निवेश करें जिसका अपना एक Strong Track Record हो।

NFO में Invest कैसे करें?

Mutual fund NFO में निवेश तभी संभव है, जब आपके पास 15 दिनों की सदस्यता अवधि हो। पहले इसमें अवधि की सीमा 45 दिनों की होती थी। आप NFO में निवेश One Time या SIP के द्वारा आसानी से कर सकते हैं। यहां हम आपको सलाह देंगे, आप एनएफओ में निवेश गहन विश्लेषण करने के बाद ही करें। यदि शेयर मार्केट Down है या फिर Market में मंदी छा रही है, तब आप निवेश जरूर करें।

एनएफओ (NFO) का ट्रैक रिकॉर्ड नहीं

अभी यह एक नया फंड है, इसलिए इसका कोई भी ट्रैक रिकॉर्ड नहीं मौजूद होता है, जिस वजह से हम निवेश का निर्णय जल्दी नहीं ले सकते है | इसलिए इसके अधिकतर निवेशक, फंड हाउस के पहले का रिकॉर्ड चेक करके NFO में निवेश करते हुए नजर आते हैं, परन्तु सही मायने में देखा जाये तो यह भी सही रणनीति नहीं कहीं जा सकती है | क्योंकि नए निवेश रणनीति के समक्ष नई चुनौतियां देखने को मिलती हैं, और आपको उसका अनुमान लगाना मुश्किल होता है, कि यह फंड कामयाब हो भी पायेगा या फिर नहीं | इसलिए सदैव ऐसे फंड में निवेश का विकल्प सही होता है, जिसका ट्रैक रिकॉर्ड अच्छा होता है |

एनएफओ (NFO) लॉन्चिंग टाइम

इन्वेस्ट मार्किट में यदि कोई एनएफओ किसी खास समय पर लॉन्च हुआ होता है, तो उसके लिए यह जरूरी नहीं है, कि इस समय इसमें निवेश करने का निर्णय सही हो सकता है | एएमसी (AMC) अपने प्रोडक्ट बास्केट यानि कि उत्पाद को और बड़ा करने या पूर्ण करने हेतु भी एनएफओ लाया जाता हैं | इसलिए यह कह सकते है, कि एनएफओ लॉन्च हुआ है, और इसमें निवेश किया जा सकता है, यह सही निर्णय अर्थात मैनेजमेंट नहीं होगा |

अगर सही मायेने में देखा जाये तो एनएफओ (NFO) में निवेश करना अंधे के तीर चलाने के बराबर है | इसलिए सही रणनीति यह है कि अनिश्चितता की बजाय ऐसे Funds में निवेश करना सही है, जिसका एक सॉलिड ट्रैक रिकॉर्ड मौजूद होता है | इससे आप अपने अनुभव और विश्लेषण के अनुसार इन्वेस्ट कर पाएंगे |

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