बेस्ट ब्रोकर

ETF में निवेश करने के जोखिम क्या हैं?

ETF में निवेश करने के जोखिम क्या हैं?

Bharat Bond ETF: बिना जोखिम बेहतर रिटर्न

फिक्स्ड इनकम इंस्ट्रूमेंट्स (fixed income instruments) में निवेश को तरजीह देने वाले निवेशकों को फिर से भारत बॉन्ड ईटीएफ (Bharat Bond ETF) में निवेश का मौका मिल सकता है क्योंकि सरकार दिसंबर में देश के इस पहले कॉरपोरेट बॉन्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड की चौथी सीरीज/चरण ETF में निवेश करने के जोखिम क्या हैं? लॉन्च ETF में निवेश करने के जोखिम क्या हैं? करने की योजना बना रही है। वर्ष 2019 में भारत बॉन्ड ईटीएफ लॉन्च की गई थी। फिलहाल इस स्कीम के पांच इश्यू उपलब्ध हैं जो कमश: 2023, 2025, 2030, 2031, और 2032 में मैच्योर होंगे। ये सारे इश्यू सरकार के द्वारा 3 चरणों में लॉन्च किए गए हैं। 5 और 10 साल की अवधि के इश्यू जो क्रमश: 2023 और 2030 में मैच्योर होंगे पहले चरण के अंतर्गत दिसंबर 2019 में लॉन्च किए गए थे। जबकि 5 और 11 साल की अवधि के इश्यू जो क्रमश: 2025 और 2031 में मैच्योर होंगे दूसरे चरण में जुलाई 2020 में लॉन्च किए गए थे। 2032 में मैच्योर होने वाले 11 वर्षीय इश्यू तीसरे चरण के अंतर्गत दिसंबर 2021 में लॉन्च किए गए। एडलवाइस एसेट मैनेजमेंट (Edelweiss Asset Management) इस ETF को मैनेज करता है।

अब इस ईटीएफ में निवेश को लेकर विस्तार से जानते हैं :

क्या है Bharat Bond ETF?

जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, यह एक ईटीएफ (एक्सचेंज ट्रेडेड फंड) स्कीम है। मतलब इसकी लिस्टिंग स्टॉक एक्सचेंज पर होती है और इसमें ट्रेडिंग की सुविधा होती है। इस स्कीम में अंडरलाइंग एसेट (underlying asset) चुनिंदा सरकारी कंपनियों के बॉन्ड हैं। अगर आप भी इस स्कीम में निवेश करना चाहते हैं तो इसके लिए डीमैट अकाउंट (demat account) का होना जरूरी है। वैसे निवेशक जिनके पास डीमैट अकाउंट नहीं है, उनके लिए भी इसमें निवेश की सुविधा है। लेकिन वे इसमें किसी भी म्यूचुअल फंड की तरह फंड ऑफ फंड्स (FoF) रूट के जरिए ही निवेश कर सकते हैं। इसमें रिटेल/आम निवेशक कम से कम 1,000 रुपए से निवेश कर सकते हैं, जबकि अधिकतम निवेश की सीमा 2 लाख रुपए है (1,000 रुपए के गुणक में)।

क्यों सुरक्षित है यह स्कीम?

नियमों के अनुसार इस स्कीम में सिर्फ AAA क्रेडिट रेटिंग वाली पब्लिक सेक्टर की कंपनियों के बॉन्ड को ही शामिल किया जा सकता है। साथ ही एक कंपनी के बॉन्ड का अधिकतम वेटेज (हिस्सेदारी) इंडेक्स में 15 फीसदी होगा। ज्यादा से ज्यादा 12 से 13 सरकारी कंपनियों के बॉन्ड इस स्कीम में हैं। एक तो पब्लिक सेक्टर की कंपनी और दूसरे ETF में निवेश करने के जोखिम क्या हैं? AAA रेटिंग के चलते कहा जा सकता है कि इस स्कीम में जोखिम नहीं के बराबर है।

कितने रिटर्न की संभावना?

सरकार ने इस स्कीम के अंतर्गत अब तक 3 चरणों में अलग-अलग समय पर मैच्योर होने वाले 5 इश्यू लॉन्च किए हैं। आने वाले समय में और अलग-अलग मैच्योरिटी पीरियड के इश्यू लॉन्च किए जा सकते हैं। अगर आप इस स्कीम में निवेश को पूरी मैच्योरिटी पीरियड तक बनाए रखते हैं तो आपको फिक्स्ड रिटर्न (इंडिकेटिव यील्ड) मिल सकता है। जिसकी जानकारी आपको स्कीम खरीदने के वक्त यानी एनएफओ (new fund offer / न्यू फंड ऑफर के दौरान) के दौरान मिलती है। लेकिन अगर आप मैच्योरिटी पीरियड के बीच में स्टॉक एक्सचेंज पर इसे बेचेंगे तो आपका रिटर्न ज्यादा या कम भी हो सकता है। यह मार्केट कंडीशंस (market conditions) खासकर उस समय की ब्याज दर में उतार-चढाव से प्रभावित होगा। इसलिए जो निवेशक फिक्स्ड रिटर्न चाहते हैं, उन्हें पूरी मैच्योरिटी पीरियड तक इस स्कीम में बने रहना होगा।

फिलहाल अप्रैल 2032 में मैच्योर होने वाले इश्यू के लिए रिटर्न (यील्ड टू मैच्योरिटी/YTM) 7.69 फीसदी है, जबकि अप्रैल 2031 में मैच्योर होने वाले इश्यू के लिए यील्ड टू मैच्योरिटी 7.67 फीसदी है। इसी तरह :

अप्रैल 2030 - YTM (7.64%)

अप्रैल 2025 - YTM (7.52%)

अप्रैल 2023 - YTM (7.23%)

इस तरह इसमें पोस्ट टैक्स रिटर्न बैंक एफडी की तुलना में ज्यादा मिल सकता है। खासकर वैसे निवेशकों को जो higher tax slab के अंतर्गत ETF में निवेश करने के जोखिम क्या हैं? आते हैं।

कितनी टैक्स अदायगी?

अगर आप तीन साल के बाद इस बॉन्ड को रिडीम करेंगे तो आपको इंडेक्सेशन की सुविधा के साथ 20.8 फीसदी (4 फीसदी सेस मिलाकर) लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स यानी LTCG चुकाना होगा। इंडेक्सेशन (Indexation) के तहत पर्चेज कॉस्ट (purchase cost) को महंगाई (कॉस्ट इंफ्लेशन इंडेक्स) के हिसाब से बढा दिया जाता है जिससे टैक्स देनदारी में कमी आती है, जबकि एफडी पर आपको अपने टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स चुकाना होता है। वहां इंडेक्सेशन की सुविधा भी नहीं मिलती। इसलिए टैक्स के मामले में भी यह एफडी के मुकाबले बेहतर है।

कितना expense?

इस स्कीम को मैनेज करने के लिए फंड हाउस को निवेश की राशि का 0.0005 फीसदी यानी दो लाख रुपये पर 1 रुपये देना होगा। जो बहुत ही कम या लगभग ना के बराबर है। हालांकि अगर कोई निवेशक 30 दिन के अंदर ही स्कीम से निकल जाता है जो उसे 0.10 फीसदी एग्जिट लोड देना होगा।

Bharat Bond ETF: बेहद कम जोखिम के साथ निवेश करने का सुनहरा मौका, 12 दिसंबर को होगा लॉन्च

Bharat Bond ETF: बेहद कम जोखिम के साथ निवेश करने का सुनहरा मौका, 12 दिसंबर को होगा लॉन्च

नई दिल्ली, बिजनेस डेस्क। छोटे रिटेल इन्वेस्टर्स को निवेश का बेहतरीन मौका मिलने वाला है। वह इसलिए क्योंकि भारत बॉन्ड ईटीएफ का पहला इश्यू 12 दिसंबर को लॉन्च होने जा रहा है। सबसे खास बात यह है कि यहां निवेशकों के लिए जोखिम काफी कम है। इस फंड में जिन बॉन्ड्स में निवेश किया जाएगा, उनके डिफॉल्ट होने की संभावना काफी कम होगी। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पिछले सप्ताह 4 दिसंबर को भारत बॉन्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) को लॉन्च करने की मंजूरी दी थी। ईटीएफ इश्यू सब्सक्रिप्शन के लिए यह बॉन्ड 12 से 20 दिसंबर तक खुला रहेगा। इस बॉन्ड में इन्वेस्टमेंट से जो फंड आएगा, उसे बॉन्ड इंडेक्स में शामिल कंपनियों में निवेश किया जाएगा।

जानिए क्या है भारत बॉन्ड ईटीएफ

यह एक तरह का म्युचुअल फंड होगा, जो सरकारी कंपनियों द्वारा जारी किये जाने वाले बॉन्ड में ही निवेश करेगा। यह बॉन्ड स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्टेड होगा, जिससे वहां इसकी ट्रेडिंग हो सकेगी। साथ ही इसमें एक तय मैच्योरिटी टाइम होगा। शुरुआत में यह बॉन्ड केवल AAA रेटिंग वाले बॉन्ड में ही निवेश करेगा। ज्यादा सुरक्षा और निश्चय आय वाले फंड में निवेश करने के इच्छुक निवेशकों के लिए भारत बॉन्ड ईटीएफ में निवेश करने का अच्छा मौका होगा। इस बॉन्ड को एडलवाइस असेट मैनेजमेंट कंपनी मैनेज कर रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, यह इश्यू सात हजार करोड़ का होगा।

न्यूनतम करना होगा 1,000 रुपये का निवेश

इस फंड में छोटे रिटेल इन्वेस्टर्स को कम से कम 1,000 रुपये का इन्वेस्टमेंट करना होगा। इसके बाद मल्टीपल इन्वेस्टमेंट की सुविधा है। यहां छोटे निवेशक अधिकतम 2 लाख तक इन्वेस्टमेंट कर सकते हैं। वहीं एंकर इन्वेस्टर्स के लिए न्यूनतम राशि 10 करोड़ रुपये रखी गई है। इडलवाइज ऐसेट मैनेजमेंट कंपनी ने अपनी वेबसाइट पर बताया है कि 12 दिसंबर को विंडो एंकर निवशकों के लिए होगा और उसके बाद 13 से 20 दिसंबर तक विंडो दूसरे इन्वेस्टर्स के लिए होगा।

बचेगा टैक्स

तीन साल से अधिक समय तक होल्ड रखने की स्थिति में डेट फंड्स टैक्स बचाने के लिहाज से काफी बढ़िया होते हैं। तीन साल से अधिक समय तक होल्ड रखने की स्थिति में इन पर टैक्स रेट इंफ्लेशन इंडेक्सिंग के साथ 20 फीसद होता है।

ETF में निवेश करने के जोखिम क्या हैं?

अस्वीकरण :
इस वेबसाइट पर दी की गई जानकारी, प्रोडक्ट और सर्विसेज़ बिना किसी वारंटी या प्रतिनिधित्व, व्यक्त या निहित के "जैसा है" और "जैसा उपलब्ध है" के आधार पर दी जाती हैं। Khatabook ब्लॉग विशुद्ध रूप से वित्तीय प्रोडक्ट और सर्विसेज़ की शैक्षिक चर्चा के लिए हैं। Khatabook यह गारंटी नहीं देता है कि सर्विस आपकी आवश्यकताओं को पूरा करेगी, या यह निर्बाध, समय पर और सुरक्षित होगी, और यह कि त्रुटियां, यदि कोई हों, को ठीक किया जाएगा। यहां उपलब्ध सभी सामग्री और जानकारी केवल सामान्य सूचना उद्देश्यों के लिए है। कोई भी कानूनी, वित्तीय या व्यावसायिक निर्णय लेने के लिए जानकारी पर भरोसा करने से पहले किसी पेशेवर से सलाह लें। इस जानकारी का सख्ती से अपने जोखिम पर उपयोग करें। वेबसाइट पर ETF में निवेश करने के जोखिम क्या हैं? मौजूद किसी भी गलत, गलत या अधूरी जानकारी के लिए Khatabook जिम्मेदार नहीं होगा। यह सुनिश्चित करने के हमारे प्रयासों के बावजूद कि इस वेबसाइट पर निहित जानकारी अद्यतन और मान्य है, Khatabook किसी भी उद्देश्य के लिए वेबसाइट की जानकारी, प्रोडक्ट, सर्विसेज़ या संबंधित ग्राफिक्स की पूर्णता, विश्वसनीयता, सटीकता, संगतता या उपलब्धता की गारंटी नहीं देता है।यदि वेबसाइट अस्थायी रूप से अनुपलब्ध है, तो Khatabook किसी भी तकनीकी समस्या या इसके नियंत्रण से परे क्षति और इस वेबसाइट तक आपके उपयोग या पहुंच के परिणामस्वरूप होने वाली किसी भी हानि या क्षति के लिए उत्तरदायी नहीं होगा।

We'd love to hear from you

We are always available to address the needs of our users.
+91-9606800800

गोल्ड ETF के प्रति बढ़ रहा है निवेशकों का आकर्षण, सितंबर तिमाही में हुआ करोड़ों का निवेश

COVID-19 के दौरान निवेशक जोखिम वाले पोर्टफोलियों में निवेश से कतराने लगे हैं. यही वजह है कि गोल्ड ईटीएफ में सितंबर तिमाही में 2400 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है.

Published: October 31, 2020 10:46 AM IST

गोल्ड ETF के प्रति बढ़ रहा है निवेशकों का आकर्षण, सितंबर तिमाही में हुआ करोड़ों का निवेश

COVID-19 की वजह से निवेशक जोखिम वाली चीजों में निवेश करने से बचते हुए नजर आ रहे हैं. इस कारण सितंबर तिमाही में गोल्ड ईटीएफ में 2,400 करोड़ रुपये से अधिक का शुद्ध निवेश हुआ है. एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (एएमएफआई) के पास उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल की समान तिमाही में निवेशकों ने स्वर्ण ईटीएफ में 172 करोड़ रुपये लगाए थे. निवेशकों के लिए यह श्रेणी पूरे साल बढ़िया प्रदर्शन कर रही है.

Also Read:

गोल्ड ईटीएफ के प्रति बढ़ता जा रहा है निवेशकों का आकर्षण

इसमें अब तक निवेशकों ने 5,957 करोड़ रुपये लगाए हैं. आंकड़ों के अनुसार, 30 सितंबर 2020 को समाप्त तिमाही में निवेशकों ने गोल्ड ईटीएफ में 2426 करोड़ रुपये निवेश किए.

जनवरी से सितंबर तक किया इतना निवेश

इस साल में मासिक आधार पर देखें, तो निवेशकों ने इस श्रेणी में जनवरी में 202 करोड़ रुपये और फरवरी में 1,483 करोड़ रुपये लगाये. हालांकि मार्च में उन्होंने 195 करोड़ रुपये की मुनाफा वसूली की. अप्रैल में फिर से 731 करोड़ रुपये का निवेश हुआ. इसके बाद मई में 815 करोड़ रुपये, जून में 494 करोड़ रुपये, जुलाई में 921 करोड़ रुपये, अगस्त में 908 करोड़ रुपये और सितंबर में 597 करोड़ ETF में निवेश करने के जोखिम क्या हैं? रुपये का निवेश आया.

क्या है गोल्ड ईटीएफ?

पेपर गोल्ड में निवेश करने का सबसे अच्छा तरीका गोल्ड ईटीएफ (एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स) खरीदना है. चूंकि, ईटीएफ में निवेश करने में उच्च प्रारंभिक खरीद, बीमा और यहां तक कि बिक्री की लागत शामिल नहीं होती, इसलिए यह बहुत अधिक कॉस्ट-इफेक्टिव है. ईटीएफ में निवेश करने के लिए लोगों को ऑनलाइन स्टॉकब्रोकर और डीमैट खाते से ट्रेडिंग अकाउंट की आवश्यकता होती है. एक बार अकाउंट बनने के बाद केवल गोल्ड ईटीएफ चुनने और ब्रोकर के ट्रेडिंग पोर्टल से ऑर्डर देने की बात है.

ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज अपडेट के लिए हमें फेसबुक पर लाइक करें या ट्विटर पर ETF में निवेश करने के जोखिम क्या हैं? फॉलो करें. India.Com पर विस्तार से पढ़ें व्यापार की और अन्य ताजा-तरीन खबरें

निवेश की बात: गोल्ड ETF की ओर आकर्षित हो रहे हैं निवेशक, जानिए क्या है ये और इसके फायदे

कोरोना वायरस महामारी के चलते निवेशक जोखिम भरे साधनों में निवेश करने से परहेज कर रहे हैं। इस कारण अगस्त में सोने के एक्सचेंज ट्रेडिड फंड्स (ETF) में निवेशकों की रुचि बढ़ी है।

सोना (प्रतीकात्मक तस्वीर)

कोरोना काल में लोगों को निवेश और बचत का महत्व समझ आया है। अगस्त में सोने के एक्सचेंज ट्रेडिड फंड्स (गोल्ड ETF) में सुधार आया है। पिछले महीने इसमें 24 करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित किया गया। एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन ETF में निवेश करने के जोखिम क्या हैं? इंडिया (एम्फी) के अनुसार, चालू वित्त वर्ष के पहले आठ महीनों के दौरान गोल्ड ईटीएफ में कुल प्रवाह 3,070 करोड़ रुपये रहा। इतना ही नहीं, पिछले महीने गोल्ड ईटीएफ में निवेशक फोलियो की संख्या 21.46 लाख तक पहुंच गई।

हालांकि, अगस्त 2019 से इसमें धीमी गति से सुधार हो रहा है। गोल्ड ईटीएफ में नवंबर 2020 में 141 करोड़, फरवरी 2021 में 195 करोड़ और जुलाई 2021 में 61.5 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी दर्ज की गई थी। वैश्विक स्तर पर बने सकारात्कमक रुख से पीली धातु को लेकर धारणा में सुधार आया है। जुलाई 2021 में निकासी के बाद अगस्त में सोने में निवेश सकरात्मक रहा।

क्या है ईटीएफ?
पेपर गोल्ड में निवेश करने का सबसे अच्छा तरीका गोल्ड ईटीएफ (एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स) खरीदना है। चूंकि, ईटीएफ में निवेश करने में उच्च प्रारंभिक खरीद, बीमा और यहां तक कि बिक्री की लागत शामिल नहीं होती, इसलिए यह बहुत अधिक कॉस्ट-इफेक्टिव है। ईटीएफ में निवेश करने के लिए लोगों को ऑनलाइन स्टॉकब्रोकर और डीमैट खाते से ट्रेडिंग अकाउंट की आवश्यकता होती है। एक बार अकाउंट बनने के बाद केवल गोल्ड ईटीएफ चुनने और ब्रोकर के ट्रेडिंग पोर्टल से ऑर्डर देने की बात है।

यह निवेश का एक सरल माध्यम है। इसकी खरीद-फरोख्त अन्य शेयरों की तरह स्टॉक एक्सचेंज में ही होती है। इसे स्टॉक एक्सचेंज में खरीद-बिक्री की सुविधा वाला फंड भी कहा जाता है। यह किसी इंडेक्स या कई एसेट्स के समूह को ट्रैक करता है। पूरे दिन कारोबार होने से इसकी भी कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा जाता है। बेहतर लिक्विडिटी होने की वजह से इसे कभी बेचा जा सकता है।

कैसे करता है काम?
ईटीएफ किसी इंडेक्स या एसेट को ट्रैक करता है। अगर कोई ईटीएफ बीएसई सेंसेक्स को ट्रैक करता है तो यह अपने फंड का निवेश सेंसेक्स में शामिल 30 कंपनियों के शेयरों में करेगा। यह निवेश उसी अनुपात में होगा, जितना हर कंपनी का सेंसेक्स में वेटेज होगा। आपके इस ईटीएफ में निवेश करने पर एसेट मैनेजमेंट कंपनी आपको निवेश के मूल्य के हिसाब से यूनिट्स जारी कर देगी।

गोल्ड ईटीएफ में निवेश के क्या फायदे हैं?

  • गोल्ड ईटीएफ को खरीदने और बेचने की प्रक्रिया काफी आसान है।
  • सोने की कीमतें स्टॉक एक्सचेंज में सार्वजनिक होती हैं जिससे निवेशकों के बीच पारदर्शिता बनी रहती है।
  • गोल्ड ईटीएफ पर कोई वेल्थ टैक्स नहीं लगता है।
  • कोई निवेशक एक यूनिट यानी एक ग्राम खरीद कर निवेश शुरू कर सकता है।

विस्तार

कोरोना काल में लोगों को निवेश और बचत का महत्व समझ आया है। अगस्त में सोने के एक्सचेंज ट्रेडिड फंड्स (गोल्ड ETF) में सुधार आया है। पिछले महीने इसमें 24 करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित किया गया। एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (एम्फी) के अनुसार, चालू वित्त वर्ष के पहले आठ महीनों के दौरान गोल्ड ईटीएफ में ETF में निवेश करने के जोखिम क्या हैं? कुल प्रवाह 3,070 करोड़ रुपये रहा। इतना ही नहीं, पिछले महीने गोल्ड ईटीएफ में निवेशक फोलियो की संख्या 21.46 लाख तक पहुंच गई।

हालांकि, अगस्त 2019 से इसमें धीमी गति से सुधार हो रहा है। गोल्ड ईटीएफ में नवंबर 2020 में 141 करोड़, फरवरी 2021 में 195 करोड़ और जुलाई 2021 में 61.5 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी दर्ज की गई थी। वैश्विक स्तर पर बने सकारात्कमक रुख से पीली धातु को लेकर धारणा में सुधार आया है। जुलाई 2021 में निकासी के बाद अगस्त में सोने में निवेश सकरात्मक रहा।

क्या है ईटीएफ?
पेपर गोल्ड में निवेश करने का सबसे अच्छा तरीका गोल्ड ईटीएफ (एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स) खरीदना है। चूंकि, ईटीएफ में निवेश करने में उच्च प्रारंभिक खरीद, बीमा और यहां तक कि बिक्री की लागत शामिल नहीं होती, इसलिए यह बहुत अधिक कॉस्ट-इफेक्टिव है। ईटीएफ में निवेश करने के लिए लोगों को ऑनलाइन स्टॉकब्रोकर और डीमैट खाते से ट्रेडिंग अकाउंट की आवश्यकता होती है। एक बार अकाउंट बनने के बाद केवल गोल्ड ईटीएफ चुनने और ब्रोकर के ट्रेडिंग पोर्टल से ऑर्डर देने की बात है।

यह निवेश का एक सरल माध्यम है। इसकी खरीद-फरोख्त अन्य शेयरों की तरह स्टॉक एक्सचेंज में ही होती है। इसे स्टॉक एक्सचेंज में खरीद-बिक्री की सुविधा वाला फंड भी कहा जाता है। यह किसी इंडेक्स या कई एसेट्स के समूह को ट्रैक करता है। पूरे दिन कारोबार होने से इसकी भी कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा जाता है। बेहतर लिक्विडिटी होने की ETF में निवेश करने के जोखिम क्या हैं? वजह से इसे कभी बेचा जा सकता है।

कैसे करता है काम?
ईटीएफ किसी इंडेक्स या एसेट को ट्रैक करता है। अगर कोई ईटीएफ बीएसई सेंसेक्स को ट्रैक करता है तो यह अपने फंड का निवेश सेंसेक्स में शामिल 30 कंपनियों के शेयरों में करेगा। यह निवेश उसी अनुपात में होगा, जितना हर कंपनी का सेंसेक्स में वेटेज होगा। आपके इस ईटीएफ में निवेश करने पर एसेट मैनेजमेंट कंपनी आपको निवेश के मूल्य के हिसाब से यूनिट्स जारी कर देगी।

रेटिंग: 4.21
अधिकतम अंक: 5
न्यूनतम अंक: 1
मतदाताओं की संख्या: 216
उत्तर छोड़ दें

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा| अपेक्षित स्थानों को रेखांकित कर दिया गया है *