भारत में क्रिप्टोकरेंसी व्यापार

मार्जिन क्या है?

मार्जिन क्या है?

बैं​कों ने बढ़ाई उद्योग की कुल कमाई

जिंसों के दामों में तेजी और ऊंची मुद्रास्फीति से भारतीय उद्योग जगत की ज्यादातर कंपनियों के मुनाफे पर दबाव देखा गया लेकिन बैंक सहित वित्तीय सेवा क्षेत्र की फर्मों की कमाई बेहतर बनी रही। चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में उद्योग जगत के कुल मुनाफे में बैंकों, वित्तीय, बीमा और शेयर ब्रोकिंग (बीएफएसआई) उद्योग की हिस्सेदारी 41.5 फीसदी के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर रही। कुल मुनाफे में बीएफएसआई उद्योग की हिस्सेदारी पिछले 10 साल के औसत 21.8 फीसदी से करीब दोगुनी हो गई।

बीएफएसआई सेगमेंट की कमाई में बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब गैर-वित्तीय कंपनियों को ऊंची ब्याज दरों के कारण मुनाफे पर दबाव का सामना करना पड़ रहा है। बिज़नेस स्टैंडर्ड के नमूने में शामिल 450 बीएफएसआई कंपनियों का समायोजित शुद्ध मुनाफा जुलाई-​सितंबर तिमाही में 86,000 करोड़ रुपये रहा जो सालाना आधार पर करीब 33 फीसदी

अ​धिक है और कोविड से पहले यानी अप्रैल-जून 2019 तिमाही के 30,000 करोड़ रुपये से करीब तीन गुना हो गया है। सबसे ज्यादा फायदा बैंकों को हुआ है जिनके कुल मुनाफे में सालाना आधार पर 35.8 फीसदी की बढ़ोतरी देखी गई।

इसकी तुलना में नमूने में शामिल गैर-बीएफएसआई कंपनियों का समेकित समायोजित शुद्ध मुनाफा चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में 20 फीसदी कम रहा। परिचालन लागत और वित्तीय लागत ज्यादा होने की वजह से इन कंपनियों के मुनाफे में कमी आई है।

कंपनियों के प्रदर्शन में इस विरोधाभास को देखते हुए कुछ विश्लेषक यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या ऋणदाताओं के लाभ में बढ़ोतरी गैर-बीएफएसआई क्षेत्रों के नुकसान की बदौलत आई है। सिस्टमैटिक्स इंस्टीट्यूशनल इ​क्विटी में निदेशक और इ​क्विटी एवं शोध प्रमुख धनंजय सिन्हा ने कहा, ‘सितंबर में समाप्त तिमाही में बैंकों ने बेहतरीन प्रदर्शन किया है। उधारी में वृद्धि, जमा पर ब्याज दरों में कम बढ़ोतरी और जो​खिम उठाने की क्षमता बढ़ने का उन्हें लाभ मिला है। हालांकि बैंकों के मुनाफे में वृद्धि गैर-वित्तीय कंपनियों पर बढ़ते ब्याज दरों के बोझ को प्रतिबिंबित करता है।’

बीएफएसआई कंपनियों की सकल ब्याज आय चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में सालाना आधार पर 14.9 फीसदी बढ़ी है जबकि ब्याज व्यय में 13.6 फीसदी वृ​द्धि हुई है। इससे उनके शुद्ध ब्याज मार्जिन में सुधार हुआ है। महामारी के बाद से यह रुझान बना हुआ है। मार्च 2020 तिमाही में भी बीएफएसआई कंपनियों की सकल ब्याज आय 32.3 फीसदी बढ़ी थी।

विश्लेषकों का कहना है कि बीएफएसआई कंपनियों और बाकी उद्योग जगत के मुनाफे में बढ़ता अंतर लंबे समय तक बना नहीं रह सकता और आने वाली तिमाहियों में यह उलट सकता है। सिन्हा ने कहा, ‘अगर उद्योग जगत के अन्य क्षेत्र अच्छा प्रदर्शन नहीं करते हैं तो बीएफएसआई क्षेत्र का प्रदर्शन भी प्रभावित होगा। गैर-बीएफएसआई क्षेत्र के मुनाफे पर दबाव से पूंजीगत व्यय के लिए उधारी मांग कम होगी और इसका असर बैंकों के मुनाफे पर पड़ सकता है।’

बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा, ‘यह कहना गलत होगा कि ऋणदाताओं को उधार लेने वालों की कीमत पर लाभ हुआ है। बैंकों की कमाई में वृद्धि मुख्य रूप से फंसे ऋण में कमी आने और उधारी मांग में तेजी आने की वजह से हुई है और ऐसे आगे भी बना रह सकता है।’ उनके अनुसार बीएफएसआई का बेहतर प्रदर्शन विनिर्माण क्षेत्र में गिरावट और देश के सेवा क्षेत्र में तेजी को दर्शाता है।

Gautam Adani का ये ब्रांड 'फ्री' में दे रहा फ्रेंचाइजी, रेंट भी देगी कंपनी, तगड़ी कमाई का है मौका

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अगर आप भी मार्जिन क्या है? गौतम अडानी के ब्रांड फॉर्च्यून की फ्रेंचाइजी लेते हैं तो आपको तगड़ा फायदा हो सकता है. इसमें रेंट भी कंपनी देगी, एक आदमी की सैलरी भी देगी, आउटलेट भी सेटअप कर के देगी.

गौतम अडानी (Gautam Adani) इन दिनों तेजी से अपना बिजनेस बढ़ाने में लगे हुए हैं. अगर चाहें तो आप भी गौतम अडानी के साथ जुड़कर तगड़ी कमाई कर सकते हैं. ये मुमकिन होगा अडानी विल्मर के ब्रांड फॉर्च्यून की फ्रेंचाइजी से. कंपनी अभी फॉर्च्यून मार्ट की फ्रेंचाइजी (Fortune Mart Franchise) दे रही है, वो भी शानदार ऑफर्स के साथ. आइए जानते हैं कैसे शुरू कर सकते हैं फॉर्च्यून की फ्रेंचाइजी (How To Start Fortune Mart Franchise) और कितना होगा मुनाफा.

कितना मुनाफा होगा आपको?

कंपनी का दावा है कि अगर आप इस बिजनेस में निवेश करते हैं तो आपको 140 फीसदी तक का रिटर्न मिलेगा. इसमें ग्रॉस मार्जिन 10-12 फीसदी तक का है. वहीं अगर आप फॉर्च्यून की बेकरी खोलते हैं तो आप 50-70 फीसदी का मार्जिन हासिल कर सकते हैं. इतना ही नहीं, कंपनी की तरफ से फ्रेंचाइजी लेने वाले को बहुत सारे ऑफर भी दिए जाएंगे.

क्या-क्या ऑफर दे रही है कंपनी?

कंपनी की तरफ से सबसे बड़ा ऑफर तो यही है कि आपको रेंट का सपोर्ट मिल रहा है. यानी कंपनी की तरफ से ही आपकी दुकान का रेंट दिया जाएगा. इसके अलावा भी कई सुविधाएं हैं.

  • एक आदमी की सैलरी कंपनी की तरफ से दी जाएगी.
  • कॉम्बो और डिस्काउंट ऑफर कंपनी की तरफ से सबसे पहले आपको पास आएंगे.
  • प्रमोशनल और डिजिटल एक्टिविटी भी कंपनी ही करेगी.
  • कंपनी की तरफ से बिलिंग के लिए डेडिकेटेड सॉफ्टवेयर मुहैया कराया जाएगा.
  • फॉर्च्यून ऑनलाइन ऐप के साथ इंटिग्रेशन भी कराया जाएगा.
  • करीब 2.5 लाख रुपये की लाइव बेकरी का सेटअप भी कंपनी मुफ्त में कर के देगी.
  • वहीं डिस्काउंटेड रेट पर कंपनी की तरफ से प्रोडक्ट्स की सप्लाई की जाएगी.

नो रॉयल्टी, नो फ्रेंचाइजी फीस

किसी भी फ्रेंचाइजी को लेने में सबसे ज्यादा चुभती है फ्रेंचाइजी फीस या फिर रॉयल्टी. हर महीने आप कड़ी मेहनत कर के पैसे कमाते हैं और फिर उसमें से कुछ हिस्सा फ्रेंचाइजी या रॉयल्टी के नाम पर कंपनी को चला जाए तो बुरा तो लगेगा ही. फॉर्च्यून की फ्रेंचाइजी में अच्छी बात ये है कि इसमें आपको ना तो कोई रॉयल्टी देनी होगी ना ही कोई फ्रेंचाइजी फीस चुकानी है. वहीं आपके आउटलेट को भी कंपनी की तरफ से उनके नियमों के मुताबिक डिजाइन किया जाएगा.

कितनी जगह चाहिए, कितना होगा खर्चा?

अगर आप फॉर्च्यून मार्ट खोलना चाहते हैं तो 300-800 स्क्वायर फुट तक की जगह की जरूरत होगी. वहीं अगर आप फॉर्च्यून बेकरी खोलते हैं तो आपको कम से कम 600 स्क्वायर फुट की जगह चाहिए होगी. इस बिजनेस के लिए आपको 9-12 लाख रुपये तक खर्च करने पड़ सकते हैं.

कहां करें फ्रेंचाइजी के लिए संपर्क?

फ्रेंचाइजी के लिए आप 18005729999, 7877546083, 8447755504 या 9407512913 पर फोन कर के सारी जानकारी ले सकते हैं. वहीं आप चाहे तो fortunefoods.com या adaniwilmar.com पर विजिट कर सकते हैं. इसके अलावा आप [email protected] पर भी संपर्क कर सकते हैं.

ठगों से रहें सावधान

फॉर्च्यून की फ्रेंचाइजी की खबरें सामने आने के बाद अब ठगों ने लोगों के साथ फ्रॉड करना शुरू कर दिया है. ऐसे में कंपनी की तरफ से सभी से सजग रहने के लिए कहा गया है. आपसे भी अनुरोध है कि अगर आप फ्रेंचाइजी लेने का मन बना रहे हैं तो ऊपर दी गई डिटेल पर ही संपर्क करें, उसके अलावा किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ अपनी कोई जानकारी साझा ना करें ना ही किसी को कोई पैसे दें.

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Paytm के निवेशकों को शेयर बेचने की जल्दबाजी नहीं: विश्लेषक

Paytm stock price today: वर्तमान में, यह शेयर 21.50 अंक या 3.43 फीसदी की गिरावट के साथ 605.00 रुपये के लेवल पर कारोबार करता दिख रहा है.

Paytm के निवेशकों को शेयर बेचने की जल्दबाजी नहीं: विश्लेषक

पेटीएम के 86 प्रतिशत शेयरों की लॉक-इन अवधि मंगलवार को खत्म हो गई है.

पेटीएम (Paytm) की पैरेंट कंपनी वन97 कम्युनिकेशंस (One97 Communications) के शेयरों में लगातार गिरावट का दौर जारी है. जिसकी वजह से निवेशकों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है. हालांकि, विश्लेषकों का कहना है कि Paytm की लंबी अवधि की संभावनाओं के मद्देनजर इसक निवेशकों को कंपनी के शेयर बेचने की जल्दबाजी नहीं है. पेटीएम के सबसे बड़े शेयरधारकों में अलीबाबा ग्रुप और इसकी फिनटेक कंपनी एंट ग्रुप शामिल है. इसके साथ ही सॉफ्टबैंक ग्रुप का नाम भी इसके बड़े शेयरधारकों में शुमार है. विश्लेषकों का मानना है कि पेटीएम द्वारा आईपीओ लाने से पहले के निवेशक, जिसमें बर्कशायर हैथवे, सॉफ्टबैंक, एलिवेशन कैपिटल और अलीबाबा शामिल हैं, कंपनी के शेयर बेचने की जल्दबाजी में नहीं लग रहे हैं.

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पेटीएम के शेयरों की लॉक-इन अवधि खत्म

पेटीएम के 86 प्रतिशत शेयरों की लॉक-इन अवधि मंगलवार को खत्म हो गई है. जिसके बाद अब निवेशक द्वारा कंपनी के इन शेयरों को बेचा जा सकता है. प्रॉफिटमार्ट सिक्योरिटीज के शोध निदेशक अविनाश गोरक्षकर ने पेटीएम के बारे में कहा, पेटीएम की लॉक-इन अवधि खत्म होने का शेयर की कीमत पर कोई असर नहीं दिखा, क्योंकि कंपनी के मजबूत प्रदर्शन में निवेशकों का भरोसा बना हुआ है.

इस शेयर को लेकर क्या है शेयरधारकों की राय

माना जा रहा है कि पेटीएम के आईपीओ से पहले के निवेशक, जैसे वॉरेन बफेट (बर्कशायर हैथवे), सॉफ्टबैंक, एलिवेशन कैपिटल और अलीबाबा लंबी अवधि के निवेशक हैं. इक्विटी 99 एडवाइजर्स के सह-संस्थापक राहुल शर्मा ने कहा कि विजय शेखर शर्मा की अगुवाई वाली डिजिटल कंपनी के प्रमुख निवेशक शेयर बेचने की जल्दी में नहीं हैं.

आईपीओ प्राइस के एक तिहाई नीचे गिरा शेयरों का भाव

पिछले साल नवंबर में विजय शेकर शर्मा की अगुवाई में कंपनी ने अपना इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) लॉन्च किया था. हालांकि, कंपनी के शेयरों की बाजार में लिस्टिंग अच्छी नहीं रही. पिछले कारोबारी सत्र में कंपनी के शेयर में एक फीसदी की गिरावट आई और यह शेयर 630.8 रुपये के लेवल पर जा पहुंचा.अगर आईपीओ प्राइस के तहत देखा जाए तो यह 2150 रुपये के आईपीओ प्राइस से एक तिहाई की कमी को दर्शाता है.

कंपनी के मार्जिन और रेवेन्यू में हो रहा सुधार

वर्तमान में, यह शेयर 21.50 अंक या 3.43 फीसदी की गिरावट के साथ 605.00 रुपये मार्जिन क्या है? के लेवल पर कारोबार करता दिख रहा है. पेटीएम का मार्केट कैप फिलहाल 5 अरब डॉलर है. इसके साथ ही कंपनी के मार्जिन और रेवेन्यू में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है.

(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)

सरकारी बैंकों के लिए अभी अच्छे दिन, लेकिन आने वाला समय चुनौतीपूर्ण

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चेन्नई | विशेषज्ञों का कहना है कि उधार और जमा दरों के बीच मध्यस्थता, उच्च ऋण मांग और कम ऋण प्रावधानों के कारण सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) ने वित्त वर्ष 2023 की दूसरी तिमाही और वित्त वर्ष 2023 की पहली छमाही के दौरान अच्छा मुनाफा कमाया।

विशेषज्ञों ने कहा, सरकारी बैंकों के लिए खुशी का समय बहुत लंबे समय तक जारी नहीं रह सकता है, क्योंकि जल्द ही जमा और ऋण के लिए प्रतिस्पर्धा उभरेगी, जो बदले में धन की लागत में वृद्धि करेगी और मार्जिन कम करेगी।

इसके अलावा पीएसबी प्रबंधन द्वारा कर्मचारी से अच्छे संबंध बनाए रखना भी एक महत्वपूर्ण कारक होगा।

सौरभ भालेराव, एसोसिएट डायरेक्टर बीएफएसआई रिसर्च, केयर रेटिंग्स ने आईएएनएस को बताया, "पीएसबी की लाभप्रदता के महत्वपूर्ण स्तरों को मजबूत ऋण मांग, बढ़ती उधार दरों और जमा दरों में कमी, कम ऋण प्रावधानों के कारण कम ऋण लागत और एनपीए (गैर-निष्पादित परिसंपत्ति) के स्तर को कम करने से सहायता मिली।"

उन्होंने यह भी कहा कि बढ़ती पैदावार का असर वित्त वर्ष 2023 की पहली तिमाही जैसा गंभीर नहीं था।

भालेराव ने कहा, "इसके अलावा, यह प्रदर्शन उच्च खराब ऋणों, सरकार द्वारा पूंजी डालने और व्यापार में बाजार हिस्सेदारी (जमा के साथ-साथ ऋण) के नुकसान की पृष्ठभूमि के खिलाफ आया है।"

केयर रेटिंग्स ने कहा, "वित्त वर्ष 2023 में सकल एनपीए अनुपात पांच प्रतिशत से कम होने और आर्थिक विस्तार, उच्च वसूली और विभिन्न परिसंपत्ति पुनर्निर्माण कंपनियों को एनपीए के प्रस्तावित हस्तांतरण के कारण वित्त वर्ष 2024 में लगभग 4.3 प्रतिशत के पूर्व-परिसंपत्ति गुणवत्ता समीक्षा (एक्यूआर) के स्तर तक पहुंचने की उम्मीद है।"

सात नवंबर को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि 12 पीएसबी ने क्वार्टर 2 एफवाई 23 और एचवनएफवाई23 के दौरान शानदार शुद्ध लाभ दर्ज किया।

उन्होंने ट्वीट में कहा, "एनपीए को कम करने और पीएसबी के स्वास्थ्य को और मजबूत करने के लिए हमारी सरकार के निरंतर प्रयास अब ठोस परिणाम दिखा रहे हैं। सभी 12 पीएसबी ने 2023 की दूसरी तिमाही में 25,685 करोड़ रुपये का और पहली छमाही में 40,991 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ घोषित किया।"

सीतारमण ने भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के वर्ष 2023 की दूसरी तिमाही में मुनाफे को 13,265 करोड़ रुपये (74 प्रतिशत की वृद्धि), केनरा बैंक को 2,525 करोड़ रुपये (89 प्रतिशत), यूको बैंक को 504 करोड़ रुपये (145 प्रतिशत) और बैंक ऑफ बड़ौदा 3,312.42 करोड़ रुपये (58.70 प्रतिशत) बताया।

एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज के वरिष्ठ शोध विश्लेषक आनंद दामा ने आईएएनएस को बताया, "हमारा मानना है कि पीएसबी ने दूसरे क्वार्टर में अच्छा लाभ दर्ज किया है। मुख्य रूप से ऋण वृद्धि में सार्थक सुधार, परिसंपत्ति पुनर्मूल्यांकन के पीछे मार्जिन और कम ऋण हानि प्रावधानों के कारण बैंकों को पुराने एनपीए पर अच्छी तरह से प्रावधान किया गया है, जबकि बेहतर एनपीए के कारण नया एनपीए गठन कम रहा है।"

मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने हाल की तिमाहियों में रेपो दर में 190 आधार अंकों की बढ़ोतरी की है।

जबकि बैंकों ने अपनी बढ़ी हुई लागत को उधारकर्ताओं पर पारित कर दिया, वही लाभ जमाकर्ताओं को नहीं दिया गया और इस तरह उनके शुद्ध ब्याज मार्जिन (एनआईएम) में वृद्धि हुई।

आरबीआई के अनुसार कुल जमा में सीएएसए जमा की हिस्सेदारी पिछले तीन वर्षों (2020, 2021 और 2022 के जून में क्रमश: 42 प्रतिशत, 43.8 प्रतिशत और 44.5 प्रतिशत) से बढ़ रही है।

एमके ग्लोबल के दामा का मानना है कि सरकारी बैंक सुखद समय का आनंद लेते रहेंगे।

भालेराव ने कहा, "बैंकों के बीच जमा को आकर्षित करने के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ने की उम्मीद है, क्योंकि खुदरा ऋण का उठाव जारी है, साथ ही चुनिंदा बुनियादी ढांचे के क्षेत्रों में कॉर्पोरेट मांग बढ़ रही है और पूंजी बाजार उधार दरों में वृद्धि के कारण कॉरपोरेट्स बैंकों में जा रहे हैं।"

इसके अतिरिक्त वृद्धिशील प्रावधान कम रह सकते हैं, क्योंकि पुनर्गठित संपत्तियों से स्लिपेज महत्वपूर्ण होने का अनुमान नहीं है और यह कि कॉर्पोरेट एनपीए चक्र नीचे आ गया है, लेकिन रिटेल और एमएसएमई बुक से स्लिपेज एक महत्वपूर्ण निगरानी बनी हुई है।

भालेराव ने कहा, 'नतीजतन, वित्त वर्ष 24 की पहली छमाही में मार्जिन पर कुछ असर देखा जा सकता है।'

विशेषज्ञों के अनुसार, कॉर्पोरेट क्षेत्र के साथ-साथ खुदरा क्षेत्र द्वारा ऋण लेने में वृद्धि के साथ, बैंकों को किसी समय सावधि जमा पर अपनी ब्याज दरों में वृद्धि करनी होगी।

विशेषज्ञों के अनुसार, कॉरपोरेट क्षेत्र के साथ-साथ खुदरा क्षेत्र द्वारा ऋण लेने में वृद्धि के साथ, बैंकों को किसी समय सावधि जमा पर अपनी ब्याज दरों में वृद्धि करनी होगी।

इसका परिणाम यह हो सकता है कि जमाराशियों को कासा से सावधि जमाओं में स्थानांतरित किया जा रहा है और लागत में वृद्धि हो रही है। यह भी ध्यान दिया जाना चाहिए कि बचत खातों में अपना पैसा रखने के लिए बैंक जमाकर्ताओं के बीच एक प्रवृत्ति रही है।

ऋण देने वाले पक्ष में प्रतिस्पर्धा के परिणामस्वरूप उधार दरों में कमी हो सकती है, जो बदले में, उनके एनआईएम कुशन को कम करेगा।

कोटक सिक्योरिटीज ने एक रिपोर्ट में कहा है कि निजी बैंकों ने चालू खाते और कॉरपोरेट सेगमेंट में अपनी बाजार हिस्सेदारी बढ़ाई है, जबकि सार्वजनिक बैंक घरेलू और सरकारी क्षेत्रों में लगातार हिस्सेदारी खो रहे हैं।

एक शोध रिपोर्ट में, एसबीआई के समूह मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ. सौम्य कांति घोष ने कहा कि भले ही वाणिज्यिक बैंक चुनिंदा जमाओं पर अपनी ब्याज दरों में वृद्धि कर रहे हैं, लेकिन उनकी मूल निधि लागत पर जोखिम प्रीमियम को क्रेडिट जोखिम में शामिल नहीं किया गया है।

ताजा पूंजी प्रवाह और पीएसबी की बैलेंस शीट की सफाई एक आवर्ती प्रकृति है और एनपीए के ऊपर चढ़ने का जोखिम भी है।

बैंकिंग क्षेत्र के एक विशेषज्ञ ने पहचान जाहिर न करने की शर्त पर बताया कि कॉरपोरेट सेक्टर को कर्ज दिया जा रहा है और अगर अर्थव्यवस्था नीचे जाती है तो एनपीए बढ़ेंगे और कर्ज देना भी कम हो सकता है।

विशेषज्ञ ने यह भी कहा कि भारतीय लेखा मानक के अनुप्रयोग से पीएसबी द्वारा प्रावधानीकरण में वृद्धि हो सकती है।

इसके अलावा, निजी और छोटे वित्त बैंकों से प्रतिस्पर्धा के खिलाफ पीएसबी की निरंतर सफलता प्रबंधन द्वारा मानव संसाधन को संभालने पर निर्भर करती है।

अखिल भारतीय बैंक कर्मचारी संघ (एआईबीईए) के महासचिव सीएच. वेंकटचलम के अनुसार, हाल की अवधि में, प्रबंधन के हमले/उत्पीड़न न केवल बढ़ रहे हैं, बल्कि इन सभी हमलों में एक सामान्य सूत्र है।

वेंकटचलम ने कहा कि बैंक ऑफ महाराष्ट्र जैसे सरकारी बैंक ट्रेड यूनियन अधिकारों से इनकार कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, मार्जिन क्या है? सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में जंगल राज है, जिसमें प्रबंधन अंधाधुंध तबादलों का सहारा ले रहा है। 3,300 से अधिक लिपिक कर्मचारियों को द्विदलीय निपटान और बैंक स्तर के समझौते का उल्लंघन करते हुए एक स्टेशन से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित किया गया है।

Multibagger stock: केमिकल स्टॉक का कमाल, केवल 13500 रुपये लगाने वाले बन गए करोड़पति

Multibagger Stock: दीपक नाइट्राइट (Deepak Nitrite) केमिकल कंपनी की स्थापना साल 1970 में की गई थी. यह कंपनी एग्रोकेमिकल्स, कलरेंट्स, रबर, फार्मास्यूटिकल्स, स्पेशलिटी और फाइन केमिकल्स सहित रसायनों के एक स्पेक्ट्रम का उत्पादन करती है. इसके सीईओ मौलिक मेहता हैं.

केमिकल कंपनी दीपक नाइट्राइट के शेयर ने चमकाई निवेशकों किस्मत

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 13 नवंबर 2022,
  • (अपडेटेड 13 नवंबर 2022, 11:48 AM IST)

कहते हैं शेयर बाजार (Stock Market) उतार-चढ़ाव से भरा हुआ है. इसमें कब कौन सा शेयर निवेशकों के लिए फायदे का सौदा बन जाए और फर्श से अर्श पर पहुंचा दे, कहा नहीं जा सकता. हम एक ऐसे ही मल्टीबैगर स्टॉक की बात कर रहे हैं, जो लंबी अवधि में इन्वेस्टर्स को मालामाल करने वाला साबित हुआ है. केमिकल सेक्टर की कंपनी दीपक नाइट्राइट (Deepak Nitrite) के शेयरों ने महज 10 साल में ही ऐसी रफ्तार पकड़ी कि निवेशकों की बल्ले-बल्ले हो गई. हालांकि, बीते कुछ दिनों से इसमें गिरावट जरूर देखने को मिली है.

लंबी अवधि का निवेश आया काम

Deepak Nitrite के शेयरों में लंबी अवधि में निवेश करने वाले ग्राहक को जोरदार फायदा हुआ है. कंपनी के शेयर साल 2010 के बाद रॉकेट की रफ्तार से भागे और जिन निवेशकों ने इसके शेयरों में महज 13,000 रुपये का निवेश किया हुआ था वो देखते ही देखते करोड़पति बन गए. इसके शेयरों में तेजी के दौर की बात करें तो 15 नवंबर 2002 को शेयर का भाव महज 2.83 रुपये था. एक दशक तक यानी 2010 कर इसके भाव धीमे-धीमे बढ़े, लेकिन इसके बाद इनमें तेजी बढ़ती ही चली गई.

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2010 के बाद ये शेयर बना रॉकेट

केमिकल कंपनी के शेयरों का भाव 1 अक्टूबर 2010 को 17.81 रुपये पर था. वहीं 5 अगस्त 2016 को ये पहली बार 100 रुपये के स्तर पर पहुंचा. 19 दिसंबर 2020 को दीपक नाइट्रेट के एक शेयर की कीमत (Deepak Nitrite Share Price) बढ़कर 922 रुपये पर पहुंच गई थी. इसके बाद बीते दो सालों में शेयरों की तेजी पर ब्रेक नहीं लगा और 15 जनवरी 2021 को इसने 1000 रुपये का स्तर पार कर लिया. बीते साल 14 अक्टूबर 2021 को यह अपने ऑल टाइम हाई 2897.80 रुपये पर पहुंच गया. हालांकि, इसके बाद इसमें गिरावट आनी शुरू हो गई.

इस साल दर्ज की गई गिरावट

साल 2022 की शुरुआत में 14 मार्जिन क्या है? जनवरी को दीपक नाइट्रेट के शेयर की कीमत 2,659.85 रुपये थी, जो 20 मई 2022 को 1,964.85 रुपये पर आ गई. हालांकि, इनमें एक बार फिर से मामूली सुधार आया और बीते सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार 11 नवंबर को कंपनी का शेयर 2119 रुपये के स्तर पर बंद हुआ. कंपनी का मार्केट कैप 28,901.69 करोड़ रुपये है.

निवेशकों की किस्मत चमकाने वाला शेयर

भले ही ये शेयर निवेशकों (Share Investors) की किस्मत चमकाने वाला साबित हुआ है लेकिन बीते कुछ समय में इस शेयर में आई गिरावट के चलते ब्रोकरेज हाउस ने इसका बिक्री रेटिंग बरकरार रखा है. हालांकि, इसके शेयरों में रिकवरी का दौर भी जारी है. एचडीएफसी सिक्योरिटीज के मुताबिक कच्चे माल, यूटिलिटी और लॉजिस्टिक की ऊंची लागत का कंपनी के मार्जिन पर दबाव रहेगा.

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