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उच्च रिटर्न के साथ स्मार्ट इन्वेस्टमेंट

उच्च रिटर्न के साथ स्मार्ट इन्वेस्टमेंट
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म्यूचुअल फंड के साथ जुड़े हैं ये रिस्क, जानिए कैसे रहेंगे इनसे दूर

Lump Sum & SIP: आपके लिए क्या सही है, और कब?

निवेशक अपने फंड को दो तरह से बाजार में लगा सकते हैं। यह एकमुश्त (Lump Sum) या सिप (SIP) दोनों में से कुछ भी हो सकता है। अलग-अलग परिस्थितियों में दोनों ही कारगर साबित हो सकती हैं। इस आर्टिकल में हम आपको यह समझाने की कोशिश करेंगे कि आखिर इन दोनों का नफा-नुकसान क्या है व आपके लिए दोनों में से कौन सी ज्यादा कारगर उच्च रिटर्न के साथ स्मार्ट इन्वेस्टमेंट है।

Lump Sum & SIP: आपके लिए क्या सही है, और कब?

नए निवेशकों के लिए निवेश एक मुश्किल काम हो सकता है। रिस्क मैनेजमेंट इसका महत्वपूर्ण हिस्सा है। आपके निवेश की ग्रोथ की संभावनाएं काफी हद तक इस बात पर निर्भर करती हैं कि आप अपना पैसा किस तरह से लगा रहे हैं।

निवेश दो तरह से किया जा सकता है:

आइए अब दोनों की ही विशेषताओं और खामियों को जानने की कोशिश करते हैं:

1) एकमुश्त निवेश (Lump Sum Investment) क्या है?

एकमुश्त (Lump Sum) निवेश का अर्थ है कि निवेशक अपनी पूंजी एक ही बार में निवेश करता है और आवश्यकता पड़ने पर ही दोबारा पूंजी लगाता है यानी टॉप अप करता है।

एकमुश्त निवेश के क्या लाभ हैं?

यह विधि आम तौर पर अनुभवी या मोटी रकम रखने वाले निवेशकों के लिए सही होती है। इस विधि में अपनी जोखिम की क्षमता को बढ़ाना भी जरूरी है।

एकमुश्त निवेश करने वाले निवेशक बाजार के उतार-चढ़ाव के रुख को अपने अनुसार मोड़ सकते हैं। यह शैली आम तौर पर उन व्यक्तियों के लिए सुविधाजनक है, जिनके पास निवेश के लिए एक बड़ी उच्च रिटर्न के साथ स्मार्ट इन्वेस्टमेंट राशि है।

एकमुश्त निवेश पर लाभ कमाने की संभावना तब अधिक होती है जब बाजार अस्थिर दौर से गुजरा हो और एक बार फिर ऊपर चढ़ने की तैयारी कर रहा हो।

Best for Your Child : बच्‍चों का भविष्‍य संवारना है आपकी जिम्‍मेदारी, चाइल्‍ड इंश्‍योरेंस के साथ अपनाये निवेश विकल्‍प

Sachin Chaturvedi @sachinbakul
Updated on: July 18, 2016 8:15 IST

Best for Your Child : बच्‍चों का भविष्‍य संवारना है आपकी जिम्‍मेदारी, चाइल्‍ड इंश्‍योरेंस के अलावा ये विकल्‍प भी हैं फायदेमंद- India TV Hindi

Best for Your Child : बच्‍चों का भविष्‍य संवारना है आपकी जिम्‍मेदारी, चाइल्‍ड इंश्‍योरेंस के अलावा ये विकल्‍प भी हैं फायदेमंद

नई दिल्‍ली। प्रत्‍येक माता-पिता बच्‍चे उच्च रिटर्न के साथ स्मार्ट इन्वेस्टमेंट के जन्‍म के साथ ही उसके बेहतर भविष्‍य के सपने संजोने शुरू कर देते हैं। लेकिन उच्च रिटर्न के साथ स्मार्ट इन्वेस्टमेंट आपका हर सपना तभी पूरा हो सकता है उच्च रिटर्न के साथ स्मार्ट इन्वेस्टमेंट जब बच्‍चे की बेहतर परवरिश और लगातार महंगी होती पढ़ाई-लिखाई के लिए हर स्‍तर के लिए आपके पास फाइनेंशियल प्‍लानिंग मौजूद हो। बच्‍चों के भविष्‍य को सुरक्षित करने के लिए इस समय मार्केट में कई इन्‍वेस्‍टमेंट टूल मौजूद हैं। लेकिन जानकारी के अभाव में आमतौर पर अधिकांश पैरेंट्स सिर्फ लाइफ इन्‍श्‍योरेंस स्‍कीम्‍स में ही निवेश करते हैं। जबकि कई इन्‍वेस्‍टमेंट टूल्‍स, इन्‍श्‍योरेंस स्‍कीम्‍स से बेहतर रिटर्न देते हैं। आपके लिए जरूरी है कि इंश्‍योरेंस के साथ ही पीपीएफ, म्‍यूचुअल फंड, यूनिट लिंक्‍ड प्‍लान जैसे विकल्‍पों में भी निवेश करें। उच्च रिटर्न के साथ स्मार्ट इन्वेस्टमेंट साथ ही यदि इंश्‍योरेंस प्‍लान भी लेते हैं उच्च रिटर्न के साथ स्मार्ट इन्वेस्टमेंट तो आपको रायडर्स लेना बहुत जरूरी है। इंडिया उच्च रिटर्न के साथ स्मार्ट इन्वेस्टमेंट टीवी पैसा की टीम अपने रीडर्स के लिए ऐसे ही चाइल्‍ड प्‍लान औ इंश्‍योरेंस राइडर्स के बारे में बताने जा रही है।

इंफ्लेशन रिस्कः

साइलेंट किलर कहा जाने वाला ये रिस्क आपके निवेश के मूल्य पर प्रभाव डालता है. 1960 में जो चीज उच्च रिटर्न के साथ स्मार्ट इन्वेस्टमेंट आप 100 रुपये में खरीद सकते थे, उसे खरीदने के लिए 2021 में आपको 7,500 रुपये खर्च करने पड़ते हैं. इसे परचेजिंग पावर रिस्क भी भी कहा जाता है क्योंकि हमारे उच्च रिटर्न के साथ स्मार्ट इन्वेस्टमेंट द्वारा उपभोग की जाने वाली वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में अचानक वृद्धि पैसे की परचेजिंग पावर को प्रभावित करती हैं. इसलिए यदि निवेशक को इंफ्लेशन की दर से अधिक रिटर्न ना मिले तो नुकसान होता है.

इस जोखिम को कैसे करेंगे कमः निवेशक को निवेश करते समय मुद्रास्फीति की दर को ध्यान में लेना चाहिए, क्योंकि यह निवेशक के दैनिक खर्च को प्रभावित करता है. इंफ्लेशन रेट से अधिक रिटर्न मिले ऐसे साधनो में निवेश करना चाहिए. आप स्टॉक म्यूचुअल फंड्स में निवेश करके इंफ्लेशन रिस्क को दूर रख सकते हैं.

लिक्विडिटी रिस्कः

यह जोखिम तब उत्पन्न होता है जब निवेशक बिना किसी नुकसान के अपने को रीडिम करने में असमर्थ होता है. म्यूचुअल फंड में, इक्विटी-लिंक्ड फंड (ELSS) इस जोखिम का सामना करते हैं क्योंकि इनमें 3 साल का लॉक-इन पीरियड होता हैं, इसलिए निवेशक इस अवधि के दौरान इन्हें रीडिम नहीं कर सकता हैं, और यदि करता हैं तो उसे नुकसान जेलना पडता हैं. यहां तक कि एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETFs) भी इस जोखिम से प्रभावित होते हैं क्योंकि जरूरत के समय आपको कम खरीदार मिल सकते हैं.

इस जोखिम को कैसे करेंगे कमः इस जोखिम को कम करने के लिए निवेशक को लिक्विड फंड के साथ बेलेंस बनाना चाहिए. आपको म्यूचुअल फंड का चयन करने से पहले यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वह कितना लिक्विड है. यदि उसमें लॉक-इन पीरियड हैं तो आपको यह सुनिश्चित करना चाहिए कि आपको उतनी अवधि के दौरान रिडीम करने की जरूरत पड़ेगी या नहीं. आपको लिक्विडिटी बनाए रखने के लिए लिक्विड फंड, बैंक एफडी जैसे साधनों में थोड़ा निवेश रखना चाहिए.

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