विदेशी मुद्रा सफलता की कहानियां

क्यों सरकार विदेशी बॉन्ड जारी करती है

क्यों सरकार विदेशी बॉन्ड जारी करती है
ICICI का कहना था कि कंपनीज एक्ट 1956 और 2013 के तहत क्यों सरकार विदेशी बॉन्ड जारी करती है पति का भाई रिलेटिव की कैटेगरी में नहीं आता है, इसलिए बैंक के किसी भी अधिकारी द्वारा इस तरह के रिश्ते के किसी भी प्रकटीकरण की कोई आवश्यकता नहीं है।

मॉनेटरी पॉलिसी में किसी बड़े बदलाव से बॉन्ड मार्केट प्रभावित होगा- रघुराम राजन

What is foreign currency reserves, क्या है विदेशी मुद्रा भंडार, क्या हैं क्यों सरकार विदेशी बॉन्ड जारी करती है इसके मायने ?

Foreign currency reserve kya hai:- किसी भी देश के इकॉनमी के लिए विदेशी मुद्रा भंडार का होना बहुत ही जरुरी है। इस लेख में हम नजर डालने वाले है क्या होता है विदेशी मुद्रा भंडार, क्या हैं इसके मायने ? और इससे संबधित महत्वपूर्ण जानकारी के बारे में… किसी भी देश के इकॉनमी के लिए विदेशी मुद्रा भंडार का होना बहुत ही जरुरी है। ऐसा माना जाता क्यों सरकार विदेशी बॉन्ड जारी करती है है कि जिसे देश की विदेशी मुद्रा भंडार ज्यादा होगा उस देश के लिए अच्छा रहेगा। विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी देश के केंद्रीय बैंक द्वारा रखी गई क्यों सरकार विदेशी बॉन्ड जारी करती है धनराशि या अन्य परिसंपत्तियां हैं ताकि जरूरत पड़ने पर वह अपनी देनदारियों का भुगतान कर सकें। इस तरह की मुद्राएं केंद्रीय बैंक जारी करता है।

दरअसल 1990 में चंद्रशेखर प्रधानमंत्री के सात महीने के शासन काल में देश की आर्थिक स्थिति बेहद खराब थी। तब भारत की इकॉनमी भुगतान संकट में फंसी हुई थी। इसी समय रिजर्व बैंक ने 47 टन सोना गिरवी रख कर कर्ज लेने का फैसला किया। उस समय के गंभीर हालात का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि देश का विदेशी मुद्रा भंडार 1.1 अरब डॉलर ही रह गया था। भारत की मुद्रा रुपया है, लेकिन अर्थव्यवस्था के लिए ज़्यादा डॉलर का होना बहुत ज़रूरी है। वर्ल्ड इकॉनमी में किस देश की आर्थिक सेहत सबसे मज़बूत है, इसका निर्धारण इससे भी होता है कि उस देश का विदेशी मुद्रा भंडार कितना भरा हुआ है।

What is Foreign currency reserve/Foreign currency reserve kya hai ?

विदेशी मुद्रा भंडार किसी देश के केंद्रीय बैंक द्वारा रखी गई विदेशी मुद्रा या अन्य परिसंपत्तियां हैं। विदेशी मुद्रा भंडार में विदेशी मुद्रा (foreign exchange), गोल्ड रिजर्व( Gold reserve, एसडीआर और आईएमएफ कोटा डिपाजिट(), ट्रेज़री बिल (Treasury bills), बॉन्ड और अन्य सरकारी प्रतिभूतियों () शामिल होतीं हैं। जरूरत पड़ने पर इस भंडार से देनदारियों का भुगतान किया जाता है। विदेशी मुद्रा भंडार को फॉरेक्स रिजर्व भी कहा जाता है। RBI (Reserve Bank Of India) भारत में विदेशी मुद्रा भंडार का संरक्षक है।

दुनिया भर के विदेशी मुद्रा भंडार में प्रभुत्व डॉलर का ही यानि डॉलर सबसे उपर है। आप बाज़ार जाते हैं तो जेब में रुपए लेकर जाते हैं। इसी तरह भारत को किसी अन्य देश से तेल ख़रीदना होता है तो वहां रुपए नहीं डॉलर देने होते हैं। जैसे उदाहरण को तौर पर समझे तो भारत ने फ़्रांस से रफ़ाल लड़ाकू विमान ख़रीदा तो भुगतान डॉलर में करना पड़ा न कि रुपए में। मतलब रुपया राष्ट्रीय मुद्रा है, लेकिन भारत को अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए डॉलर की शरण में ही जाना पड़ता है।

इकोनॉमी के लिए क्यों जरूरी है फॉरेक्स रिजर्व?

देश की इकॉनमी में विदेशी मुद्रा भंडार का अहम योगदान होता है। इसे एक उदाहरण से समझते हैं। पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर नवंबर 1990 में सात महीनों के शासन काल में देश की आर्थिक स्थिति बेहद खराब थी। तब भारत की इकॉनमी भुगतान संकट में फंसी हुई थी। इसी समय रिजर्व बैंक ने 47 टन सोना गिरवी रख कर कर्ज लेने का फैसला किया। उस समय के गंभीर हालात का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि देश का विदेशी मुद्रा भंडार 1.1 अरब डॉलर ही रह गया था। हालात यह हो गई थी कि इतनी रकम तीन हफ्तों के आयात के लिए पर्याप्त नहीं थी।

किसी भी वस्तु या सेवा की क़ीमत उसकी मांग और आपूर्ति पर निर्भर करती है। अगर रुपए की मांग कम है तो उसकी क़ीमत भी कम होगी और डॉलर की मांग ज़्यादा है, लेकिन उसकी आपूर्ति कम है तो उसकी क़ीमत ज़्यादा होगी। आपूर्ति तब ही पर्याप्त होगी जब उस देश का विदेशी मुद्रा भंडार पर्याप्त होगा।

चंदा कोचर मामले में मोदी सरकार क्यों बना रही है सीबीआई अधिकारियों पर दबाव

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चंदा कोचर के पति के भाई राजीव कोचर एविस्टा एडवाइजरी के मालिक हैं। सिंगापुर स्थित फाइनेंशियल कंपनी एविस्टा एडवाइजरी ही वो ही कंपनी है, जिसने ICICI समेत ओर बैंकों से पिछले 6 साल में 7 कंपनियों को 1.7 अरब डॉलर से अधिक के विदेशी मुद्रा और लोन दिलवाया है। इन सभी ने ICICI बैंक से एक ही समय पर कर्ज लिया था.

स्वतंत्र टिप्पणीकार गिरीश मालवीय की टिप्पणी

चंदा कोचर के मामले में सरकार सीबीआई अधिकारियों पर दबाव इसलिए बना रही है ताकि आईसीआईसीआई बैंक में किये गए पहले के और बड़े भ्रष्टाचार के भेद न खुलने पाए।

Gold Bond: सोना खरीदने वालों के खुशखबरी ! आप भी चाहते है सस्ते भाव में सोना खरीदना, फटाफट करें सरकार की इस योजना मे आवेदन

gold bod yojna

Gold Bond scheme: अगर आप सोने में निवेश करना चाहते हैं तो आपके पास शानदार मौका आ रहा है। दरअसल, सरकारी गोल्ड बॉन्ड योजना 2021-22 (Gold Bond Yojna) के लिए इश्यू प्राइस (Issue Price) 5,109 रुपये प्रति ग्राम तय किया गया है।

इसमें निवेश के लिये सोमवार से आवेदन दिया जा सकता है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने शुक्रवार को कहा कि गोल्ड बॉन्ड योजना 2021-22 की 10 वीं किस्त सब्सक्रिप्शन के लिए 28 फरवरी से 4 मार्च तक खुली रहेगी।

केंद्रीय बैंक ने क्या कहा?
केंद्रीय बैंक ने शुक्रवार को एक ब्यान में कहा, "गोल्ड बॉन्ड का आधार मूल्य (Gold Bond Base Price) 5,109 रुपये प्रति ग्राम होगा।" सरकार ने आरबीआई के साथ परामर्श के बाद ऑनलाइन आवेदन करने वाले निवेशकों को 50 रुपये प्रति ग्राम की छूट देने का फैसला किया है। इनके लिए उन्हें डिजिटल माध्यम से भुगतान करना होगा। आरबीआई ने कहा, "ऑनलाइन भुगतान करने वाले निवेशकों के लिए गोल्ड बॉन्ड का निर्गम मूल्य 5,059 रुपये प्रति ग्राम होगा।"

विनिवेश से 1.75 लाख करोड़ रुपए जुटाने का लक्ष्य

हालांकि, इसके साथ ही राजन ने कहा कि बजट में राजस्व जुटाने तथा वित्तीय क्षेत्र सुधारों को लेकर चीजें क्यों सरकार विदेशी बॉन्ड जारी करती है अधिक स्पष्ट नहीं हैं. सरकार ने चालू वित्त वर्ष में सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों तथा वित्तीय संस्थानों में हिस्सेदारी बिक्री के जरिये 1.75 लाख करोड़ रुपए जुटाने का लक्ष्य रखा है. सरकार दो सरकारी बैंकों और एक साधारण बीमा कंपनी में भी हिस्सेदारी बिक्री करेगी.

राजन फिलहाल यूनिवर्सिटी ऑफ शिकॉगो बूथ स्कूल ऑफ बिजनेस में प्रोफेसर हैं. उन्होंने कहा कि बजट में इस बात काफी कम उल्लेख है कि गरीबों और बेरोजगारों के लिए क्या किया जाएगा.

उन्होंने कहा, इसके अलावा शुल्कों में बढ़ोतरी की प्रक्रिया भी जारी है. ऐसे समय जबकि पश्चिम में भारी मांग की वजह से वैश्विक मांग बढ़ रही है, हमें निर्यात के लिए तैयारी करनी चाहिए. शुल्कों में बढ़ोतरी इसके लिए उचित तरीका नहीं है.

सरकारी बैंकों को औद्योगिक घरानों को बेचना होगी भारी गलती

दो बैंकों के निजीकरण के बारे में पूछे जाने पर राजन ने कहा कि इसका अधिक ब्योरा नहीं दिया गया है कि यह कैसे किया जाएगा. राजन ने कहा, बैंकों को औद्योगिक घरानों को बेचना भारी गलती होगी. उन्होंने कहा कि किसी अच्छे आकार के बैंक को विदेशी बैंक को बेचना भी राजनीतिक दृष्टि से व्यावहारिक नहीं होगा.

रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर ने कहा कि संभवत: निजी क्षेत्र का एक बैंक सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक के अधिग्रहण की स्थिति है, लेकिन वह इस बात को लेकर निश्चित नहीं हैं कि वह ऐसी इच्छा जताएगा.

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बता दें, चालू वित्त वर्ष के लिए सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड की यह नौवीं सब्सक्रिप्शन सीरीज है. आप 28 दिसंबर 2020 से 1 जनवरी 2021 तक इस स्कीम में निवेश कर सस्ते में डिजिटली सोना खरीद सकते हैं.

यह स्कीम भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) पेश करती है. आठवीं सीरीज के मुकाबले इस बार आपको सोने में कम भाव पर निवेश करने का मौका मिल रहा है. आठवीं सीरीज में सोने का भाव 5177 रुपये प्रति ग्राम तय किया गया था.

सरकारी गोल्‍ड बॉन्ड की कीमत बाजार में चल रहे सोने के भाव से कम होती है. बॉन्ड के रूप में आप सोने में न्यूनतम एक ग्राम और अधिकतम चार किलो तक निवेश कर सकते हैं. इस पर टैक्‍स छूट भी मिलती है. गोल्ड बांड स्‍कीम पर बैंक से लोन भी लिया जा सकता है.

बॉन्‍ड पर सालाना ढाई फीसदी का रिटर्न मिलता है. गोल्ड बॉन्ड में किसी तरह की धोखाधड़ी और अशुद्धता की संभावना नहीं होती. गोल्ड बॉन्ड 8 साल के बाद मैच्योर होते हैं. 8 साल के बाद इसे भुनाकर पैसा निकाला जा सकता है. निवेश के पांच साल के बाद इससे बाहर निकलने का विकल्प भी होता है.

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