विदेशी मुद्रा सफलता की कहानियां

अगर खुद निवेश कर रहे हैं

अगर खुद निवेश कर रहे हैं
25 रुपये के इस शेयर ने कर दिया कमाल! निवेशकों के 1 लाख को बना दिया सीधे ₹16 लाख

बदलते निवेश माहौल में नया अनुभव

करीब 15 महीने पहले हमने निजी निवेश करने का विचार किया। काफी बहस के बाद हमने यह तय किया कि इस दिशा में आगे बढ़ते हैं। हम सुनिश्चित नहीं थे कि हमें इस दिशा में आगे बढऩा चाहिए या नहीं अथवा कहीं हम गलत चयन के शिकार तो नहीं हो जाएंगे। मूल्यांकन का रुख काफी अलग नजर आया इसलिए हमने स्वयं से पूछा कि क्या हमारे पास वह मानसिक लचीलापन था जिसकी मदद से हम अपेक्षाकृत युवा कंपनियों को समझ सकें और उनमें निवेश की प्रतिबद्धता कर सकें। ज्यादातर ऐसी कंपनियां जिन्होंने कभी मुनाफा न कमाया हो। यह सवाल भी था कि कहीं हम बहुत देर से तो ऐसा नहीं कर रहे? हम ऐसे संदेहों के साथ इस क्षेत्र में घुसे। हमने अपना पहला निवेश करीब एक वर्ष पहले किया। कंपनी के साथ हमारा अनुभव अच्छा रहा। इससे हमारा आत्मविश्वास बढ़ा और हमने आगे देखना शुरू किया। बीते एक वर्ष के साथ हमने विभिन्न क्षेत्रों में कई लेनदेन किए तथा निजी क्षेत्र में तीन और निवेश किए। हमने खुद को अंतिम चरण में निवेश तक सीमित रखा।

इस अवधि मैंने जो देखा उसको लेकर मेरा प्रेक्षण इस प्रकार है:

1. कंपनियों तथा उनके संस्थापकों में संचालन, गुणवत्ता और खुलासों की सटीकता तथा मूल्य निर्माण की समझ का दायरा वैसा ही व्यापक है जैसा कि सार्वजनिक बाजार में। हम इस क्षेत्र में यह सोचकर गए थे कि संचालन सार्वजनिक बाजार से काफी बेहतर होगा क्योंकि ये सभी कंपनियां वेंचर कैपिटल तथा निजी इक्विटी फर्म के माध्यम से तैयार हुई थीं और संस्थापक प्राय: पहली पीढ़ी के उच्च शिक्षित मध्यमवर्गीय उद्यमी थे जो सिलिकन वैली की सफलता का अनुकरण करना चाहते थे। हालांकि यह अनुमान सही नहीं है। कंपनियां वही चुनती हैं जो वे दिखाना चाहती हैं।

अंकेक्षण की प्रक्रिया एक ही उद्योग की कंपनियों में अलग-अलग हो सकती है। यहां तक कि संचालन भी चकित करने वाला है और हालात ऐसे हैं कि सार्वजनिक बाजार की तरह यहां भी खुद ही सारी सतर्कता बरतना आवश्यक है।

2. हमारी मुलाकात हर तरह की प्रबंधन टीम से हुई। ऐसी टीम भी मिलीं जो पूंजी पर मिलने वाले प्रतिफल की पूरी समझ रखती थीं तो वहीं ऐसी भी मिलीं जो पूंजी को हल्के मे लेतीं और मानतीं कि पूंजी हमेशा उपलब्ध रहेगी। वे नकदी के इस्तेमाल को एक रणनीतिक हथियार मानतीं। उनके रवैये में अंतर इस बात पर निर्भर करता कि उन्हें शुरुआती पूंजी कितनी आसानी से या मुश्किल से मिली। जिन्हें शुरुआत में पूंजी जुटाने में मुश्किल हुई वे कभी पूंजी को हल्के में नहीं लेते और निवेश को लेकर अनुशासित रहते हैं।

3. आईपीओ बाजार का विस्तार अपेक्षित है। बाजार में ऐसी एक दो कंपनियां हमेशा होंगी जो मूल्यांकन पर जोर देंगी। बाजार भी जोर लगाएंगे। मुझे खुशी है कि बाजार नियामक ने प्रतिक्रिया देने का दबाव नहीं महसूस किया। स्टार्टअप के लिए आईपीओ दिशानिर्देश अच्छी तरह तैयार हैं तथा वे पर्याप्त संरक्षण मुहैया कराते हैं।

4. संस्थापकों को मूल्यांकन पर सतर्क रहने की जरूरत है। बैंकर अक्सर इस बात पर वजनदारी हासिल कर लेते हैं कि वे कंपनी के सार्वजनिक होने पर कीमतों के कितना ऊपर जाने का वादा करते हैं। बिकवाली करने वाले फंडों की रणनीति अक्सर आंतरिक वजहों से होती है मसलन प्रतिफल दिखाना, अगले फंड का गुणा गणित आदि। ज्यादातर मामलों में संस्थापक बिक्री नहीं करते हैं। हालांकि आईपीओ का अनुमानित मूल्यांकन अधिक होने की वजह से उनकी अपेक्षाएं अधिक हो जाती हैं। ज्यादातर संस्थापक संबंधित गतिविधियां नहीं समझ पाते हैं और आईपीओ मूल्यांकन बिक्री करने वाले फंडों के ऊपर छोड़ दिया है।

5. संस्थापकों को बैंकरों की रणनीति पर भी सतर्क रहना चाहिए जिसका इस्तेमाल कर वे कंपनी के हितों की चिंता किए बिना अपने बेहतरीन ग्राहकों को शेयर आवंटित करना चाहते हैं। बैंकर अपने बेहतरीन ग्राहकों को लाने के लिए आवंटन कई चरणों में करना चाहेंगे, खासकर एंकर बुक में आवंटन में वे फेरबदल करना चाहते हैं। वे ग्राहकों को इस आधार पर वरीयता देते हैं कि वे बैंक को कितना भुगतान करते हैं, न कि उन्होंने कितने लंबे समय अगर खुद निवेश कर रहे हैं अगर खुद निवेश कर रहे हैं तक निवेश किया है। नई कंपनियों के लिए दीर्घ अवधि तक साथ निभाने वाले निवेशकों को जोडऩा जरूरी है। ऐसे फंड हमेशा सबसे बड़े या सर्वाधिक कमीशन का भुगतान करने वाले नहीं होते हैं। 50-60 फंडों के बीच शेयर आवंटित करने के बजाय उन कुछ फंडों पर ध्यान केंद्रित करें जो कंपनी को समझने की कोशिश करते हैं। हाल में एक आईपीओ 40 प्रतिशत तक फिसल गया क्योंकि किसी भी फंड को अधिक आवंटन नहीं किया गया था इसलिए कोई भी कम कीमतों पर शेयर खरीदने के लिए आगे नहीं आया। संस्थापकों को आवंटन प्रक्रिया का नियंत्रण स्वयं हासिल करना चाहिए।

6. नियामकों को कंपनियों को उन मानकों की परिभाषा स्पष्ट करने के लिए कहना चाहिए जिस आधार पर वे परिचालन संबंधी आंकड़े दिखाते हैं। इसकी वजह यह है कि प्रत्येक कंपनी ग्राहक जोडऩे पर आए खर्च सहित विभिन्न खर्चों को अगर खुद निवेश कर रहे हैं अपने हिसाब से परिभाषित करती हैं। कंपनियों को भी स्वयं आगे आकर यह बताना चाहिए कि वे किस तरह निवेशकों के साथ संवाद अगर खुद निवेश कर रहे हैं करना चाहती हैं। इस स्थिति से बचा जाना चाहिए कि आईपीओ के वक्त कोई कंपनी यह कहे कि निवेशकों एवं विश्लेषकों के साथ संवाद करने का उसके पास समय नहीं है।

7. पिछले 12 महीनों में यह स्पष्ट हो गया है कि सार्वजनिक बाजार के निवेशक निजी बाजार के विशेषज्ञों से काफी अलग हटकर सोचते हैं। जब कोई कंपनी आईपीओ लाने की दिशा में कदम बढ़ाती है तो सार्वजनिक बाजार की विशेषज्ञता रखने वाले फंडों को लाने का अधिक लाभ मिलता है। बिकवाली करने वाले शेयरों के बजाय निर्गम खरीदने वाले शेयरों को शामिल करने से अधिक लाभ मिलता है। केवल बिकवाली करने वाले निवेशकों के बजाय निर्गम में बने रहना और बाद में भी साथ देने वाले कुछ निवेशकों की मौजूदगी भी जरूरी है।

8. निजी बाजार में अंतिम चरण में प्रतिस्पद्र्धा अधिक होती है मगर सूचीबद्धता के समय यह और अधिक बढ़ जाती है। सूचीबद्धता के समय कोई पर्याप्त आवंटन पाने की क्षमता सीमित हो जाती है।

9. सूचीबद्धता की तरफ कदम बढ़ा रहीं कंपनियों के पास जमा पूंजी हैरान करने वाली होती है। ज्यादातर कंपनियों के पास चीन से आई पूंजी और छोटे निवेशक होते हैं। अगर खुद निवेश कर रहे हैं सूचीबद्धता से पहले पूंजी संरचना दुरस्त करने की जरूरत होती है। छोटे निवेशक पूरी आईपीओ प्रक्रिया पर मनमाना दबाव डाल सकते हैं।

10. नए चरण में मूल्यांकन से प्रभावित होने की जरूरत नहीं है। कई मामलों में विभिन्न चरणों में मौजूदा निवेशकों का दबदबा रहता है इसलिए सार्वजनिक बाजार कितना भुगतान करेगा इसका पता नहीं चल पाता है। मुझे लगता है कि सार्वजनिक बाजार यह समझने की कोशिश करेगा कि अंतिम चरण में पूंजी जुटने के बाद आईपीओ का मूल्य तय करना उनके लिए जरूरी नहीं है।

11. निवेशकों की गुणवत्ता और पूंजी लगाने वाले लोग काफी मायने रखते हैं। पाला बदलने वाले हेज फंडों के बजाय अगर आपके पास अधिक पूंजी एवं मजबूत इरादे वाले निवेशक हैं तो इससे आपकी रणनीति, समय-सीमा और दृढ़ता पर असर नहीं होता है। कारोबार के लिए अलग पूंजी अहम होती है तो ये बातें भी किसी आईपीओ की सफलता में उतनी ही कारगर होती हैं।

12. किसी कंपनी के लिए विदेश में सूचीबद्ध होने का कोई विशेष औचित्य नहीं है। भारतीय निवेशकों ने नए कारोबारी प्रारूप को महत्त्व देने में अधिक परिपक्वता दिखाई है और बाजार ने भी गहराई और नकदी का परिचय दिया है।

आईपीओ बाजार को लेकर हमारी जानकारी अब तक जितनी है उसी हिसाब से ये बातें कही गई हैं। सूचीबद्ध होने वाली कंपनियों और कारोबारी प्रारूपों की विविधता एवं किस्म को लेकर हम खासे उत्साहित हैं। इन कंपनियों के सूचीबद्ध होने से सार्वजनिक बाजारों को फायदा होगा। प्रत्येक उद्योग में आमूल-चूल बदलाव दिख रहे हैं इसलिए पूंजी बाजार को भी यह बदलाव परिलक्षित करना चाहिए।

शेयर बाजार में बढ़ा उतार-चढ़ाव से न हों परेशान: ये वक्त लालच-घबराहट दोनों से बचे रहने का, खुद से ये 5 सवाल पूछकर ले सकेंगे निवेश का सही फैसला

शेयर बाजारों में इन दिनों भारी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। इसके चलते निवेशकों के लिए रणनीति बनाना मुश्किल हो गया है। खास तौर पर ऐसे निवेशक ज्यादा परेशान हैं, जिन्होंने 2021 में सेंसेक्स-निफ्टी के आल टाइम हाई पर पहुंचने के बाद शेयर बाजार का रुख किया अगर खुद निवेश कर रहे हैं था। इनकी तादाद काफी बड़ी है क्योंकि बीते साल लगभग 1.5 करोड़ नए लोगों ने शेयरों में निवेश शुरू किया है।

यहां गौर करने वाली बात यह है कि दिसंबर 2021 के मध्य में कई शेयरों ने वास्तविक वैल्यू से ऊपर ट्रेड किया। इसके चलते करेक्शन (अत्यधिक अगर खुद निवेश कर रहे हैं तेजी के बाद स्वाभाविक गिरावट) को लेकर चिंता बढ़ गई है। ऐसे माहौल में आपको दो रास्ते नजर आएंगे। भारी गिरावट के बाद आकर्षक वैल्युएशन पर मिल रहे शेयरों में निवेश करना और चढ़ते हुए बाजार में मौजूदा होल्डिंग के कुछ शेयरों में मुनाफा काट लेना। हो सकता है कि दोनों मामलों में आप गलती कर बैठें।

ओवर वैल्यूएशन ने बाजार में उथल-पुथल बढ़ाई
हाल ही में लिस्टेड कुछ कंपनियों के ओवर वैल्यूएशन ने बाजार में उथल-पुथल बढ़ा दिया है। पेटीएम और जोमैटो जैसे शेयरों के निवेशक ओवरवैल्यूएशन की तपिश महसूस कर रहे हैं। ऐसे निवेशकों को थोड़ा ठहरने की जरूरत है। एक्सिस सिक्युरिटीज के एमडी और सीईओ बी. गोपकुमार कहते हैं कि अगर आप निवेश को लेकर निर्णय नहीं ले पा रहे हैं तो आपको खुद से ये 5 सवाल पूछने चाहिए।

1. क्या अपनी वित्तीय योजना से भटक रहे हैं?
वित्तीय भविष्य सुरक्षित करने का प्रयास कर रहे रिटेल निवेशकों के लिए लक्ष्य-आधारित निवेश सबसे अच्छी रणनीति होती है। यह रणनीति कहती है कि बेहद आकर्षक एसेट में भी निवेश से पहले यह विचार करना चाहिए कि यह आपकी वित्तीय योजना के अनुरूप है या नहीं? यदि लक्ष्य लंबी अवधि का है तो शेयर भी वैसा ही चुनें जो लंबी अवधि में तगड़ा रिटर्न देने में सक्षम हों।

2. एसेट एलोकेशन से समझौता तो नहीं कर रहे हैं?
निवेश में एसेट एलोकेशन बहुत मायने रखता है। रिस्क उठाने की अपनी क्षमता के हिसाब से तय करें कि इक्विटी जैसे ज्यादा रिस्की एसेट में कितना निवेश करना है। वैसे समय ज्यादा हो तो इक्विटी रिस्की एसेट नहीं रह जाता, क्योंकि लंबी अवधि में इक्विटी का सबसे बेहतर रिटर्न देने का इतिहास है। अलग-अलग एसेट्स में सही तरीके से निवेश बांटने से पोर्टफोलियो बाजार के उतार-चढ़ाव से महफूज रहता है। इसलिए लालच में पड़कर समझौता न करें।

3. क्या आप शॉर्ट टर्म रिटर्न के पीछे भाग रहे हैं?
यदि आप अभी इक्विटी में निवेश शुरू कर रहे हैं, तो यह तय करना मुश्किल हो सकता है कि कौन सा शेयर खरीदें। यदि आपको लगता है कि इसकी समझ आपको नहीं है, तो बेहतर होगा कि एसआईपी के रास्ते इक्विटी में निवेश करें।

4. क्या आप बाजार को समझते हैं?
यदि आप अभी इक्विटी में निवेश शुरू कर रहे हैं, तो यह तय करना मुश्किल हो सकता है कि कौन सा शेयर खरीदें। यदि आपको लगता है कि इसकी समझ आपको नहीं है, तो बेहतर होगा कि एसआईपी के रास्ते इक्विटी में निवेश करें।

5. क्या आप अनावश्यक रूप से प्रभावित हो रहे हैं?
सोशल मीडिया जैसे कई प्लेटफॉर्म्स पर इन दिनों बाजार के नए शिखर छूने के अनुमान या भारी गिरावट की आशंकाएं भारी पड़ी रहती हैं। यदि आप इनके प्रभाव में फैसले करते हैं तो यकीनन खुद को जोखिम में डाल रहे हैं। आपके लिए यह आसान भी है। ऐसे एप्स की भरमार है, जहां एक क्लिक पर ट्रेडिंग की जा सकती है। शेयरों में निवेश के मामले में भावनाओं में बहकर किए फैसले अकसर गलत होते हैं।

बेहतर विकल्प हो सकता है मॉडल पोर्टफोलियो
यदि आप लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न के लिए थोड़ा जोखिम उठाकर इक्विटी में निवेश करना चाहते हैं, लेकिन शेयर बाजार के बारे में सीमित समझ के चलते झिझक रहे हैं तो मॉडल पोर्टफोलियो अपना सकते हैं। इसमें जोखिम उठाने की क्षमता के हिसाब से रेडीमेड पोर्टफोलियो का अगर खुद निवेश कर रहे हैं चयन किया जाता है। इसमें निवेशक को शेयर चुनने या पोर्टफोलियो को रिबैलेंस करने की चिंता नहीं होती।

Mutual Fund में करते हैं निवेश तो तुरंत पूरा कर लें यह काम वरना नहीं निकाल पाएंगे पैसा

Mutual fund investors alert: म्यूचुअल फंड (Mutual fund) निवेशकों के लिए जरूरी खबर है। 31 मार्च 2022 तक अपने पैन कार्ड को आधार से लिंक करा लें, वरना इसका सीधा असर आपके म्यूचुअल फंड.

Mutual Fund में करते हैं निवेश तो तुरंत पूरा कर लें यह काम वरना नहीं निकाल पाएंगे पैसा

Mutual fund investors alert: म्यूचुअल फंड (Mutual fund) निवेशकों के लिए जरूरी खबर है। 31 मार्च 2022 तक अपने पैन कार्ड को आधार से लिंक करा लें, वरना इसका सीधा असर आपके म्यूचुअल फंड इन्वेस्टमेंट पर पड़ेगा। दरअसल, पैन-आधार लिंकिंग की आखिरी तारीख 31 मार्च है, अगर तय तारीख तक आप पैन-आधार को लिंक नहीं करा पाते हैं तो आप म्यूचुअल फंड में नया निवेश नहीं कर सकेंगे और न ही अपना पैसा निकाल सकेंगे। ऐसा इसलिए क्योंकि इस तरह के निवेश साधन के लिए पैन कार्ड (PAN Card) होना अनिवार्य रहता है।

नहीं कर सकेंगे नया निवेश
अगर म्यूचुअल फंड में पहली बार निवेश कर रहे हैं या किसी अन्य स्कीम में पहली बार निवेश करने का प्लान बना रहे हैं तो आपका पैन कार्ड वैलिड होना चाहिए। वहीं अगर आप म्यूचुअल फंड निवेशक हैं लेकिन आपका पैन इनवैलिड हो चुका है तो अपने वर्तमान म्यूचुअल फंड निवेश में अतिरिक्त यूनिट नहीं जोड़ सकेंगे।Mutual Fund में निवेश करने के लिए, आपको दो दस्तावेजीकरण प्रक्रिया (अगर खुद निवेश कर रहे हैं Documentation Process) से गुजरना होगा। एक, आपको अपने ग्राहक को जानिए (KYC) मानदंडों का पालन करना होगा और दूसरा, आपके पास एक वैध पैन होना चाहिए। ऐसे में आधार से लिंक न होने के कारण अगर आपका पैन अमान्य हो जाता है तो आप म्यूचुअल फंड में निवेश नहीं कर पाएंगे।

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SIP भी रुक जाएगा
अगर आपका पैन इनवैलिड हो जाता है तो सिस्टमैटिक इंवेस्टमेंट प्लान (SIP) से किए जाने वाला निवेश भी रुक जाएगा। यानी आप अपने म्यूचुअल फंड स्कीम में नई यूनिट नहीं जोड़ सकेंगे। अगर किसी म्यूचुअल फंड स्कीम में निवेश किया है तो पैन इनवैलिड होने पर उसे निकाल नहीं सकेंगे। यानी रिडेंप्शन रिक्वेस्ट्स रिजेक्ट हो जाएगी। वहीं, सिस्टमैटिक विदड्रॉल प्लान (SWP) भी रुक जाएगा।

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